कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी से नैनीताल के सफर को सुगम बनाने की महत्वाकांक्षी योजना 17400 पेड़ों की बलि मांग रही है। यानी सड़क चौड़ीकरण के लिए साढ़े सत्रह हजार पेड़ों की कटाई करनी होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएच) ने काठगोदाम-नैनीताल मार्ग के चौड़ीकरण के लिए अंतिम सर्वे पूरा कर लिया है। एनएच हल्द्वानी खंड ने इन पेड़ों को हटाने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को औपचारिक प्रस्ताव भेजकर अनुमति की गुहार लगाई है।
पर्यटन सीजन में काठगोदाम से नैनीताल की 35 किलोमीटर की दूरी तय करने में वर्तमान में तीन से पांच घंटे का समय लग रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार ने एक वर्ष पूर्व 709 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति दी थी। योजना के तहत सड़क की मौजूदा चौड़ाई को बढ़ाकर 7 से 10 मीटर किया जाना है। इसके लिए मार्ग के किनारे लगभग तीन मीटर अतिरिक्त भूमि की जरूरत है, जिसका अधिकांश हिस्सा वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
17 हजार पेड़ों पर चलेगी आरी
परियोजना की सबसे चौंकाने वाली बात पेड़ों की संख्या में हुई बेतहाशा वृद्धि है। एनएच के अंतिम सर्वे के अनुसार, सड़क की जद में 17,400 पेड़ आ रहे हैं। इनमें वर्षों पुराने चीड़, कीमती तुन और कोकाट समेत कई अन्य प्रजातियां शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि लगभग 48 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अधिशासी अभियंता आशुतोष ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हमने पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए प्रतिपूरक वनीकरण का विस्तृत खाका प्रस्ताव में शामिल किया है। मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

3 हजार से 17 हजार तक पहुंचा आंकड़ा
यह परियोजना पिछले कई वर्षों से विवादों और संशोधनों के घेरे में रही है। ताज्जुब की बात यह है कि शुरुआती सर्वे में केवल 3684 पेड़ों के कटने का अनुमान लगाया गया था। बाद में यह संख्या बढ़कर 7236 हुई और अब अंतिम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में यह आंकड़ा 17400 तक जा पहुंचा है। पर्यावरणविदों ने पेड़ों की संख्या में इस पांच गुना बढ़ोतरी पर चिंता जताई है और इसे हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए घातक बताया है।
लापरवाह कार्यप्रणाली से लटका प्रोजेक्ट
परियोजना की कछुआ गति का मुख्य कारण कंसलटेंट कंपनियों और अधिकारियों का बार-बार बदलना रहा है। 2019 में जयपुर की एक कंपनी को डीपीआर बनाने का काम दिया गया था, लेकिन कंपनी बीच में ही काम छोड़कर लापता हो गई। जिसके बाद उसकी सुरक्षा राशि जब्त की गई। सर्वे और प्लानिंग के दौरान अब तक एनएच हल्द्वानी खंड के चार अधिशासी अभियंता बदले जा चुके हैं। वर्तमान में गुरुग्राम की एक निजी कंपनी इस प्रोजेक्ट की डीपीआर और तकनीकी देखरेख का काम कर रही है।








