Uttarakhand : सरकारी नौकरियों की दौड़ में प्रदेश में अब भी पुरुषों का दबदबा बना हुआ है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की भर्तियों के आंकड़े बताते हैं कि कुल अभ्यर्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत ही है, जबकि पुरुषों की भागीदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। यह स्थिति बताती है कि सरकारी सेवाओं में आधी आबादी की भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है। लोक सेवा आयोग की वार्षिक प्रतिवेदन रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने बीते 22 वर्षों में विभिन्न विभागों के कुल 15,166 रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया संचालित की। इन पदों के लिए लगभग 31.94 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। लंबी चयन प्रक्रिया के बाद इनमें से 14,335 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया गया। आयोग का कहना है कि युवाओं में सरकारी नौकरियों को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है लेकिन महिला अभ्यर्थियों की संख्या अभी भी पुरुषों की तुलना में कम बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024-25 के दौरान आयोग ने विभिन्न विभागों के 25 पदों पर 2,808 अभ्यर्थियों का चयन किया। चयनित अभ्यर्थियों में देहरादून से 163, चंपावत से 68, चमोली से 145, पौड़ी से 107, टिहरी से 362, हरिद्वार से 422, नैनीताल से 271, पिथौरागढ़ से 138, उत्तरकाशी से 102, टिहरी से 243 और ऊधमसिंह नगर से 341 अभ्यर्थी शामिल हैं। इसके अलावा अन्य राज्यों के 122 अभ्यर्थियों को भी चयन सूची में स्थान मिला। आयोग ने इस अवधि में पदोन्नति से जुड़े मामलों का भी निस्तारण किया। वर्ष 2024-25 में कुल 452 पदोन्नति प्रकरणों पर विचार किया गया, जिनमें से 341 पदों पर पदोन्नति की संस्तुति की गई। आयोग के अनुसार 12 विभागों में 116 पद ऐसे रहे, जिनमें अधिकारियों के नामों पर अंतिम निर्णय लिया गया।

इधर शिक्षा क्षेत्र में भी नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं। अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में चयनित शिक्षकों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए परीक्षक नियुक्त करने की तैयारी चल रही है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे विद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता और मूल्यांकन प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। उधर राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग उठाई है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के कई राजकीय और अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में हेड मास्टर के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। ऐसे में मास्टर कैडर के शिक्षकों को पदोन्नति देकर उप शिक्षा अधिकारी के पदों पर तैनाती दी जानी चाहिए, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होने के साथ विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल भी बेहतर हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भर्ती प्रक्रियाओं में जागरूकता, अवसरों का विस्तार और सामाजिक समर्थन जरूरी है। यदि इन पहलुओं पर गंभीरता से काम किया जाए तो आने वाले वर्षों में सरकारी नौकरियों में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।









