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    Home»FOLK रंग»गैरसैंण को भाया किताब कौथिग
    FOLK रंग

    गैरसैंण को भाया किताब कौथिग

    बच्चों की कार्यशालाएं, परिचर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लोगों में दिखा भारी उत्साह। क्रिएटिव उत्तराखंड, नगर पंचायत गैरसैण और बालप्रहरी पत्रिका ने संयुक्त रूप से किया आयोजन।
    teerandajBy teerandajApril 12, 2025Updated:April 12, 2025No Comments
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    गैरसैंण को किताब कौथिग भा गया। चार से छह अप्रैल को हुए आयोजन में हजारों की भीड़ ने इस बात पर मुहर लगा दी। गैरसैंण में किताब कौथिग का यह 13वां आयोजन था। लेकिन, जिस तरह इस बार आयोजन को लेकर उत्साह देखा गया वैसे पहले नहीं देखा गया था। नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी इसमें बड़ा योगदान रहा।  यहां हजारों लोगों ने किताबों के साथ साथ विज्ञान, पर्यटन, हस्तशिल्प और आधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी प्राप्त की। 31 मार्च से 4 अप्रैल तक पूर्व प्रधानाचार्य बीएस बुटोला के संयोजन में हुई 5 दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला से किताब कौथिग के गैरसैण संस्करण की शुरुआत हुई। इस कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक उदय किरौला ने बताया कि कार्यशाला में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, राजकीय बालिका इंटर कालेज, राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल श्रीनगर, सरस्वती इंटर कालेज, सरस्वती शिशु मंदिर, सरस्वती विद्या मंदिर, न्यू होप एकैडमी, आर के जे एस हंस फाउंडेशन इंटर कालेज, सीडलिंग पब्लिक स्कूल, श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल तथा राजकीय प्राथमिक विद्यालय गैरसैण के बच्चों ने भागीदारी की। कार्यशाला के समापन समारोह में इन 140 बच्चों द्वारा तैयार हस्तलिखित पुस्तकों की प्रर्दशनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

    मेरा परिचय, जीवन की घटना, यात्रा वर्णन, मेरी दिनचर्या, आदि को जोड़ते हुए बच्चों ने लगभग 15 पृष्ठों को जोड़ते हुए बाल मुस्कान, बालप्रहरी, बालवाटिका, बाल मन, किशोरी स्वर, नई ज्योति, नई किरण, संभावना, बाल उमंग आदि नामों से अपनी-अपनी हस्तलिखित पुस्तक तैयार की। कार्यशाला के दौरान तैयार किए गए नुक्कड़ नाटक और समूह गीत भी प्रस्तुत किए। बच्चों ने ओरिगेमी, कहानी वाचन, निबंध – कविता – पत्र लेखन आदि विधाओं के बारे में सीखकर अपने विचारों को लेखन और वाचन माध्यम से प्रस्तुत किया। बच्चों द्वारा कार्यशाला में तैयार इन सभी रचनाओं को स्टॉल के माध्यम से किताब कौथिग में प्रदर्शित भी किया गया।

    4 अप्रैल को कार्यशाला के समापन के साथ साथ देशभर से आए विशेषज्ञों ने गैरसैण के विद्यालयों में “कैरियर काउंसिलिंग” के माध्यम से छात्र – छात्राओं को आर्टिफिशियल इंटलीजेंस, स्वरोजगार, पैरामेडिकल, रक्षा विज्ञान, हस्तशिल्प कला जैसे क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं के प्रति मार्गदर्शन दिया। युवा चित्रकार मुकुल बडोनी ने स्थानीय बच्चों के साथ मिलकर “Wall Painting Workshop” के दौरान “आओ, दोस्ती करें किताबों से” का संदेश देती हुई सुंदर कलाकृति का निर्माण किया।

    5 अप्रैल को मुख्य मैदान में पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल और नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी सहित शहर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ गैरसैण किताब कौथिग का औपचारिक शुभारंभ हुआ। स्कूली बच्चों ने गणेश स्तुति और मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की। दिनभर गैरसैण मुख्य मैदान में स्कूली बच्चों और अभिभावक लगातार मेले में आते रहे। हजारों किताबों के साथ बच्चों ने आधुनिक तकनीक, खेल खेल में विज्ञान, कठपुतली निर्माण कार्यशाला, स्थानीय उत्पादों में भी रुचि दिखाई। मंच पर वार्ता सत्र के दौरान महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। “अंगदान जागरूकता और थैलेसीमिया रोग” पर पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ ललित उप्रेती और दयाल पांडे जी ने चर्चा की। देहरादून से आए विशेषज्ञ नवीन चंद्र ने “Artificial Intelligence छोटे व्यापारियों के लिए कैसे उपयोगी हो सकता है” विषय पर खुले सत्र में स्थानीय जनता से संवाद किया। पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल और डॉ. अजय ढोंढियाल के बीच “हमारे लोकसंगीत में महिलाओं के स्वर” विषय पर लंबी चर्चा हुई जिसमें महिलाओं की खासी उपस्थिति रही। अंतिम सत्र में सांस्कृतिक सन्ध्या के दौरान लोकगायक दीवान कनवाल और डॉ. अजय ढोंढियाल के गीतों की प्रस्तुति दी। “घुघुति जागर टीम” ने अपने गानों पर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया।

