धामी कैबिनेट के फैसले : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य सचिवालय में आयोजित न कैबिनेट की बैठक में 12 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें महत्वपूर्ण फैसला है उत्तराखंड में निवासरत परिवारों की पहचान के लिए आईडी जारी की जाएगी। इसका नाम रखा गया है देवभूमि परिवार योजना। इसके तहत सभी परिवारों का विस्तृत डाटा बेस तैयार किया जाएगा। कहा जा रहा है कि इससे राज्य में लागू महत्वपूर्ण एवं जनोपयोगी विभिन्न योजनाओं का लाभ लाभार्थी परिवार को आसानी से मिल जाएगा। साथ ही एक क्लिक में रजिस्टर परिवार की जानकारी उपलब्ध होगी।

इसके अलावा अब आपदा में क्षतिग्रस्त पक्के मकानों के लिए पांच लाख रुपये तथा कच्चे मकानों के लिए आपदा मद से निर्धारित सहायता राशि के अतिरिक्त एक लाख रुपये की धनराशि मिलेगी। शहरी विकास निदेशालय में पब्लिक हेल्थ पीएमयू के गठन को मंजूरी दे दी गई। इसके अंतर्गत चार नए पदों को भी स्वीकृति दे दी गई। इसके अलावा धामी कैबिनेट ने उपनल कर्मियों की दैनिक मांगों पर विचार के लिए कैबिनेट उपसमिति का गठन किया है।

साथ ही, विदेश में उपनल के माध्यम से रोजगार प्रदान करने के लिए उपनल के मेमोरेंडम और आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में संशोधन को मंजूरी दी है। दैनिक वेतनभोगी एवं संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के लिए कट ऑफ डेट तय करने के लिए समिति गठित की जाएगी। कैबिनेट के एक अन्य फैसले में आपदा पीड़ितों को बड़ी राहत दी गई है। इसमें धराली और अन्य आपदा प्रभावितों क्षेत्रों में मृत हुए व्यक्तियों के परिवारजनों को दी जाने वाली सहायता राशि अब चार लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये होगी। सीएम ने कहा ने कहा कि इन अहम फैसलों में राज्य के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण ने को ध्यान में रखा गया है।

पोर्टल तैयार, प्रकोष्ठ भी गठित
परिवार पहचान पत्र का जिम्मा नियोजन विभाग को सौंपा गया है। नियोजन विभाग ने पहले चरण में राष्ट्रीय सूचना केंद्र के सहयोग से पोर्टल तैयार कर लिया है। इसी के जरिये योजना का संचालन और मॉनिटरिंग का कार्य होगा। नियोजन विभाग में एक प्रकोष्ठ का गठन कर दिया गया है, जिसमें योजनाकारों और विश्लेषकों को जिम्मेदारी दी गई है।

योजना से होंगे कई फायदे
– सरकार के पास यह जानकारी होगी कि राज्य में कितने लोग बेरोजगार हैं।
– लोगों को वेबसाइट पर यह जानकारी मिल सकेगी कि वे किन-किन योजनाओं के पात्र हैं और किनका लाभ ले रहे हैं।
– परिवारों के उपलब्ध प्रमाणित आंकड़े जनगणना, निर्वाचन, सहकारिता, कृषि, उद्योग आदि के कार्यों में उपयोगी होंगे।
– आंकड़े उपलब्ध होने से सर्वे कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।








