Kupwara Encounter : कारगिल विजय दिवस के 25वीं वर्षगांठ के एक दिन बाद शनिवार को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के माछिल क्षेत्र में भारतीय सेना ने आतंकियों की घुसपैठ नाकाम कर दिया। पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) आतंकियों की मदद कर रही थी। इस मुठभेड़ में एक जवान शहीद हुआ है। चार जवान घायल हैं। एक घुसपैठिए को सेना ने मार गिराया है।
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जानकारी के मुताबिक, शनिवार की सुबह मच्छल सेक्टर में कुमकाड़ी अग्रिम चौकी पर तैनात जवानों ने कुछ लोगों को चौकी की तरफ बढ़ते देखा। उन्होंने उसी समय उन्हें ललकारा और आत्मसमर्पण करने को कहा। जवानों की ललकार सुनते ही आतंकियों ने फायरिंग कर दी और वापस भागना शुरू कर दिया। जवानों ने भी जवाबी फायर किया और उन्हें मुठभेड़ में उलझा लिया। लगभग तीन घंटे तक दोनों तरफ से फायरिंग होती रही।
बता दें कि इससे पहले, जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के लोलाब इलाके में सुरक्षा बलों ने मंगलवार को आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया था। मुठभेड़ में एक आतंकी को ढेर कर दिया गया था। भारतीय सेना के चिनार कोर ने ट्वीट किया था कि कोवुत, कुपवाड़ा में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में विशिष्ट इनपुट के आधार पर भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त खोज अभियान शुरू किया गया था। संदिग्ध गतिविधि देखी गई थी और आतंकियों को चुनौती दी गई, जिसके जवाब में आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, एक आतंकवादी को मार गिराया गया था। मुठभेड़ में एक जवान शहीद हो गया था।
46 दिनों में 11 जवान हुए शहीद, 10 नागरिकों की गई जान
वर्ष 2008 के बाद एक बार फिर लगातार आतंकी वारदातों से लोग डरे हैं। पिछले 46 दिन से सात आतंकी वारदातों में 11 सैन्य जवान बलिदान हो चुके हैं और 10 आम नागरिकों की मौत हो गई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अब इस पर निर्णायक रणनीति का समय आ चुका है। हर बार आतंकी हमला कर गायब हो जा रहे हैं।
मीडिया से बातचीत में पूर्व डीजीपी एसपी वेद कहते हैं कि पहले भी आतंकी वारदातें होती थीं। तब आतंकी फिदायीन के रूप में आते थे। हमला कर सात आठ लोगों को मारा और खुद भी मर गए। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा। वह मारने से पहले भागने का रास्ता तय कारते हैं। ताकि एक हमला करने के बाद फिर से हमला कर सकें। यह आतंकियों की नई रणनीति है। वह अब फिदायीन बनकर नहीं आते। वह अपने लिए ठिकाना बनाते हैं।
फिर घात लगाकर हमला करते हैं। हमला कर भाग जाते हैं। वह जंगल, पहाड़ और युद्ध में लड़ने का प्रशिक्षण लेकर आए हैं। इन तक पहुंचने के लिए ठोस रणनीति बनानी पड़ेगी। पूर्व कर्नल सुशील पठानिया कहते हैं कि सुरक्षा बलों को आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते समय सेक्शन और प्लाटून अभ्यास पर ही टिके रहना चाहिए।