    6 अप्रैल को गैरसैण किताब कौथिग के अंतिम दिन भी आम जनता ने भारी संख्या में शिरकत की। दिन की शुरुआत नेचर वॉक से हुई जिसमें वन्यजीव श्री राजेश भट्ट ने पक्षी अवलोकन और प्रकृति आधारित पर्यटन पर मार्गदर्शन किया। पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने जैव विविधता को बचाने की जरूरत और जंगलों में बेतहाशा बढ़ रहे चीड़ को बहुत गंभीर खतरा बताया। वनस्पति विशेषज्ञ डॉ. बी. एस. कालाकोटी ने इस इलाके में पाए जाने वाली जड़ी – बूटियों की जानकारी दी। 55 आदमखोर जानवरों से मुक्ति दिलाने वाले जाबांज शिकारी लखपत सिंह रावत ने अपने रोमांचकारी अनुभव सुनाए। पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल और “घुघुति जागर टीम” ने प्रकृति से जुड़े गीतों से नेचर वॉक को संगीतमय बना दिया।

    मुख्य मैदान में किताब मेले के मंच से “पर्यावरण बचाने में चिपको और मैती जैसे आंदोलनों की भूमिका” विषय पर पद्मश्री से सम्मानित कल्याण रावत जी और भैरव असनोड़ा जी ने वार्ता की। रानीखेत से आई लेखिका अलका कौशिक और हेम पंत ने “वैश्विक यात्रा अनुभव और स्थानीय पर्यटन” पर वार्ता की। राज्य मंत्री वरिष्ठ नागरिक कल्याण बोर्ड उत्तराखंड ने भी स्टाल्स का निरीक्षण किया। प्रो. एस एस रावत, मनीष और मोहन भंडारी के बीच “गैरसैण राजधानी और शहीदों के सपने” पर सार्थक चर्चा हुई।


    आयोजन के दौरान दिनभर गैरसैण मुख्य मैदान में स्कूली बच्चों और अभिभावक लगातार मेले में आते रहे। हजारों किताबों के साथ बच्चों ने ऐपन टेक्नोलॉजी, “पिरुल वूमन” मंजू साह, समय साक्ष्य, शिवालिक साइंस फाउंडेशन, लाटी आर्ट्स, स्किलीफाइ, मुनस्यारी हाउस, सुबेर संस्था, महेश बराल (हाम्रो पुस्तकालय) नेपाली साहित्य, कठपुतली के स्टॉल में खासी रुचि ली। किताबों के स्टॉल्स पर नेशनल बुक ट्रस्ट, अविचल प्रकाशन, देवभूमि प्रकाशन, विनसर प्रकाशन, संभावना प्रकाशन, अंकित प्रकाशन, सहित 40 से ज्यादा प्रकाशकों की किताबें उपलब्ध कराई है थीं। विभिन्न वार्ता सत्र के दौरान महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ ललित उप्रेती ने बताया कि ” रंगदान से अंगदान जागरूकता अभियान” के तहत चिकित्सा विभाग के सौजन्य से आयोजित रक्तदान शिविर में नगर पंचायत अध्यक्ष ने सबसे पहले रक्तदान किया। कुल 15 लोगों ने रक्तदान किया।

    कार्यक्रम के अंतिम सत्र में हरिद्वार के वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश पांडे के संयोजन और अध्यक्षता में बहुभाषीय कविसम्मेलन हुआ जिसमें डॉ. नीरज नैथानी, श्रीमती बीना बेंजवाल, श्री मदन डुकलान, डॉ. शम्भू प्रसाद भट्ट “स्नेहिल”, दयाल पांडे, श्री शांति प्रसाद “जिज्ञासु”, श्री आसीस सुन्दरियाल, विनेश पोखरियाल, भूपेंद्र कंडारी, दीक्षा जोशी, सतीश डिमरी, लक्ष्मण सिंह पंवार आदि ने हिंदी, गढ़वाली और कुमाउनी भाषा में काव्य पाठ किया।

    कार्यक्रम को ऐतिहासिक सफलता दिलाने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी, क्रिएटिव उत्तराखंड के दयाल पांडे ने स्थानीय नागरिकों, अतिथियों, व्यापार संघ, श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम, नैनीताल बैंक, LSC इंफ्राटेक, दीर्घायु आर्गेनिक, भारतीय जीवन बीमा निगम, लीलाधर भट्ट मेमोरियल फाउंडेशन, ओहो रेडियो, चांदनी इंटरप्राइजेज सहित सभी सहयोगियों का आभार प्रकट किया। बाहर से आए अतिथियों ने भराड़ीसैंण में बने विधानसभा भवन का भ्रमण किया। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक हेम पंत ने बताया कि यह कार्यक्रम फरवरी माह में श्रीनगर गढ़वाल में प्रस्तावित था। लेकिन कुछ स्थानीय कारणों से श्रीनगर किताब कौथिग को स्थगित करना पड़ा था। गैरसैण के सफल आयोजन के बाद यह सार्थक अभियान अगले किताब कौथिग की तैयारी में जुट गया है।

     

    उत्तराखंड 360 किताब कौथिग
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