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    Home»उत्तराखंड 360»47 डिग्री में भी फल देगा चाइना ऑरेंज, पंतनगर किसान मेला में बना आकर्षण
    उत्तराखंड 360

    47 डिग्री में भी फल देगा चाइना ऑरेंज, पंतनगर किसान मेला में बना आकर्षण

    पहली बार उत्तराखंड पहुंचा चीन की मंडारिन किस्म का संतरा। किसानों में उत्साह, जलवायु परिवर्तन के दौर में बागवानी के लिए नई उम्मीद।
    teerandajBy teerandajMarch 16, 2026No Comments
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    उत्तराखंड में पहली बार चाइना ऑरेंज (मंडारिन ऑरेंज) नामक खास किस्म के संतरे ने दस्तक दी है। यह संतरा 47 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी फल देने की क्षमता रखता है। पंतनगर किसान मेला में इसके पौधे पहली बार प्रदर्शन और बिक्री के लिए लाए गए। किसानों और आगंतुकों के बीच खासा उत्साह और कौतूहल देखने को मिला। यह पौधे चीन से लाए गए हैं और इन्हें यहां की जलवायु परिस्थितियों में आजमाने की पहल की जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान और बदलती जलवायु के दौर में ऐसी किस्में खेती के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। मेले में बड़ी संख्या में किसान इस नई प्रजाति के बारे में जानकारी लेने और इसकी खेती की संभावनाओं को समझने के लिए पहुंचे।

    यह पहल कृषि अनुसंधान के लिए प्रसिद्ध संस्थान गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर में आयोजित किसान मेले में सामने आई जहां किसानों को नई तकनीकों और फसलों से परिचित कराया गया। मेले में प्रदर्शित चाइना ऑरेंज के पौधे किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे। कई किसान इसकी विशेषताओं को जानने और इसकी खेती के तरीके समझने के लिए स्टॉल पर पहुंचते रहे। पौधे तैयार करने वाले किसानों का कहना है कि यह संतरा गर्म और नम जलवायु में भी अच्छी तरह विकसित हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जहां पारंपरिक संतरे की फसल अधिक तापमान में प्रभावित हो जाती है, वहीं यह किस्म 47 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन कर सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के तराई और मैदानी क्षेत्रों में इसकी खेती की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। यदि इसका परिणाम सकारात्मक रहा तो यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बन सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक फसलों के साथ नई और जलवायु के अनुकूल किस्मों को अपनाना समय की जरूरत बनता जा रहा है। चाइना ऑरेंज जैसी फसलें किसानों की आय बढ़ाने के लिए नया विकल्प बन सकती हैं। मेले में आए कई किसानों ने इसके पौधे खरीदे भी। जानकारी के अनुसार परीक्षण के तौर पर करीब 300 पौधों की बिक्री हो चुकी है और कई किसान इन्हें अपने खेतों में लगाने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो राज्य में बागवानी के क्षेत्र में एक नई दिशा मिल सकती है। इससे खेती में विविधता आएगी और किसानों को बेहतर बाजार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

    सेहत के लिए भी फायदेमंद

    चाइना ऑरेंज केवल खेती के लिहाज से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसमें विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका नियमित सेवन इम्युनिटी को मजबूत बनाने के साथ हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है।

    जलवायु परिवर्तन के दौर में उम्मीद

    बढ़ते तापमान और बदलती जलवायु के कारण पारंपरिक फसलों पर असर पड़ रहा है। ऐसे में अधिक तापमान सहन करने वाली नई किस्मों का विकास कृषि के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। चाइना ऑरेंज की यह पहल इसी दिशा में एक प्रयोग के रूप में देखी जा रही है। यदि यह उत्तराखंड की जलवायु में सफल रहा तो आने वाले समय में राज्य के बागवानी क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

    किसान मेले में रुद्राक्ष के पौधों के लिए उमड़ी भीड़

    पंतनगर में आयोजित किसान मेले में इस बार रुद्राक्ष के पौधों ने प्रकृति प्रेमियों और श्रद्धालुओं का खास ध्यान खींचा। मेले में कई नर्सरियों के स्टॉल पर रुद्राक्ष के पौधे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ देखी गई और कई जगह पौधे हाथों-हाथ बिक गए।
    नर्सरी संचालकों के अनुसार बदलते समय के साथ लोग अब केवल सजावटी पौधों तक सीमित नहीं रह गए हैं बल्कि औषधीय और धार्मिक महत्व वाले पौधों की ओर भी तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। रुद्राक्ष का पौधा धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपने औषधीय गुणों के कारण भी लोकप्रिय हो रहा है। नर्सरी संचालक मदन कुमार ने बताया कि अब पौधों को विभिन्न जलवायु में विकसित करने के लिए लेब तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इससे पौधे मजबूत होते हैं और उनमें फल आने की संभावना भी अधिक रहती है। लेब में तैयार पौधे अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार विकसित किए जाते हैं और कुछ वर्षों में फल देने लगते हैं।

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