नैनीताल हाईकोर्ट ने देहरादून में प्रस्तावित बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने माना कि केवल आशंका के आधार पर अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई जा सकती। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने 13 जनवरी 2026 के एकलपीठ आदेश को चुनौती देने वाली अपील भी निरस्त कर दी। इससे पहले एकलपीठ ने परियोजना पर रोक लगाने से इनकार किया था। मामला देहरादून में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड से प्रभावित लोगों की ओर से उठाई गई आपत्तियों से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बिना समुचित प्रक्रिया अपनाए भूमि अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है, जिससे स्थानीय निवासियों के अधिकार प्रभावित होंगे।

राज्य सरकार ने दलील दी कि यह परियोजना शहर को जाम से राहत दिलाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से बनाई गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक संबंधित पक्षों को कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। खंडपीठ ने कहा कि यदि भविष्य में विधिवत अधिग्रहण नोटिस जारी होता है, तो प्रभावित पक्ष कानून के तहत उपलब्ध उपाय अपना सकते हैं। अदालत ने यह भी माना कि बड़ी अवसंरचना परियोजनाएं सार्वजनिक हित से जुड़ी होती हैं। यह आदेश नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय में सुनाया गया, जिससे परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।








