Close Menu
तीरंदाज़तीरंदाज़
    https://www.teerandaj.com/wp-content/uploads/2025/08/Vertical_V1_MDDA-Housing.mp4
    https://www.teerandaj.com/wp-content/uploads/2025/12/MDDA_Final-Vertical_2.mp4
    अतुल्य उत्तराखंड


    सभी पत्रिका पढ़ें »

    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube Pinterest Dribbble Tumblr LinkedIn WhatsApp Reddit Telegram Snapchat RSS
    अराउंड उत्तराखंड
    • जैव विविधता में Uttarakhand की धाक…नैनीताल में मिली फलमक्खी की दुर्लभ प्रजाति
    • अंकिता भंडारी हत्याकांड की होगी सीबीआई जांच
    • हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 : आस्था पथ होगा आकर्षण का केंद्र
    • मानव वन्यजीव संघर्ष : संवेदनशील इलाकों की होगी मैपिंग
    • काटना ही नहीं… पीछा करना भी गंभीर, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-हादसों की वजह बन रहे कुत्ते
    • अंकिता भंडारी हत्याकांड की हो सकती है सीबीआई जांच
    • डिजिटल पुलिसिंग में Uttarakhand का दबदबा…ICJS 2.0 रैंकिंग में देश भर में प्रथम स्थान
    • शराब के साथ तंबाकू…Mouth Cancer के लिए 62 फीसदी जिम्मेदार
    • Uttarakhand : हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा के लिए सैन्य-नागरिक समाज के समन्वय पर जोर
    • उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम घोषित : 21 फरवरी से 20 मार्च तक होंगी 10वीं-12वीं की परीक्षाएं
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp Telegram LinkedIn
    Sunday, January 11
    तीरंदाज़तीरंदाज़
    • होम
    • स्पेशल
    • PURE पॉलिटिक्स
    • बातों-बातों में
    • दुनिया भर की
    • ओपिनियन
    • तीरंदाज LIVE
    तीरंदाज़तीरंदाज़
    Home»अतुल्य उत्तराखंड»छिनकेप सदन… आठ पीढ़ियों की दास्तान
    अतुल्य उत्तराखंड

    छिनकेप सदन… आठ पीढ़ियों की दास्तान

    teerandajBy teerandajJune 11, 2024Updated:June 11, 2024No Comments
    Share now Facebook Twitter WhatsApp Pinterest Telegram LinkedIn
    छिनकेप सदन
    Share now
    Facebook Twitter WhatsApp Pinterest Telegram LinkedIn

    लोग अक्सर पूछते हैं, अपनी सभ्यता-संस्कृति को कैसे संजोया-संरक्षित किया जाए। अगर आपको यह देखना हो तो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के विश्व-विख्यात मुनस्यारी की जोहार वैली के दरकोट में आना चाहिए। यहां आपको एक खूबसूरत उदाहरण दिखेगा। इसका नाम है छिनकेप सदन…इसमें लगी तिबारी 100 साल पुरानी है। इस घर से आठ पीढ़ियों का जुड़ाव है। घर में लकड़ी का स्ट्रक्चर इसकी खूबसूरती पर चार चांद लगा देता है। इस तरह संरक्षण के उम्मीद एक संस्कृतिकर्मी से ही की जा सकती है।

    अपनी कला से देश की राष्ट्रपति का ध्यान खींचने वाले रंगकर्मी लक्ष्मण पांगती छिनकेप पांगती के ही वंशज हैं। पूर्वजों के सम्मान में ही उनके मकान का नाम छिनकेप सदन है। वह बताते हैं कि यह घर बाद में आधुनिक तरीके से बनाया गया है। लेकिन, हमने कोशिश की है कि इसमें हमारी सभ्यता और संस्कृति की झलक मिलती रहे। छिनकेप सदन का इतिहास बताते हुए लक्ष्मण पांगती कहते हैं, देश में जैसे बेगारी, सती,दास प्रथाएं आदि थीं। उसी तरह नीलम घाटी में 1700 ईसवी के आसपास सत्तू बेगारी प्रथा थी। सत्तू एक प्रकार का कपड़ा होता है, जिसका उत्पादन यही होता है। उस समय इसे तिब्बत के गोपांव मंदिर में चढ़ाया जाता था। नीलम घाटी से इसे बारी-बारी से तिब्बत पहुंचाया जाता था। एक बार पांचू गांव की एक विधवा की बारी इस कपड़े को पहुंचाने की आई। रास्ते में वह किसी नाले में गिर गई। सत्तू गीली हो गया।

