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    Home»FOLK रंग»Diwali 2025 : जानिए लक्ष्मी पूजन विधि, मुहूर्त और मंत्र
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    Diwali 2025 : जानिए लक्ष्मी पूजन विधि, मुहूर्त और मंत्र

    आज कार्तिक मास की अमावस्या तिथि है। मान्यता है कि इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि, बरकत, धन-सौभाग्य व निरंतर प्रगति के योग बनते हैं। आइए इसके महत्व को जानते हैं
    teerandajBy teerandajOctober 20, 2025No Comments
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    Diwali 2025 :  पूरे देश में लोग उत्साह, श्रद्धा और धूमधाम से दिवाली मना रहे हैं। शाम को लक्ष्मी पूजन करेंगे। घरों को दीये से रोशन करने के साथ आतिशबाजी भी करेंगे। आइये दिवाली के शुभ मुहूर्त और पूजन विधि पर बात करते हैं।

    मुहूर्त : प्रदोष काल
    20 अक्तूबर 2025 को दीपावली के दिन धर्मशास्त्रोक्त प्रदोष काल शाम 05 बजकर 36 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। इसमें स्थिर लग्न वृष का समावेश 06 बजकर 59 मिनट से लेकर 08 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।

    चौघड़िया मुहूर्त
    चर चौघड़िया घं.05 मि.36 से घं.07 मि.10 तक, तत्पश्चात् लाभ चौघड़िया की वेला घं.10 मि.19 से घं.11 मि.53 तक रहेगी। तथा शुभ,अमृत, चर चौघड़िया की संयुक्त वेला रात्रि घं.01 मि.28 से घं.06 मि.11 तक रहेगी।

    नोट : 20 अक्तूबर को अमावस्या, प्रदोष काल, वृष लग्न और चर चौघड़िया का पूर्ण शुभ संयोग रहेगा।

    दिवाली लक्ष्मी पूजन मंत्र

    • ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
    • ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा
    • ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः
    • धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भगवान् त्वत्प्रसादेन धनधान्यादिसम्पदः

    दिवाली पर वृषभ और सिंह लग्न का भी शुभ संयोग
    ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार वृषभ लग्न, जो लक्ष्मी पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, रात 7:18 से 9:15 बजे तक रहेगा। वहीं, सिंह लग्न, जो रात्रिकालीन या मध्यरात्रि पूजन के लिए उपयुक्त है, रात 1:48 से सुबह 4:05 तक प्रभावी रहेगा। पंडित शास्त्री ने बताया कि जो लोग प्रदोष काल में पूजन नहीं कर पाते, वे सिंह लग्न में भी पूजा कर सकते हैं। मध्यरात्रि में लक्ष्मी पूजन करने से भी समान फल प्राप्त होता है।

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    दिवाली पर बन रहा है शुभ हंस महापुरुष राजयोग
    इस वर्ष दिवाली के दिन एक विशेष और शुभ योग बन रहा है जिसे हंस महापुरुष राजयोग कहा जाता है। यह योग तब बनता है जब गुरु ग्रह (बृहस्पति) अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होता है। गुरु का यह संयोग बेहद शुभ माना जाता है और यह योग व्यक्ति के जीवन में वैभव, बुद्धि, सम्मान और समृद्धि लाने वाला होता है। दिवाली जैसे पावन पर्व पर इस राजयोग का बनना इस दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय महत्ता को और अधिक बढ़ा देता है।

    धनिया का विशेष महत्व
    धनिया को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूजा में सूखा धनिया या धनिया पंजीरी अर्पित करने से आर्थिक संकट कम होते हैं और घर में स्थिर धन आगमन बना रहता है। कमलगट्टा लक्ष्मी माता और भगवान कुबेर दोनों को प्रिय है। इसे पूजा में शामिल करने से घर में धन की स्थिरता आती है और समृद्धि बनी रहती है। भगवान कुबेर को सुगंध बेहद प्रिय है। पूजा में इत्र अर्पित करने से वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है। साथ ही यह ऐश्वर्य और आनंद का प्रतीक भी है। सुपारी को शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जबकि लौंग पवित्रता और सुरक्षा का। इन दोनों वस्तुओं को अर्पित करने से घर में शुभता बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। गेंदे के फूल भगवान कुबेर को अत्यंत प्रिय हैं। रोज़ाना या विशेष रूप से दिवाली पर इन्हें अर्पित करने से घर में सुख-शांति और धन-संपत्ति का वास होता है। इलायची शुभता और सौभाग्य का प्रतीक है। इसकी मिठास और खुशबू घर में सुख-समृद्धि लाने में सहायक होती है। वहीं दूर्वा घास (हरी घास) वातावरण को पवित्र बनाती है और नकारात्मक ऊर्जा को हटाकर सकारात्मकता बढ़ाती है।

    Diwali 2025
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