इस वर्ष चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने नई रणनीति तैयार की है। अमरनाथ यात्रा की तर्ज पर अब चारधाम यात्रियों की निगरानी की जाएगी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने यात्रियों को आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) कार्ड जारी करने का सुझाव दिया है, जिससे हर यात्री की लोकेशन और मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। प्रशासन का मानना है कि आरएफआईडी कार्ड से आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना आसान होगा। इसके जरिए यह भी पता लगाया जा सकेगा कि कौन यात्री किस स्थान पर है, जिससे भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
चारधाम यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं, जिससे व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार यात्रा से पहले अनिवार्य पंजीकरण पर जोर दिया जा रहा है। पंजीकरण के दौरान यात्रियों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी ली जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके। एनडीएमए ने विशेष रूप से बुजुर्ग यात्रियों के लिए मेडिकल प्रमाणपत्र अनिवार्य करने की सिफारिश की है। 60 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य जांच जरूरी हो सकती है, जिससे यात्रा के दौरान जोखिम को कम किया जा सके। इसके साथ ही यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया जाएगा।

सुरक्षा के लिहाज से धामों और यात्रा मार्ग पर एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) की तैनाती का प्रस्ताव है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी रखेंगी और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। यात्रा शुरू होने से पहले पूरे मार्ग का निरीक्षण भी किया जाएगा। इसके अलावा, विभिन्न स्थानों पर आरएफआईडी स्कैनर लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों की एंट्री और एग्जिट का रिकॉर्ड रखा जा सके। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यातायात और भीड़ नियंत्रण भी आसान होगा।
वहीं, केदारनाथ धाम में सफाई व्यवस्था को लेकर सख्ती बरती जा रही है। गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी और हेली एम्बुलेंस सेवा को और मजबूत किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। प्रशासन का दावा है कि इन सभी उपायों से चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुगम बनाया जा सकेगा।