    लक्ष्मण प्रसाद पंघ (बाएं) के साथ बातचीत करते वरिष्ठ पत्रकारअर्जुन रावत।

    वह किसी तरह वह गोपांव पहुंची, वहां जब पवित्र कपड़ा गीला होने की बात पता चली तो उस पर कोड़े बरसाए गए। जब यह खबर जोहार घाटी पहुंची तो लोग आक्रोशित हो उठे। विरोध जताने और प्रथा को बंद कराने के लिए छिनकेप पांगती ल्हासा के लिए निकल पड़े। वहां पहुंचने के लिए 16 तर्जन यानी पड़ाव पड़ते थे। बताया जाता है-जब वह 10-11वें पड़ाव पर थे तो इसकी जानकारी तिब्बत के शासक को मिल गई। उन लोगों को भी यह प्रथा बंद करने की मांग ठीक लगी। तब उन्होंने इस प्रथा को बंद करने का निर्णय ले लिया। इसके बाद नीलम घाटी में छिनकेप को लेकर तरह-तरह के लोकगीत प्रचलन में आ गए। जिन्हें आज भी गाया जाता है।

    इसके अलावा तेजम तहसील में पहले खेती बाड़ी की जाती रही है। लेकिन, यहां पानी की काफी कमी थी। तो हमारे पूर्वज यानी छिनकेप ने वहां नहर बनाकर सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित की। इस पर भी यहां एक गीत बना है। आप नीलम घाटी जाएंगे। आज भी वहां एक चौखट है जहां लिखा है- श्री छिनकेप पांगती ले बणायो, बद्रीनाथ जी की कृपा से 1666 मा, यानी सन 1666 में छिनकेप पांगती ने उस घर को बनाया था।

    छिनकेप सदनलक्ष्मण पांगती बताते हैं- हमारे पूर्वज घुमक्कड़ थे। शायद यही वजह थी कि हम पहले से ही साक्षर थे, क्योंकि हमको व्यापार करने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तिब्बत और देश के कई अन्य हिस्सों में जाना पड़ता था। वह अपनी नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से अपनी जनजाति के बारे में लोगों को बताते हैं। हमारी संस्कृति काफी समृद्ध हैं। आजादी की लड़ाई में भी हमारा अहम योगदान रहा है। हमारी जनजाति से कई स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। शौका समाज के लोगों का काम बाहर आने जाने का था। हम लोगों के जरिये स्वतंत्रता संग्राम की तमाम खबरें इधर-से उधर पहुंचती थीं।

     

    लक्ष्मण पांगती के मुताबिक, उन लोगों का पारंपरिक व्यवसाय ऊन से कपड़े बनाने का था। इसमें महिलाएं भी सहयोग करती थीं। आज भी उनके समुदाय के लोग यह व्यापार कर रहे हैं। स्वरूप बदल गया है। यहां का ऊन मोटा होता है, लोग अब सॉफ्ट ऊन पसंद करते हैं। इसलिए पहले जैसा व्यापार तो नहीं रहा है। लेकिन, हम लोगों ने भी खुद को बदला है। अब मिक्स ऊन के कपड़े बनाने लगे हैं। इसी कारोबार से हमारे बाप-दादा ने हम लोगों को पढ़ा लिखा कर इस काबिल बनाया है। इसलिए इससे लगााव है।

    छिनकेप सदनसितंबर माह में भारत में आयोजित जी-20 सम्मेलन ने देश-दुनिया में खूब सूर्खियां बटोरी। मीडिया ने हर गतिविधि की जोरदार रिपोर्टिंग की। कई एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। लक्ष्मण पांगती ने भी अपनी टीम के साथ इस घाटी के परंपरागत और विलुप्त प्रायः 22 प्रकार के वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति दी। जिसे घाटी के एक इलाके में अलग-अलग मौकों पर बजाया जाता है। लोगों के बीच यह चर्चा का विषय भले ही न बना हो, मगर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को यह खूब भाया। उन्होंने राष्ट्रपति भवन के कुछ कर्मचारियों को जोहार वैली दरकोट स्थित छिनकेप सदन भेजा। राष्ट्रपति भवन से आए लोग भी इस भवन की सजावट देख मुग्ध हो गए थे। खिड़की दरवाजों पर जो नक्काशी की गई थी, वह अप्रतिम थी। वह बताते हैं- उस समय आकाशवाणी दिल्ली से मनोहर सिंह रावत ने मुझे फोन कर जी-20 में प्रस्तुति देने का प्रस्ताव दिया। मुझे यह अच्छा लगा। अपनी संस्कृति, सभ्यता के बारे में कला के माध्यम से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुति करने का मौका मिलने वाला था। हमारे यहां कई तरह के वाद्य यंत्र हैं। जिन्हें विशेष मौकों पर बजाया जाता है। जैसे- मौत के लिए अलग, जन्म के लिए अलग, खुशी के मौके के लिए अलग धुन, यहां तक कि जब बलि दी जाती थी तब के लिए भी अलग धुन होती है। हमने इसे जी-20 में पेश किया। जिसे काफी पसंद किया गया।

