मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच होमुर्ज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के केंद्र में आ गया है। ईरान, अमेरिका, इजराइल के बीच जारी टकराव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। जिससे दुनिया के कई देशों में ईंधन संकट की आशंका गहरा गई है। विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देश सउदी अरेबिया, यूएई, कुवैत, इराक और कतर अपने तेल और गैस निर्यात के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।

हाल के सप्ताहों में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच सैन्य गतिविधियां तेज होने से इस क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है या वैकल्पिक मार्ग तलाशने शुरू कर दिए हैं। इससे तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है और बाजार में कीमतों में उछाल देखने को मिला है। युद्ध शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगभग 68 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका हर हाल में इस समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए कदम उठाएगा। उन्होंने कहा है कि इस रास्ते की सुरक्षा केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है और जो देश इससे तेल प्राप्त करते हैं उन्हें भी इसमें भागीदारी करनी चाहिए। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि कई देश अमेरिका के साथ मिलकर इस मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे, ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि समुद्र में माइंस बिछाने, ड्रोन भेजने या कम दूरी की मिसाइल दागने जैसी कार्रवाइयों से ईरान इस क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर सकता है। यही कारण है कि अमेरिका अन्य देशों से भी समुद्री सुरक्षा अभियान में शामिल होने की अपील कर रहा है।

दूसरी ओर ईरान ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि केवल उन देशों के जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है जिन्हें वह दुश्मन मानता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर हमला किया गया तो जवाबी कार्रवाई में अमेरिका से जुड़े ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में हमलों की घटनाओं ने तनाव और बढ़ा दिया है। ओमान की खाड़ी में स्थित यूएई के फ़ुजैरा बंदरगाह पर हुए हमले ने ऊर्जा बाजार को और चिंतित कर दिया है। यह बंदरगाह मध्य पूर्व की सबसे महत्वपूर्ण तेल सुविधाओं में से एक माना जाता है।
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भारत के लिए भी यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और इसका अधिकांश परिवहन इसी मार्ग से होता है। भारत सरकार ने शनिवार को बताया कि दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी एलपीजी लेकर होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजर चुके हैं और भारत की ओर आ रहे हैं। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब देश में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता जताई जा रही थी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने और कई देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित होने का खतरा है। फिलहाल मध्य पूर्व में युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने जा रहा है और ऊर्जा ठिकानों पर बढ़ते हमलों के बीच हालात जल्द सामान्य होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। ऐसे में दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में बढ़ते संकट को टाल पाएंगे।









