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    दुनिया भर की

    जी राम जी विधेयक लोकसभा में पास .. सिर्फ नाम ही बदला है या काम भी?

    मनरेगा के स्थान पर लाए गए विकसित भारत-गारंटी फार रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी विधेयक 2025 लंबी बहस के लोकसभा में पास हो गया। कहने वाले कहते हैं कि नाम में क्या रखा है, मगर संसद में पिछले दो दिनों से नाम के मुद्दे पर हंगामा बरपा है। आइए जानते हैं, नाम ही बदला है या काम भी...
    teerandajBy teerandajDecember 16, 2025Updated:December 18, 2025No Comments
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    संसद में बृहस्पतिवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोकसभा से वीबी-जी-राम-जी विधेयक पारित हो गया।  इससे पहले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी दलों के हंगामे पर नाराजगी व्यक्त की। लोकसभा में विकसित भारत जी राम जी विधेयक पर हुई विस्तृत चर्चा का जवाब देते समय शिवराज ने कहा कि विपक्षी दलों का हंगामा महात्मा गांधी का अपमान है। उन्होंने कहा कि बापू का अपमान कर रही विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने तो गांधी को भी गांधी से चुराने का पाप किया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सनक मोदी सरकार पर सवार नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने खानदान का महिमामंडन करने के लिए इन्होंने महात्मा गांधी की बजाय केवल नेहरू परिवार के नाम पर सरकारी योजनाओं का नामकरण किया। कांग्रेस पर खानदान के महिमामंडन में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए शिवराज ने कहा कि नेहरू परिवार के नाम पर योजनाओं के नाम रखे गए। उन्होंने दावा किया कि 25 नाम स्वर्गीय राजीव गांधी और 27 नाम इंदिरा गांधी के नाम पर रखे गए। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों, सड़कों, इमारतों, अवार्ड्स के नाम भी इसी खानदान के लोगों के नाम पर रखे गए।

    Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission Gramin Bill जिसे संक्षिप्त में वीबी जी राम जी कहा जा रहा है, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल नाम बदलने को हंगामा कर रहे हैं। बिल के पक्ष में केंद्र सरकार का कहना है कि मनरेगा योजना 2005 में आई थी। तब से बहुत कुछ बदल चुका है। करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल चुके हैं। यह योजना अब प्रासंगिक नहीं रह गई है। इसलिए इसमें आमूलचूल परिवर्तन जरूरी है। केंद्र सरकार का दावा है नई योजना ने ग्रामीणों को काफी लाभ होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य में भी तेजी आएगी। साथ ही मनरेगा में 100 दिनों काम की गारंटी थी। जी राम जी में 125 दिनों काम की गारंटी दी जाएगी।

    जी राम जी बिल पास होने के बाद यह मौजूदा मनरेगा कानून की जगह ले लेगा। पहले इसे पुज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना नाम दिए जाने की चर्चा थी। सोमवार को लोकसभा में सांसदों को विधेयक की प्रतियां बांटी गईं। इसमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त कर ग्रामीण रोजगार के लिए नया कानून लाने की बात है। विधेयक की प्रति के अनुसार इसका मकसद ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ विधेयक, 2025′ संसद में लाने और 2005 के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को निरस्त करने का प्रस्ताव है। इसमें लिखा गया है कि विधेयक का उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047′ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना है। जिसके तहत अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आने वाले प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को हर वित्त वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। इसका लक्ष्य सशक्तीकरण एवं विकास को बढ़ावा देकर समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत का निर्माण करना है।

    अलग क्या हो सकता है?

    • जो बताया जा रहा है उसके मुताबिक, जी राम जी में यह प्रावधान हो सकता है कि अगर 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जा जाएगा। अगर यह प्रावधान लागू होता है तो इससे काफी फर्क पड़ेगा। साथ ही पेमेंट सिस्टम को भी ज्यादा आसान और तेज बनाने की बात कही गई है। मनरेगा में जहां मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाता था। वहीं नए बिल में वीकली पेमेंट सिस्टम रखने की बात कही गई है। इसके तहत हर हफ्ते या काम पूरा होने के अधिकतम 15 दिनों के भीतर मजदूरी देना जरूरी होगा।
    • राज्य को भी देना होगा हिस्सा : मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। नई स्कीम में राज्यों को भी हिस्सा देना होगा। कुछ राज्यों में 90 फीसदी केंद्र और 10 फीसदी राज्य। जबकि बाकी राज्यों में 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य खर्च उठाएंगे। इससे योजना को चलाने में राज्यों की रोल और जिम्मेदारी दोनों बढ़ेंगी।
    • खेती बाड़ी के समय में (अधिकतम 60 दिन प्रतिवर्ष) इस योजना के तहत कार्य नहीं कराए जाएंगे, हालांकि प्राकृतिक आपदा या असाधारण परिस्थितियों में इसमें छूट दी जा सकेगी। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जियो-टैगिंग, डिजिटल एमआईएस डैशबोर्ड, साप्ताहिक सार्वजनिक खुलासे और सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य किया गया है।

    नाम बदलने पर हंगामा

    मंगलवार को कांग्रेस ने संसद में मनरेगा का नाम बदलने का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा, पता नहीं क्यों सरकार पर नाम बदलने का भूत सवार है। जब-जब ये किया जाता है तो केंद्र को पैसे खर्च करने पड़ते हैं। बिना चर्चा के और बिना सदन की सलाह लिए इस तरह जल्दी-जल्दी में विधेयक को पास नहीं कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में बदलाव करने पर अपनी आपत्ति दर्ज करना चाहती हूं। मनरेगा पिछले 20 वार्षों से ग्रामीण भारत को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है। जब इसे बनाया गया तो सदन के सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी सहमति दी थी।इस योजना में ग्राम सभाओं के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है। इस विधेयक के प्रबंधन से रोजगार का कानून कमजोर हो रहा है। यह हमारे संविधान के विपरित है। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा था कि कांग्रेस इसका विरोध करेगी। खरगे ने कहा कि यह सिर्फ मनरेगा का नाम बदलने का मामला नहीं है। यह एमजीएनआरईजीए को खत्म करने की भाजपा-आरएसएस की साजिश है। उधर, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल पूरी तरह से महात्मा गांधी जी की भावनाओं के अनुरुप है। शिवराज ने कहा कि पता नहीं क्यों विपक्ष को योजना में राम का नाम आने पर आपत्ति हो रही है।

    जी राम जी संसद
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