Delhi Blast मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आतंकी दो कारों में सवार होकर दिल्ली में घुसे थे। डॉ. उमर ने अपनी कार को ब्लास्ट करा दिया। जबकि दूसरी कार अब भी दिल्ली या उसके आसपास घूम रही है। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसी भी सकते में है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में खोजबीन युद्धस्तर पर की जा रही है। ये खुलासा घटनास्थल के पास पार्किंग और घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों से हुआ है। एक आतंकी लाल रंग की ईको स्पोटर्स कार से घूम रहा है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस कार का रजिस्ट्रेशन नंबर दिल्ली का है। ऐसे में दिल्ली पुलिस समेत देश की सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच में आई इस बात के बाद पूरी दिल्ली में हाई अलर्ट कर दिया गया है। दिल्ली में सभी वीवीआईपी, एतिहासिक व बाजारों खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस सूत्रों ने बताया कि आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का फरीदाबाद मोड्यूल के संदिग्ध फरीदाबाद में पुलिस की दबिश बढ़ने के बाद दिल्ली में दो कारों से पहुंचे थे। एक कार, जोकि हरियाणा नंबर की है, से लालकिले के सामने बम धमाका किया गया है। जबकि दूसरी कार अभी दिल्ली में बेलगाम घूम रही है। इस कार का रजिस्ट्रेशन नंबर-डीएल-10 सीके 045.. हैं। ये ईको स्पोर्टस कार हैं और इसका रंग लाल है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि दोनों कारें एक साथ दिल्ली पहुंची थी और चांदनी चौक पार्किंग में भी एक ही साथ थीं।

इस कार में एक संदिग्ध सवार था और वह आई-20 कार में सवार संदिग्धों से बात भी कर रहा था। स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि ये दोनों कारें बदरपुर बॉर्डर से एक साथ ही दिल्ली घुसी थीं। साथ ही चांदनी चौक व लालकिले के आसपास एक साथ घूम रही थी। दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार देर रात तक इस कार व उसमें सवार संदिग्ध के बारे में कोई सुराग हाथ नहीं लगा था। जांच में ये बात सामने आने के बाद दिल्ली में जगह-जगह पिकेट लगाकर वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी गई थी।
घटनास्थल पर मिले कारतूस ने बढ़ाई चिंता

जांच एजेंसियों ने इस बात तस्दीक की है कि घटनास्थल पर मिले कारतूस सरकारी नहीं हैं। यानी, आतंकियों के पास हथियार और कारतूस भी हो सकते हैं। इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सकते में आ गई है।
दिल्ली ब्लास्ट…डर और जल्दबाजी में किया गया
सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच में लाल किला के पास बम धमाके को डर और लापरवाही का नतीजा बताया जा रहा है। आतंकी भले ही दिल्ली को दहलाने में कामयाब हो गए हो लेकिन देश की सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की देश को दहलाने या देश में बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया। धमाके के तार फरीदाबाद और लखनऊ जैश के आतंकी मॉड्यूल से जुड़ते नजर आ रहे हैं। ये पहला मॉड्यूल है कि जिसने हरियाणा, यूपी, जम्मू कश्मीर और दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया था। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ा डॉक्टर उमर मोहम्मद अपने मॉड्यूल के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी से डर गया था। वह पुलिस से बचकर दिल्ली आ गया था और गिरफ्तारी के डर से लाल किला के पास बम धमाका कर खुद को उड़ा लिया, या वह आत्मघाती बम बन गया। लापरवाही ये है कि फरीदाबाद में भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने के बाद बावजूद दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नहीं जागीं।

दिल्ली का पहला फिदायीन हमला
लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास 10 नवंबर की शाम करीब 6.52 बजे हुए ब्लास्ट में जिस सफेद I-20 कार का इस्तेमाल हुआ था, उससे जुड़े तीन CCTV फुटेज सामने आए। मेट्रो स्टेशन की पार्किंग से निकल रही कार में काला मास्क पहने एक शख्स बैठा दिखाई दिया। जांच एजेंसियों का दावा है कि कार में बैठा शख्स डॉ. मोहम्मद उमर है। वह पुलवाम का रहने वाला है। अब सवाल है कि डॉ. उमर जिंदा है या मारा गया ? अगर मारा गया तो दिल्ली में यह पहला फिदायीन हमला है। शव की पहचान करने को DNA टेस्ट के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा में उमर के माता पिता और दो भाइयों को हिरासत में लिया है। इधर फरीदाबाद में 2900 किलोग्राम विस्फोट मटेरियल पकड़ा गया। जम्मू कश्मीर पुलिस ने दो कश्मीरी डॉक्टरों की गिरफ्तारी से इंटर-स्टेट और इंटरनेशनल टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था।







