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    स्पेशल

    लो जी, अब आ गया पहाड़ी AI

    दुनिया की किसी भी भाषा में सवाल पूछकर जवाब गढ़वाली में ले सकते हैं। उत्तराखंड के दो आईटी पेशेवरों ने किया डेवलप
    teerandajBy teerandajNovember 17, 2025Updated:November 20, 2025No Comments
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    आज के समय में AI का बोलबाला है। हर काम में इसका इस्तेमाल हो रहा है, जहां नहीं हो रहा है वहां ट्रायल चल रहा है। तो भला उत्तराखंडी कैसे पीछे रहते! उत्तराखंड के दो आईटी पेशवरों जय आदित्य नौटियाल और सुमितेश नैथानी ने एक ऐसा AI सॉफ्टवेयर विकसित किया है जो गढ़वाली में जवाब देगा। सवाल चाहे दुनिया की किसी भी भाषा में क्यों न पूछा गया हो। इसका नाम ही पहाड़ी AI है। यह जनता के लिए उपलब्ध हो चुका है। इसकी खासियत यह है कि आप एक क्लिक से चैट जीपीटी की तरह गढ़वाली, इंग्लिश या दुनिया की किसी भी भाषा में अपने प्रश्न पूछकर उनका उत्तर गढ़वाली में ले सकते हैं। संभवतः यह विश्व का पहला एआई है जो किसी विलुप्तप्राय भाषा का संरक्षण करने में सक्षम बना है। यदि इस मॉडल को वैश्विक स्तर पर अपनाया जाए, तो अनगिनत भाषाओं को नया जीवन मिल सकता है। इसका शुभारंभ उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री और भाषा मंत्री सुबोध उनियाल ने किया।

    उन्होंने कहा कि गढ़वाल भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए इन एआई इंजीनियरों का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात लोग बहुत से लोग कर रहें हैं लेकिन इन दो युवा ए आई इंजीनियरों ने यह काम करके दिखा दिया और बड़े वैज्ञानिक तरीके से किया है। इस कार्य में उत्तराखंड भाषा विभाग और एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय मिलकर सॉफ्टवेयर को पूर्ण रूप से विकसित करेंगे।

    लंदन में काम करते समय आया विचार
    खास बात यह है कि पहाड़ी एआई को विकसित करने वाले जय आदित्य नौटियाल और सुमितेश नैथानी जब लंदन में एआई विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत थे तब उन्हें यह विचार आया था। उन्होंने तब ही ठान लिया था कि उत्तराखंड की लुप्तप्राय गढ़वाली और अन्य भाषाओं के प्रचार के लिए एक एआई वेबसाइट विकसित करेंगे। जब दोनों लंदन से वापस आए तो गांव-गांव जाकर स्थानीय बोलियों, उच्चारणों, ध्वनियों और भाषायी पैटर्न का गहन अध्ययन किया। इस परियोजना में लगभग डेढ़ साल का समय लगा जहां उनके साथ डॉ अदिति नौटियाल भी जुड़ीं जो अब पहाड़ीai क्रिएटिव हेड हैं और मेडिकल ट्रेनिंग और वेलिडेशन की चीफ भी अब यह वेबसाइट ऑनलाइन और निःशुल्क उपयोग के लिए उपलब्ध है।

    यह भी पढ़ें :  गंगधारा… वैवाहिक संबंधों पर कई प्रावधान मगर वह संपूर्ण समाधान नहीं : न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी

    हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के प्रतिनिधि प्रो.मोहन पंवार ने कहा कि मातृभाषा गढ़वाली और उत्तराखंड की अन्य भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन में यह एआई वेवसाइट कारगर साबित होगा। गढ़वाल विश्वविद्यालय का लोक कला और संस्कृति निष्पादन केंद्र इस कृत्रिम मेधा के साथ कार्य कर रहा है। उत्तराखंड के लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि नई तकनीक नई पीढ़ी को अपनी भाषा से जुड़ने में मदद करेगी। मेरा मानना ​​है कि युवाओं को अपनी भाषा के प्रति आकर्षित करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    ऐप कैसे उपयोग करें

    •  ⁠https://pahadi.ai पर जाए और निशुल्क लॉग-इन करें
    • ⁠ चैट करा बटन दबाएं – चैटGPT जैसा इंटरफेस खुल जाएगा
    • ⁠ ⁠माइक्रोफोन से बोलें या टेक्स्ट बार में अपना प्रश्न लिखें
    • ⁠ ⁠Pahadi.ai पहाड़ी भाषा में जवाब देगा जो आप स्क्रीन में देख सकोगे
    • ⁠ ⁠स्पीकर बटन से उत्तर को आवाज में सुना जा सकता है
    • ⁠ ⁠सभी चैट्स बाएं पैनल में स्वतः सेव रहती हैं
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