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    Home»उत्तराखंड 360»गंगधारा… वैवाहिक संबंधों पर कई प्रावधान मगर वह संपूर्ण समाधान नहीं : न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी
    उत्तराखंड 360

    गंगधारा… वैवाहिक संबंधों पर कई प्रावधान मगर वह संपूर्ण समाधान नहीं : न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी

    गंगधारा -2.0 में प्री वेडिंग काउंसलिंग की जरूरत पर एकमत दिखे विशेषज्ञ और प्रतिभागी। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा- संस्कृति, समझ और संवाद से रुकेगा रिश्तों में बिखराव
    teerandajBy teerandajNovember 17, 2025Updated:November 17, 2025No Comments
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    भारतीय समाज में टूटते वैवाहिक रिश्तों की वजह और यह कैसे रुके इसपर गंगधारा 2.0 के मंच पर मंथन किया गया। सभी वक्ताओं ने एकमत से कहा कि संस्कृति, समझ और संवाद ही वह रास्ता है जिसपर अमल कर पवित्र वैवाहिक रिश्तों को बचाया जा सकता है। शुक्रवार को हरिद्वार रोड स्थित संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में विचारों के अविरल प्रवाह गंगधारा के द्वितीय संस्करण का आयोजन किया गया। देवभूमि विकास संस्थान और दून विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की थीम प्री-वेडिंग काउंसलिंग-समझ और संवाद थी।

    मुख्य अतिथि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति  यूसी ध्यानी ने कहा कि प्री-वैडिंग काउंसिलिंग आज के समय की आवश्यकता बन गया है। वैवाहिक संबंधों को लेकर कई कानूनी प्रावधान है, लेकिन वह संपूर्ण समाधान नहीं हैं। रिश्तों की मजबूती इसी से संभव है कि अपने सांस्कृतिक मूल्यों पर चलते हुए समन्वय स्थापित किया जाए। देवभूमि विकास संस्थान के संरक्षक और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हम उस संस्कृति के संवाहक हैं, जो समन्वय सिखाती है। आज समाज के रिश्तों में दरारें बढ़ रही हैं। ऐसे में आवश्यक हैं कि हम अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़कर रिश्तों की मजबूती के लिए कार्य करें। उन्होंने युवाओं की जेन जी, एल्फा कैटेगरी का जिक्र करते हुए कहा कि पीढ़ियों के बीच फासला बढ़ता जा रहा है। एक बेहतर स्थिति बनाने के लिए युवाओं की सहभागिता जरूरी है।

    हम की जगह मैं, इसी से बढ़ी दिक्कतें
    कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि भारत जैसे देश में कभी भी विवाह से पूर्व परामर्श आवश्यकता नहीं थी, लेकिन बदलते समय में यह जरूरी नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार में जब हम की जगह मैं ले लेगा, तो फिर दिक्कतें आएंगी। दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल ने कहा कि परिवार हमारी ताकत रहा है, लेकिन बदलते दौर में चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने प्री-वैडिंग काउंसलिंग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की वकालत की। सत्र की अध्यक्षता उत्तरांचल लॉ कॉलेज के प्राचार्य प्रो राजेश बहुगुणा ने की। संचालन दून विश्वविद्यालय के प्रो एचसी पुरोहित ने किया।

    अपने माता-पिता के उदाहरण से समझाई बात
    समापन सत्र के मुख्य अतिथि स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो विजय धस्माना ने वैवाहिक संबंधों की मजबूती की बात को अपने माता-पिता का उदाहरण देते हुए समझाया। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता की आयु में 11 वर्ष का अंतर था। विचार भी नहीं मिलते थे। यहां तक की दोनों ने शादी से पहले एक-दूसरे को देखा भी नहीं था, लेकिन समन्वय, समर्पण की वे मिसाल बने और एक सफल पारिवारिक जीवन व्यतीत किया। कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा काऊ, विनोद चमोली, बृजभूषण गैरोला और श्रीमती सविता कपूर, संस्कृति, साहित्य व कला परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती मधु भट्ट, देहरादून के पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, देवभूमि विकास संस्थान की मेन ट्रस्टी कृति रावत, महासचिव सतेंद्र नेगी, कोषाध्यक्ष उमेश्वर रावत, डॉ. दीपक भट्ट, प्रमोद रावत आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

    दो तरफा संवाद में हुआ महत्वपूर्ण विमर्श
    -कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच संवाद में महत्वपूर्ण विमर्श हुआ। विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों ने संवाद के इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और विषय विशेषज्ञों से सवाल पूछे। संवाद के इस कार्यक्रम में मनोवैज्ञानिक डा आशुतोष श्रीवास्तव, डा विक्रम रावत, अमन कपूर, डा मालिनी श्रीवास्तव, एडवोकेट रवि नेगी और सहकारिता विभाग की महाप्रबंधक रामेंद्री मंद्रवाल ने भाग लिया। छात्रों के सवालों के जवाब देते हुए विषय विशेषज्ञों ने कहा कि विवाह जैसी संस्था में जब अधिकारों की बात होने लगेगी, तो मुश्किलें पेश आना तय है। हमारे समाज में विवाह में कभी अधिकारों की बात शामिल नहीं थी, बल्कि कर्तव्यों को प्राथमिकता में रखते हुए लोगों ने सफल वैवाहिक जीवन जिया। विवाह हो या कोई भी संस्था, वे कर्तव्यों से ही चलती हैं। उन्होंने कहा कि प्री-वैडिंग काउंसलिंग की आवश्यकता इसलिए भी है कि हम विवाह बंधन में बंधने से पहले अपनी अपेक्षाओं का निर्धारण कर लें। इस सत्र का संचालन प्रो राजेश भट्ट ने किया।

    स्व.गौरा देवी और जनजाति दिवस की छाप
    व्याख्यानमाला पर चिपको आंदोलन के प्रणेता स्वर्गीय गौरा देवी और जनजाति दिवस की छाप भी रही। गौरा देवी के शताब्दी वर्ष पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम स्थल पर गौरा देवी के पोस्टर और पर्यावरण संरक्षण के पोस्टर-बैनर लगाए गए थे। इसी तरह जनजाति दिवस मनाते हुए डीएवी पब्लिक स्कूल डिफेंस कालोनी के बच्चों ने उत्तराखंड की जनजातियों पर केंद्रित आकर्षक प्रस्तुति दी।

    आदर्श युगल सम्मान से दिया बड़ा संदेश
    कार्यक्रम में लंबा सफल वैवाहिक जीवन पूरा करने वाले पांच आदर्श युगल और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में राकेश ओबराय, वीरेंद्र सिंह कृषाली, जगमोहन सिंह राणा, मनोहर सिंह रावत और खुशहाल सिंह पुंडीर शामिल थे।

    अतिथियों ने किया दो पुस्तकों का विमोचन
    -कार्यक्रम में अतिथियों ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया। गंगधारा-संस्कृति से सतत विकास पुस्तक प्रो सुरेखा डंगवाल और प्रो सुधांशु जोशी ने लिखी है। प्री-वैडिंग काउंसिलिंग पर आधारित प्रो राजेश भट्ट की लिखी पुस्तक का भी इस मौके पर विमोचन किया गया। देवभूमि विकास संस्थान की मेन ट्रस्टी कृति रावत ने विभिन्न वर्गों के बीच किए गए सर्वे की रिपोर्ट साझा की।

    यह भी पढ़ें :  लो जी, अब आ गया पहाड़ी AI

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