अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर दी है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय अंकिता के माता-पिता की भावनाओं और हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो के बाद उपजे जनाक्रोश के मद्देनजर लिया गया है। कहा जा रहा है कि मुद्दा और तूल नहीं पकड़े, इसलिए सीएम ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है। क्योंकि इस मुद्दे पर राजनीति चरम पर पहुंच चुकी थी।
बतादें कि अंकिता भंडारी के माता-पिता, सोनी देवी और वीरेंद्र भंडारी ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई जांच का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री धामी ने उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया था कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ है और उनकी संतुष्टि के लिए हर संभव कदम उठाएगी। इसी क्रम में, कानूनी पहलुओं पर विधिवत राय लेने के बाद राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर सीबीआई जांच की सिफारिश केंद्र को भेज दी है।

उर्मिला सनावर के आरोपों के बाद बढ़ी थी सरगर्मी
पिछले माह फिर से चर्चा में आया, जब अंकिता हत्याकांड से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। यह ऑडिया अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने जारी किया था। इस ऑडियो में कुछ राजनीतिक नेताओं के नाम सामने आने के बाद प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया। कांग्रेस और यूकेडी (उत्तराखंड क्रांति दल) जैसे विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर प्रदर्शन किया।
हालांकि, सीएम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इस ऑडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए थे। फिर भी उन्होंने कहा था कि अंकिता के माता-पिता जैसे चाहेंगे वही होगा। जनता के भरोसे और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए अब मामले को सीबीआई के सुपुर्द करने का निर्णय लिया गया है। इस मामले में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
श्रेय लेने की होड़…वार-पलटवार तेज
अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच श्रेय लेने की होड़ मच गई। जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसे सरकार का जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता का प्रमाण बता रही है वहीं कांग्रेस इसे जनता के दबाव और संघर्ष की जीत करार दे रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अंकिता के माता-पिता की इच्छा और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला लिया है। भट्ट ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उनके झूठ और दुष्प्रचार का पर्दाफाश हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पहले ही हत्यारों को जेल भेजकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की थी लेकिन किसी भी प्रकार के संदेह की गुंजाइश न रहे, इसलिए सीबीआई जांच की संस्तुति की गई है।
दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसे अपनी और जनता की जीत बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जनता के एकजुट होकर सड़कों पर उतरने के कारण सरकार को झुकना पड़ा है। हालांकि, उन्होंने मांग की है कि केवल सीबीआई जांच पर्याप्त नहीं है निष्पक्षता के लिए इसे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में होना चाहिए। रावत ने वीआईपी के नाम का खुलासा करने और साक्ष्य मिटाने वालों पर एफआईआर की मांग भी दोहराई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सीबीआई जांच की सिफारिश यह स्वीकारोक्ति है कि पहले की जांच में चूक हुई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता और दोषियों को सजा नहीं होती तो कांग्रेस का संघर्ष सड़क से सदन तक जारी रहेगा।








