जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन त्राशी के दौरान उत्तराखंड के कपकोट तहसील में गैंनाड़ गांव के हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया बलिदान हो गए जबकि आतंकियों द्वारा किए गए ग्रेनेड हमले में सात जवान घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज जारी है। सूत्रों के मुताबिक, घायलों में दो जवान उत्तराखंड हैं।
यह संयुक्त तलाशी अभियान जिले के छात्रू क्षेत्र के सुदूर सोनार गांव (सिंहपोरा के पास) स्थित घने जंगलों में शुरू किया गया था। खुफिया इनपुट के आधार पर सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमों ने इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान आतंकियों ने अचानक सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध फायरिंग की और घेराबंदी तोड़ने के प्रयास में ग्रेनेड फेंके, जिससे जवान घायल हो गए। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और कम दृश्यता के कारण रविवार देर रात अभियान अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। सोमवार तड़के एक बार फिर सेना, पुलिस, सीआरपीएफ और अर्धसैनिक बलों की कई अतिरिक्त टुकड़ियां इलाके में तैनात की गईं। आतंकियों के भागने की आशंका को देखते हुए पूरे क्षेत्र की कड़ी घेराबंदी की गई है। तलाशी के लिए ड्रोन और खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, इलाके में दो से तीन आतंकी छिपे होने की आशंका है, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए जा रहे हैं। ताजा जानकारी मिलने तक आतंकियों के साथ कोई नया संपर्क नहीं हुआ था, लेकिन अभियान पूरी मुस्तैदी से जारी है। सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। सेना ने कठिन परिस्थितियों में जवानों के साहस, बलिदान और पेशेवर रवैये की सराहना करते हुए शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह के परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया है।

गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरे जम्मू क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर सीमा पार से और आतंकियों को भेजने की कोशिश कर सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आतंकवाद विरोधी अभियानों को और तेज कर दिया गया है। गौरतलब है कि यह इस वर्ष जम्मू क्षेत्र में आतंकियों के साथ तीसरी मुठभेड़ है। इससे पहले 7 और 13 जनवरी को कठुआ जिले के बिलावर क्षेत्र के जंगलों में भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं।
कपकोट के हैं शहीद गजेंद्र सिंह
43 वर्षीय गजेंद्र सिंह गढ़िया पुत्र धन सिंह गढ़िया भारतीय सेना की टू-पैरा कमांडो यूनिट में तैनात थे। शहादत की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव गैंनाड़ (बीथी), तहसील कपकोट में मातम छा गया। गांव में हर ओर शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि गजेंद्र सिंह बचपन से ही अनुशासित थे। सेना में भर्ती होकर उन्होंने अपने गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया। शहीद गजेंद्र सिंह अपने परिवार के एकमात्र मुख्य कमाऊ सदस्य थे। माता-पिता खेती-किसानी पर निर्भर हैं जबकि छोटा भाई एक निजी स्कूल में शिक्षक है। गांव वालों के मुताबिक, शहीद की पत्नी लीला गढ़िया अपने दोनों पुत्रों राहुल और धीरज के साथ देहरादून में किराये के मकान में रहती हैं। दोनों बच्चे कक्षा चार में पढ़ते हैं। शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का पार्थिव शरीर 20 जनवरी को हेलिकॉप्टर से केदारेश्वर मैदान लाया जाएगा। वहां से स्व. चंद्र सिंह शाही राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कपकोट के खेल मैदान तक अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।








