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    Home»कवर स्टोरी»40 नौकरियां… जो खा जाएगा AI
    कवर स्टोरी

    40 नौकरियां… जो खा जाएगा AI

    एआई के बढ़ते उपयोग से जिन नौकरियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, उनमें कस्टमर सर्विस रिप्रजेंटेटिव सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा लेखक, पत्रकार, एडिटर, ट्रांसलेटर और प्रूफरीडर जैसे पेशे भी एआई की वजह से खतरे की जद में हैं। इनके अलावा कोडिंग सेक्टर में वेब डेवलपमेंट, डाटा साइंस, पीआर इंडस्ट्री और बिजनेस एनालिसिस जैसी नौकरियों पर भी खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
    teerandajBy teerandajDecember 12, 2025Updated:December 12, 2025No Comments
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    • अतुल्य उत्तराखंड के लिए विकास जोशी

    मौजूदा वक्त में सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग में कोई टेक्नोलॉजी अगर है तो वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) है। कभी जिस एआई की बात हम साइंस फिक्शन किताबों और फिल्मों में सुना करते थे, वह आज हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। हमारे मोबाइल फोन, लैपटॉप से लेकर हमारे घर में अब एआई ने पैठ बना ली है। सिर्फ घर ही नहीं बल्कि हमारे ऑफिस तक भी एआई पहुंच चुका है। इस एआई ने पहले ऑफिस पहुंचकर आपके हर काम में हाथ बंटाना शुरू किया। आप भी इसके सहारे छोटे-मोटे टास्क निपटा रहे हैं लेकिन अब एआई सिर्फ आपके टास्क निपटाने तक सीमित नहीं रह गया है।

    यह अब आपको रिप्लेस करने की स्थिति में भी आ चुका है। वैसे तो काफी समय से आशंका जताई जा रही थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कई नौकरियां खा सकता है लेकिन अब इस पर एक रिपोर्ट ने मुहर भी लगा दी है। माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि एआई एक, दो नहीं बल्कि 40 नौकरियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। रिपोर्ट में 40 ऐसी नौकरियों की सूची दी गई है जो एआई लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एआई एलएलएम) की वजह से प्रभावित हो सकती हैं। एक तरफ रिपोर्ट ने ऐसी 40 नौकरियों के बारे में बताया है जिन पर खतरा मंडरा रहा है तो दूसरी तरफ, 40 ऐसी नौकरियों की भी लिस्ट दी गई है जो एआई के प्रभाव से बची रहेंगी।

    माइक्रोसॉफ्ट की रिसर्च विशुद्ध तौर पर एलएलएम यानी लार्ज लैंग्वेज मॉडल के बारे में है। एलएलएम एक प्रकार का एआई ही है जो बड़ी मात्रा में टेक्स्ट डाटा पर ट्रेंड किया जाता है। इसे ऐसे प्रशिक्षित किया जाता है ताकि यह मानव-जैसी भाषा की समझ को विकसित और संशोधित करने में सक्षम हो। अब बात करते हैं नौकरियों की। रिपोर्ट बताती है कि एआई से उपजने वाला खतरा सिर्फ मैकेनिकल या मजदूरी वाली नौकरियों पर नहीं है बल्कि इस सूची में अब कई और सेक्टर शामिल हो गए हैं। लिस्ट में वो नौकरियां भी शामिल हैं जिन्हें हम सुरक्षित और बौद्धिक मानते थे। जैसे कि कोडिंग, लेखन, विश्लेषण और प्रबंधन।

    एआई का दिखने लगा असर

    भले ही अभी इन 40 नौकरियों पर संकट बढ़ने की आशंका जताई जा रही हो लेकिन एआई का असर कई तरह के कामों में दिखने लगा है। विशेषकर कंटेंट क्रिएशन में…। कई लोग अब एआई की मदद से लेखन का काम कर रहे हैं। प्रजेंटेशन से लेकर अनुवाद करने तक का काम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करने लगा है। नौकरियों में भी एआई को काफी ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट बताती है कि लीडर्स ऐसे लोगों को नौकरी पर नहीं रखना चाहते, जिनके पास एआई कौशल नहीं है। चिंताजनक बात यह है कि एआई कई पारंपरिक ‘सफेदपोश’ नौकरियों को इंसान से बेहतर और कई गुना तेजी से कर सकता है।

    खत्म हो सकती हैं नौकरियां

    सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट ही नहीं बल्कि एथ्रोपिक के सीईओ दारियो अमोदेई ने भी हाल ही में एक अलर्ट जारी किया है। उन्होंने बताया है कि आने वाले 1-5 साल में एआई लगभग 50% एंट्री-लेवल व्हाइट-कलर नौकरियों को समाप्त कर सकता है। उन्होंने विशेषकर अपने मॉडल क्लाउड का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे बेरोजगारी दर 10-20 फीसदी बढ़ सकती है। उन्होंने खासकर तीन प्रकार की नौकरियों को जोखिम बताया है। इसमें जूनियर कंसल्टेंट्स, ट्रेनी वकील और नए वित्तीय विश्लेषक जैसी नौकरियां शामिल हैं। ये वो नौकरियां हैं जिनमें शोध, दस्तावेज बनाने, पैटर्न विश्लेषण जैसे दोहराव वाले कामों पर निर्भरता ज्यादा होती है। उन्होंने दावा किया कि उनका मॉडल ‘क्लॉउडे’ इन कामों को अधिक तेजी से और कम लागत में कर सकता है। अमोदेई यह भी बताते हैं कि बहुत सी कंपनियां एआई को सिर्फ सहायक नहीं बल्कि निर्णायक उपकरण की तरह उपयोग कर रही हैं। उन्होंने सरकारों को सुझाव दिया है कि इस खतरे से लोगों को बचने के लिए कहने की बजाय उन्हें नई तकनीक के लिए तैयार करना चाहिए।

