कुछ दिन पहले अल्मोड़ा के मशहूर फोटोग्राफर जयमित्र सिंह बिष्ट हिमालय 30 साल की अपनी साधना को लेकर देहरादून पहुंचे। उत्तराखंड के कई अनुछए दृश्यों को अपने कैमरे में कैद कर चुके जयमित्र की यह एक्सक्लूसिव प्रदर्शनी कलाप्रेमियों के लिए एक विशिष्ट अनुभव रही। उत्तराखंड पर आधारित आठ अलग-अलग थीम्स की ये फोटो प्रदर्शनी अपनी तरह की पहली कोशिश रही।
पहली थीम में उत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा के हिम शिखरों के कई बेहतरीन फोटोग्राफ़ शामिल थे वहीं दूसरी थीम में भगवान शिव के वास को दिखाते हुए हिमालय की कैलाश पर्वत, त्रिशूल, आदि कैलाश, ओम पर्वत को जयमित्र ने लोगों के सामने रखा। तीसरी थीम फायर एंड आइस थी, जिसमें हिमालय के उन पलों को दिखाया गया जो आम लोग नहीं देख पाते हैं।

इस थीम में शामिल की गई तस्वीरें एक फोटोग्राफर के धैर्य, जूनून और लगन को खुद बयां कर रही थीं। चौथी थीम में उत्तराखंड की महिलाओं के जीवन और खेतों में आज भी मनाई जा रही परंपराओं को दर्शाया गया है। पांचवीं थीम में उन्होंने उत्तराखंड के जागर और मंदिरों में होने वाली पूजा को बेहतरीन ढंग से डॉक्यूमेंट किया। छठी थीम में उत्तराखंड की महिलाओं के चेहरों के चुनिंदा फोटोग्राफ्स को शामिल किया गया था। सातवीं थीम में उत्तराखंड के मेलों और त्योहारों में यहां के लोक की भागीदारी तस्वीरें रहीं। आठवीं थीम में उत्तराखंड में हाई अल्टीट्यूड में रहने वाली जनजाति और उनके रीति-रिवाजों को तस्वीरों के माध्यम से जीवंत किया गया था। यह थीम बेहतरीन फोटोग्राफी और लोक पर उनकी डिटेलिंग को बताने के लिए काफी थी।
राज्य गठन के पहले से ही जयमित्र ने अपने कैमरे से उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति को अपने कैमरे से डॉक्यूमेंट करना शुरू कर दिया था। फोटोग्राफी कैरियर के 30 से अधिक साल पूरे कर चुके जयमित्र की यह अपनी तरह की पहली एक्सक्लूसिव फोटो प्रदर्शनी रही। वह कहते हैं फोटोग्राफी और हिमालय प्रेम ही है जिसकी वजह से उन्होंने पहाड़, अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि को नहीं छोड़ा। वह 2004 से अल्मोड़ा में फोटो गैलरी का संचालन कर रहे हैं जिसे पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों द्वारा सराहा जाता रहा है।
जयमित्र ने बताया कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से पहली बार उत्तराखंड के एक्सक्लूसिव फोटोग्राफ्स को वो दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं जिसका उदेश्य उत्तराखंड के उस पहलू से लोगों को परिचित कराना है जो उन्होंने आज तक नहीं देखा है। इसके साथ ही इसका मकसद उत्तराखंड में पिछले 30 साल में फोटोग्राफर की नज़र में आए बदलावों कीजानकारी देना भी है, जिससे हिमालय की प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके। जयमित्र द्वारा शुरू किए गए फोटोग्राफी ब्रांड ‘हिमालयन जेफर’ के अंतर्गत उत्तराखंड हिमालय, यहां की लोक संस्कृति, मेलों और त्यौहारों से संबंधित फोटो फ्रेम्स और थीम आधारित फोल्डर्स और लिमिटेड एडिशन प्रिंट्स एवम फोटोग्राफ्स को प्रदर्शित किया गया।

जयमित्र सिंह बिष्ट ने अपने फोटोग्राफी कैरियर की शुरुआत फोटो पत्रकारिता से की जिसमें उन्होंने 1994 में हुए उत्तराखंड आंदोलन को भी कवर किया। इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड के हिमालय लैंडस्केप और यहां के लोक और संस्कृति को अपनी फोटोग्राफी के माध्यम से डाक्यूमेंट करना शुरू किया। उनके द्वारा लिए फोटोग्राफ्स को नेशनल ज्योग्राफिक, नेट जियो ट्रैवलर, इंडिया टुडे ट्रैवल प्लस और अन्य समाचारपत्रों और मैगज़ीन ने प्रकाशित किया है। उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण काफ़ी टेबल बुक्स में भी उनके द्वारा खींची गई तस्वीरें प्रकाशित हुई हैं। अल्मोड़ा पर किए उनके काम पर एक काफ़ी टेबल बुक भी प्रकाशित हुई है। जयमित्र द्वारा खीचें गए चुनिंदा फोटोग्राफ्स की ये अपनी तरह की पहली प्रदर्शनी रही। फैब्रिक और फ्रेम्स की ये प्रदर्शनी 21 से 23 नवंबर के बीच देहरादून के अरविंद आश्रम में लगाई गई। इस प्रदर्शनी को श्री अरविंद आश्रम के तत्वाधान में मधु अंजलि के निर्देशन और हिमालयन ज़ेफर, पंचाचूली वूमेन वीवर्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। देहरादून और आसपास के कला और प्रकृति प्रेमी बड़ी संख्या उनके काम को देखने पहुंचे।