     

     

    Uttarakhand News
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Pinterest Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram Follow on LinkedIn
    Share. Facebook Twitter WhatsApp Pinterest Telegram LinkedIn
    teerandaj
    • Website

    Related Posts

    जयमित्र सिंह बिष्ट … हिमालय की 30 साल की साधना

    December 16, 2025 FOLK रंग By teerandaj4 Mins Read2
    Read More

    विकसित भारत में पब्लिक रिलेशंस की भूमिका पर होगा मंथन

    December 13, 2025 अतुल्य उत्तराखंड By teerandaj3 Mins Read2
    Read More

    Uttarakhand : गढ़वाली, कुमाउंनी भाषा अकादमी बनाने की मांग ने पकड़ा जोर

    December 7, 2025 FOLK रंग By teerandaj4 Mins Read12
    Read More
    Leave A Reply Cancel Reply

    https://www.teerandaj.com/wp-content/uploads/2025/08/Vertical_V1_MDDA-Housing.mp4
    https://www.teerandaj.com/wp-content/uploads/2025/12/MDDA_Final-Vertical_2.mp4
    अतुल्य उत्तराखंड


    सभी पत्रिका पढ़ें »

    Top Posts

    Uttarakhand : आपदा में भी मुस्कुराई जिंदगी, पहाड़ों को लांघकर पहुंची मेडिकल टीम, घर में कराई डिलीवरी

    August 31, 202531K

    CM Dhami ने दून अस्पताल में निरीक्षण कर मरीजों से लिया फीडबैक, वेटिंग गैलरियों में पंखे लगाने, सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश

    September 13, 202531K

    ऋषिकेश में अवैध निर्माणों पर MDDA की ताबड़तोड़ कार्रवाई, 11 बहुमंजिला स्ट्रक्चर सील 

    August 30, 202531K

    Chardham Yatra-2025: चलो बुलावा आया है, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा बहाल

    September 6, 202524K
    हमारे बारे में

    पहाड़ों से पहाड़ों की बात। मीडिया के परिवर्तनकारी दौर में जमीनी हकीकत को उसके वास्तविक स्वरूप में सामने रखना एक चुनौती है। लेकिन तीरंदाज.कॉम इस प्रयास के साथ सामने आया है कि हम जमीनी कहानियों को सामने लाएंगे। पहाड़ों पर रहकर पहाड़ों की बात करेंगे. पहाड़ों की चुनौतियों, समस्याओं को जनता के सामने रखने का प्रयास करेंगे। उत्तराखंड में सबकुछ गलत ही हो रहा है, हम ऐसा नहीं मानते, हम वो सब भी दिखाएंगे जो एकल, सामूहिक प्रयासों से बेहतर हो रहा है। यह प्रयास उत्तराखंड की सही तस्वीर सामने रखने का है।

    एक्सक्लूसिव

    Dhami Cabinet विस्तार का काउंटडाउन शुरू? पूर्व मंत्रियों को तत्काल मंत्री आवास खाली करने को कहा गया, देखें पत्र

    August 27, 2025

    Dehradun Basmati Rice: कंकरीट के जंगल में खो गया वजूद!

    July 15, 2025

    EXCLUSIVE: Munsiyari के जिस रेडियो प्रोजेक्ट का पीएम मोदी ने किया शिलान्यास, उसमें हो रहा ‘खेल’ !

    November 14, 2024
    एडीटर स्पेशल

    Uttarakhand : ये गुलाब कहां का है ?

    February 5, 202512K

    India Space Missions … अंतरिक्ष में भारत का बसेरा!

    September 14, 202511K

    Dehradun Basmati Rice: कंकरीट के जंगल में खो गया वजूद!

    July 15, 202511K
    तीरंदाज़
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube Pinterest LinkedIn WhatsApp Telegram
    • होम
    • स्पेशल
    • PURE पॉलिटिक्स
    • बातों-बातों में
    • दुनिया भर की
    • ओपिनियन
    • तीरंदाज LIVE
    • About Us
    • Atuly Uttaraakhand Emagazine
    • Terms and Conditions
    • Privacy Policy
    • Disclaimer
    © 2026 Teerandaj All rights reserved.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.