Kathua Terror Attack में 22 गढ़वाल रायफल्स के जवानों ने आतंकियों पर जमकर जवाबी हमला किया। अचानक हुए हमले के बाद जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। ‘बद्री विशाल लाल की जय’ का उद्घोष करते हुए दहशतगर्दों पर टूट पड़े। दो घंटे तक 5100 राउंड गोलियां चलाईं और आतंकियों को जंगलों में भागने के लिए मजबूर कर दिया। 2 घंटे तक गोलियों की तड़तड़ाहट से पहाड़ भी थर्रा उठे। मगर घायल जवानों के हौसले बुलंद रहे। आतंकी छुप कर वार कर रहे थे और हमारे जवान खुले में थे। लेकिन, विचलित हुए बिना मुंहतोड़ जवाब दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले के दौरान राइफलमैन कार्तिक का दाहिना हाथ ग्रेनेड हमले के दौरान जख्मी हो गया तो उन्होंने बाएं से बंदूक उठा ली और मैगजीन की सारी गोलियां खत्म होने तक नहीं रुके। सेना के अधिकारियों के मुताबिक, हमले में घायल जवानों ने आंखों देखी बताई है।
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मीडियो रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से जो जानकारियां सामने आ रही हैं उसके मुताबिक, आतंकियों ने जवानों को घेरकर मुठभेड़ की साजिश रची थी। इनका इरादा हथियार लूटने और जवानों के करीब पहुंच और ज्यादा नुकसान पहुंचाने का था। अगर आतंकी पास पहुंच गए होते तो नुकसान ज्यादा भी हो सकता था। मगर, मां भारती के सपूत आतंकियों के इरादा भांप लिया। पहली गोली चलने के साथ ही जवानों की बंदूकें आग उगलने लगीं। इनके सामने दो चुनौती थी। एक अपने जख्मी साथियों को बचाने की, दूसरी आतंकियों के खात्मे की। जवानों ने आतंकियों पर 5100 से ज्यादा राउंड फायर किए। इससे छिप कर वार करने वाले दहशतगर्दों के पांव उखड़ गए और वे कठुआ की पहाड़ियों में भाग गए।
देखें मुठभेड़ की जगह का वीडियो –
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के माचेडी इलाके में सोमवार को सेना के दो वाहनों पर घात लगाकर किए गए आतंकवादियों के हमले में जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) समेत पांच जवान शहीद हो गए थे। यह घटना दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे हुई जब कठुआ शहर से 150 किमी दूर लोहई मल्हार में बदनोता गांव के पास माचेडी-किंडली-मल्हार मार्ग पर सेना के वाहन नियमित गश्त पर थे। हमले के बाद एनआईए की एक विशेष टीम जांच के लिए कठुआ पहुंच चुकी है। टीम घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों, खून से सने हेलमेट, गालियों के खोखों और वाहनों की जांच कर रही है। घायल सैनिकों से बात भी की जा रही है, जिससे 8 जुलाई को हुई घटना के बारे में और जानकारी मिल सके। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि माना जा रहा है कि आतंकवादी तीन -तीन लोगों के समूह में थे। दो अलग-अलग स्थानों पर छिपे थे।
बाएं हाथ से गोलियां बरसाता रहा जवान
सूत्रों के मुताबिक, अचानक हुए हमले के बावजूद सेना के गढ़वाल रेजिमेंट के जवानों ने आतंकवादियों पर 5,189 गोलियां चलाईं। यह सेना की वीरता को दर्शाता है। कोई भी परिस्थिति हो हमारे जवान उससे निपटना जानते हैं। राइफलमैन कार्तिक सिंह जख्मी हैं। हमले के दौरान आतंकवादियों द्वारा दागे गए ग्रेनेड के छर्रे से उनका दाहिना हाथ कई जगहों पर छिल गया था। लेकिन वह अपने बाएं हाथ से तब तक गोलीबारी करते रहे, जब तक उनकी मैगजीन की गोलियां खत्म नहीं हो गईं। शहीद होने वाले सैन्यकर्मियों में नायब सूबेदार आनंद सिंह, हवलदार कमल सिंह, नायक विनोद सिंह, राइफलमैन अनुज नेगी और राइफलमैन आदर्श नेगी शामिल थे और ये सभी उत्तराखंड के थे। सैनिकों का नेतृत्व जेसीओ नायब सूबेदार आनंद सिंह ने किया था।
इस हमले की जिम्मेदारी कश्मीर टाइगर्स नाम के आतंकी संगठन ने ली है। यह प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की ही एक शाखा है। संगठन की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा गया कि यह हमला 26 जून को डोडा में मारे गए 3 आतंकियों की मौत का बदला है।