    चुनौती सिर्फ रोजगार की नहीं

    माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय बताती है कि समस्या केवल बेरोजगारी नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी नई चुनौतियां हैं जो हमारे समाज के ढांचे को हिला सकती हैं। जब इंटरनेट पर सब कुछ एआई द्वारा लिखा जाएगा तो नया विचार कहां से आएगा? हम एक ‘फीडबैक लूप’ में फंस सकते हैं जहां एआई उसी कचरे को रिसाइकिल करेगा जो उसने पहले बनाया था। इसे एआई हैलुसनेशन (दृष्टिभ्रम) और मौलिकता की मौत कहा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि कंपनियां एआई का उपयोग करके कर्मचारियों का खर्च बचाएंगी। इससे कंपनियों का मुनाफा तो बढ़ेगा लेकिन आम आदमी की आय कम होगी। इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई और गहरी होती जाएगी। जो लोग एआई को नियंत्रित करेंगे, वे दुनिया के सबसे अमीर लोग होंगे। कस्टमर सर्विस हो या स्वास्थ्य सेवा, अगर हर जगह मशीनें होंगी तो सहानुभूति खत्म हो जाएगी। एक मशीन कभी भी एक परेशान ग्राहक या मरीज के दर्द को उस तरह महसूस नहीं कर सकती जैसे एक इंसान करता है। एआई का उपयोग साइबर हमलों और डीपफेक बनाने में भी हो रहा है। आपकी आवाज और चेहरे का उपयोग करके स्कैम करना अब आसान हो गया है।

    फायदे का सौदा भी बन रहा एआई

    यह सच है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपकी जॉब के लिए खतरा पैदा कर सकता है। लेकिन यह खतरा तब ही है जब आप एआई को सीखने और समझने से खुद को दूर रखते हैं। प्रतिष्ठित सर्विस फर्म पीडब्ल्यूसी ने हाल ही में एआई और रोजगार पर इसके असर को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। ‘द फियरलेस फ्यूचर: 2025 ग्लोबल एआई जॉब्स बैरोमीटर’ में करीब एक अरब से ज्यादा रोजगार विज्ञापन का विश्लेषण किया गया है। 6 महाद्वीपों की कंपनियों का विश्लेषण करने के बाद तैयार की गई यह रिपोर्ट बताती है कि कंपनियां तेजी से एआई को अपने वर्कफ्लो में लागू कर रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि जिन इंडस्ट्रीज ने एआई का इस्तेमाल शुरू किया है, उनकी ग्रोथ तीन गुना तक बढ़ी है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि जो लोग एआई को सीख रहे हैं और अपने काम में लागू कर रहे हैं, उन्हें इसका फायदा मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक जिनको प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग कमांड जैसा कौशल आता है, उनकी तनख्वाह में 56% तक की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल यह बढ़ोत्तरी 25% थी। यह दर्शाता है कि एआई कौशल वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है और उन्हें कंपनियां अच्छा पैसा देने को भी तैयार है।

    एआई से डरें नहीं, सीखें


    माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट देखकर या फिर अमोदेई की बात सुनकर क्या आपको डरना चाहिए? जवाब है बिलकुल नहीं। लेकिन क्या आपको इस खतरे को नजरअंदाज कर देना चाहिए तो इसका जवाब भी ना में है। आपको एआई से डरने की नहीं बल्कि इसे अपने काम में समाहित करने की आवश्यकता है। आज तक जब भी कोई तकनीकी बदलाव दुनिया में हुआ है। उससे पुरानी नौकरियां तो गई हैं लेकिन नई सृजित भी हुई हैं। बस फर्क है तो सिर्फ इतना कि जिसने नई तकनीक सीख ली, उसके लिए मुश्किल नहीं। माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट भी अंत में यही कहती है, एआई आपकी नौकरी नहीं लेगा लेकिन जो व्यक्ति एआई का उपयोग करना जानता है, वह आपकी नौकरी ले लेगा। आपको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डरने की नहीं बल्कि सीखने की जरूरत है।

    इसकी शुरुआत आप आज से ही कर सकते हैं। धीरे-धीरे ही सही लेकिन अपने रोजमर्रा के काम में एआई को अपनाना शुरू करें। प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग सीखें। प्रॉम्प्ट इंजीनियिरंग में आप एआई से सवाल पूछना सीखते हैं। जिस प्रोफेशन में आप हैं, वहां कैसे अन्य लोग एआई का उपयोग करें, वो देखें। एक तरफ तो आपको एआई को अपने वर्क फ्लो का हिस्सा बनाने की कोशिश करनी है और दूसरी तरफ, आपको उन कौशल पर काम करना चाहिए, जो एआई के पास नहीं हैं। जैसे कि सहानुभूति और नेतृत्व, जटिल समस्याओं का समाधान और रचनात्मकता। आखिर में इतना ही याद रखिए तकनीक को चलाने के लिए भी इंसानों की आवश्यकता पड़ेगी। अगर आप संबंधित तकनीक को समय पर सीख जाते हैं तो वो तकनीक आपको नहीं बल्कि आप उसे चला रहे होंगे।

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