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    Home»दुनिया भर की»शराब के साथ तंबाकू…Mouth Cancer के लिए 62 फीसदी जिम्मेदार
    दुनिया भर की

    शराब के साथ तंबाकू…Mouth Cancer के लिए 62 फीसदी जिम्मेदार

    सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी और होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन। देसी शराब के साथ यदि खैनी, जर्दा या अन्य प्रकार का चबाने वाला तंबाकू लिया जाए तो यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
    teerandajBy teerandajJanuary 7, 2026No Comments
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    अपने देश में मुंह का कैंसर गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। ताजा वैज्ञानिक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शराब और तंबाकू का सेवन देश में Mouth Cancer के हर दस में से छह यानी 62 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। हैरानी की बात यह है कि शराब की बहुत कम मात्रा भी इस जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ा सकती है। महाराष्ट्र स्थित सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी और होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन के नतीजे ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित हुए हैं। शोध के अनुसार रोजाना महज 9 ग्राम शराब, जिसे एक स्टैंडर्ड ड्रिंक या एक पैग के बराबर माना जाता है मुंह के कैंसर का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।

    अध्ययन में यह भी सामने आया है कि देसी शराब जैसे महुआ, चुल्ली, अपोंग, बांगला और देसी दारू का सेवन कैंसर का खतरा और ज्यादा बढ़ा देता है। यदि इसके साथ खैनी, जर्दा या अन्य प्रकार का चबाने वाला तंबाकू लिया जाए, तो यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक शराब और तंबाकू का एक साथ सेवन करने से मुंह के कैंसर का खतरा चार गुना से भी अधिक हो जाता है। भारत में मुंह का कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल इसके करीब 1.44 लाख नए मामले सामने आते हैं। लगभग 80 हजार लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हो जाती है। चिंताजनक तथ्य यह भी है कि इस कैंसर से पीड़ित लोगों में से केवल 43 प्रतिशत मरीज ही पांच साल तक जीवित रह पाते हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से गाल और होंठों की अंदरूनी नरम परत यानी बक्कल म्यूकोसा को प्रभावित करती है।

     

    शोध के लिए वैज्ञानिकों ने वर्ष 2010 से 2021 के बीच देश के पांच अलग-अलग केंद्रों पर इलाज करा रहे 1803 कैंसर मरीजों और 1903 स्वस्थ लोगों का तुलनात्मक अध्ययन किया। प्रतिभागियों की उम्र ज्यादातर 35 से 54 वर्ष के बीच थी। करीब 46 प्रतिशत मरीज 25 से 45 वर्ष की उम्र के थे। इससे साफ है कि मुंह का कैंसर अब युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों से उनकी शराब और तंबाकू की आदतों के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई। मरीजों में शराब पीने वालों की संख्या 781 थी जबकि स्वस्थ लोगों में यह संख्या 481 रही। वहीं तंबाकू के इस्तेमाल की औसत अवधि कैंसर मरीजों में करीब 21 साल जबकि स्वस्थ लोगों में लगभग 18 साल पाई गई।

    शराब न पीने वालों की तुलना में शराब पीने वालों में मुंह के कैंसर का खतरा 68 प्रतिशत अधिक पाया गया। ब्रांडेड शराब पीने वालों में यह जोखिम 72 प्रतिशत, जबकि देसी शराब पीने वालों में सबसे ज्यादा 87 प्रतिशत तक दर्ज किया गया। यहां तक कि रोजाना दो ग्राम से भी कम बीयर पीने पर कैंसर का खतरा बढ़ा हुआ पाया गया। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि शराब में मौजूद इथेनॉल मुंह की अंदरूनी परत को कमजोर कर देता है। जिससे तंबाकू में मौजूद कैंसर पैदा करने वाले तत्व आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। वहीं देसी शराब के अनियंत्रित उत्पादन के कारण उसमें मेथनॉल और एसीटैल्डिहाइड जैसे जहरीले तत्व का इस्तेमाल भी किया जाता है। यह कैंसर के खतरे को और बढ़ा देते हैं।

     

    Medical Research मेडिकल
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