जनगणना 2027 की अधिसूचना गृह मंत्रालय ने जारी कर दी है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं सील हो गई हैं। अब जनगणना होने तक किसी भी जिले, तहसील, निकाय, पंचायत, वार्ड की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। बताया जा रहा है कि यह कदम सटीक आंकड़ों के लिए जरूरी है, क्योंकि बदलाव से डेटा गड़बड़ा सकता है। 16 फरवरी से प्रशिक्षण शुरू हो रहा है जबकि पहले चरण के तहत मकान गणना का काम 25 अप्रैल से शुरू होगा।
प्रदेश में जनगणना तीन चरणों में होगी। पहला चरण 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण व गणना पर केंद्रित रहेगा। दूसरा चरण 11 से 30 सितंबर 2026 को बर्फीले स्नोबाउंड क्षेत्रों (गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ व आसपास 150 गांवों) में चलेगा, ताकि सर्दी में पलायन से बचाव हो। तीसरा मुख्य चरण 9 से 28 फरवरी 2027 को देशभर के साथ अन्य इलाकों में होगा।

व्यापक प्रशिक्षण अभियान
16 फरवरी से अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया जाएगा। जनगणना के लिए 23 मास्टर्स ट्रेनर 555 फील्ड ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। जो 4000 सुपरवाइजर व 30 हजार कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे। 25 मार्च से 7 अप्रैल तक मुख्य चरण चलेगा। प्रत्येक बैच में 40 कर्मचारियों को तीन दिन का ट्रेनिंग। डिजिटल टूल्स व मोबाइल ऐप्स से यह पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। जनगणना निदेशालय की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अधिसूचना जारी होते ही प्रदेश की सीमाएं सील हो गईं। जनगणना पूरी होने तक जिलों-तहसीलों-वार्डों की सीमाएं अपरिवर्तित रहेंगी। उन्होंने जोर दिया कि इससे आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।








