पंतनगर विश्वविद्यालय -2025 : हरित क्रांति की जन्मभूमि गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (GBPUAT) ने वर्ष 2025 में अपनी गौरवशाली विरासत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान के नेतृत्व में यह संस्थान न केवल वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचा बल्कि कृषि नवाचार, जैव प्रौद्योगिकी, वाइल्डलाइफ संरक्षण और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे क्षेत्रों में देश का अग्रणी केंद्र बन गया। शोध से गांव तक, ज्ञान से जीवन तक के मंत्र के साथ पंतनगर ने किसानों की आय दोगुनी करने से लेकर ग्रामीण रोजगार सृजन तक अभूतपूर्व सफलताएं हासिल कीं।

2025 की सबसे चमकदार उपलब्धि रही QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में ऐतिहासिक उछाल। 311वें से सीधे 209वें स्थान पर पहुंचकर पंतनगर ने भारत के सभी कृषि विश्वविद्यालयों में प्रथम स्थान हासिल किया। यह छलांग संस्थान के अनुसंधान गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतत विकास पर जोर को दर्शाती है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने यहां डॉ. आंबेडकर चेयर स्थापित की है। जो किसी कृषि विश्वविद्यालय को मिलने वाला पहला ऐसा सम्मान है। यह चेयर सामाजिक न्याय और कृषि समावेशिता पर फोकस करेगी। कुलपति डॉ. चौहान को एनसीसी में उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद कर्नल की उपाधि मिलना भी गौरव का क्षण रहा। कुलपति डॉ. चौहान कहते हैं- पंतनगर केवल डिग्री वितरण केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का इंजन है। ये उपलब्धियां उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करती हैं, जहां कृषि चुनौतियाँ जलवायु परिवर्तन और वाइल्डलाइफ कन्फ्लिक्ट से जूझ रही हैं।

कृषि नवाचार: किसानों की आय में क्रांतिकारी बदलाव
पंतनगर के वैज्ञानिकों ने ऐसी फसलें विकसित कीं जो सीधे किसानों की जेब भरेंगी। सिंदूर आम की नई किस्म भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर को समर्पित है। यह सितंबर-अक्टूबर में ऑफ-सीजन फल देती है। जिससे बाजार मूल्य सामान्य समय से तीन गुना अधिक मिलता है। उत्तराखंड के टाराई क्षेत्र में बागवानों के लिए यह वरदान साबित होगी, जहां ऑफ सीजन फलन से आय स्थिरता आएगी। ‘पंत जौ 1106’ उच्च उपज वाली जौ की किस्म है जो पोषण से भरपूर है। इसे 12 राज्यों में अधिसूचित कर राष्ट्रीय बीज वितरण की राह प्रशस्त की गई। इसी तरह श्री अन्न अभियान ने प्रधानमंत्री के मोटे अनाजों (मिलेट्स) पर आह्वान को साकार किया। मड़ुआ, झिंगुर और कुटकी जैसे स्थानीय अनाजों का मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) कर ग्रामीण युवाओं को उद्यमिता के नए अवसर दिए। ये प्रयास उत्तराखंड के आदिवासी क्षेत्रों में मेडिसिनल प्लांट्स और स्पाइसेस की खेती को बढ़ावा देंगे।


क्लोनिंग से बायो-प्लास्टिक तक
पंतनगर अब पारंपरिक कृषि से कहीं आगे निकल चुका। बद्री गाय क्लोनिंग प्रोजेक्ट, उत्तराखंड की औषधीय गुणों वाली इस नस्ल के संरक्षण के लिए अंतिम चरण में है। यह दुग्ध अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करेगा। रूस की सेंट पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी के साथ व्हाइट टाइगर संरक्षण समझौता पंतनगर की वैश्विक वैज्ञानिक क्षमता को रेखांकित करता है। दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण भारत के बायोडायवर्सिटी लक्ष्यों से जुड़ता है। 10 वर्षों की मेहनत से विकसित जीवाणुरोधी बायो प्लास्टिक चिकित्सा और खाद्य पैकेजिंग में क्रांति लाएगा। यह प्लास्टिक संक्रमण रोकता है और पर्यावरण-अनुकूल है। पशु चिकित्सा में देश की पहली फर्स्ट एड किट ग्रामीण पशुपालकों के लिए गेम चेंजर है।

सेमीकंडक्टर मिशन और उद्योग जोड़
कृषि विश्वविद्यालय होने के बावजूद पंतनगर ने सेमीकंडक्टर मिशन में कदम रखा। टेक जायंट्स के साथ साझेदारी से छात्रों को इंडस्ट्री रेडी ट्रेनिंग मिल रही है। यह कृषि टेक (एग्रीटेक) और आईओटी को जोड़ता है जैसे स्मार्ट फार्मिंग सेंसर्स।
शोध से गांव तक: सामाजिक प्रभाव
अन्वेषण 2025 और 118वें अखिल भारतीय किसान मेले ने लाखों किसानों को जोड़ा। शोध से गांव तक अभियान में बीपीएल परिवारों को मशरूम फार्मिंग और मधुमक्खी पालन सिखाया गया।

भविष्य की दिशा
2025 पंतनगर के पुनर्जागरण का वर्ष साबित हुआ। QS रैंकिंग से क्लोनिंग तक हर कदम भारतीय कृषि शिक्षा का रोडमैप तैयार करता है। कुलपति डॉ. चौहान का विजन ग्रामीण भारत को सशक्त बनाएगा।
बोले कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह

विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का संस्थान नहीं बल्कि किसानों, युवाओं और समाज के समग्र उत्थान का सशक्त माध्यम होना चाहिए। वर्ष 2025 की उपलब्धियां इसी दृष्टिकोण का प्रतिफल हैं। वर्ष 2025 पंतनगर विश्वविद्यालय के लिए केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि दृष्टि, दायित्व और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता का वर्ष बनकर इतिहास में दर्ज हुआ है।







