Research : उम्र को मात देने के लिए पूरी दुनिया में शोध हो रहे हैं। समय समय पर वैश्विक स्तर पर इसकी चर्चा भी होती है। कुछ महीने पहले रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग भी इस मुद्दे पर चर्चा की थी। खैर, ताजा खबर यह है कि अल्मोड़ा की सोबन सिंह जीना यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने आंवला, गिलोय और गोखरू के चूर्ण में छिपे तीन चमत्कारी यौगिकों की खोज की है। यह शरीर में बुढ़ापे का सबब बनने वाले प्रोटीन AKT-1 की सक्रियता को प्रभावी ढंग से कम करते हैं। कंप्यूटेशनल तकनीक से किए गए इस अध्ययन में 17 सक्रिय यौगिकों में से 14 ने उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। जबकि केम्पफेरोल, एन-कैफियोलटाइरामाइन और मल्टीफिडॉल ग्लूकोसाइड सबसे घातक साबित हुए।
यह खोज एंटी-एजिंग दवाओं, क्रीमों और उत्पादों के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। शोध टीम का नेतृत्व कर रहे वनस्पति विज्ञान विभाग के मुख्य अन्वेषक डॉ. सुभाष चंद्रा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आयुर्वेद की इन जड़ी-बूटियों ने आधुनिक विज्ञान को चौंका दिया है। AKT-1 प्रोटीन कोशिकाओं में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और उम्र बढ़ने का मुख्य कारण है। हमारे यौगिक इसे सीधे निशाना बनाते हैं। क्लिनिकल ट्रायल के बाद यह चिकित्सा जगत में क्रांति लाएगा।

ऐसे पकड़े गए यौवन रक्षक यौगिक
शोध में आंवला (फाइलेंथस एम्बलिका), गिलोय (टिनोस्पोरा कोर्डिफोलिया) और गोखरू (ट्राइबुलस टेरेस्ट्रिस) के चूर्ण के 17 यौगिकों का डिजिटल विश्लेषण किया गया। डॉ. चंद्रा के नेतृत्व में अनीता नयाल, दिशा तिवारी, संजय कुमार और अमीषा बिष्ट वाली टीम ने पाया कि 14 यौगिक AKT-1 को बांधकर उसकी क्रिया रोकते हैं। इनमें केम्पफेरोल (आंवला से), एन-कैफियोलटाइरामाइन (गिलोय से) और मल्टीफिडॉल ग्लूकोसाइड (गोखरू से) टॉप पर रहे। टीम सदस्य अमीषा बिष्ट ने बताया कि ये यौगिक न सिर्फ उम्र रोकेंगे बल्कि कैंसर जैसी बीमारियों से भी लड़ सकते हैं। तीनों को क्लिनिकल ट्रायल के लिए चुना गया है। सफलता मिली तो एंटी-एजिंग मार्केट में भारतीय जड़ी-बूटियां छाई रहेंगी।
AKT-1: बुढ़ापे का मास्टरमाइंड प्रोटीन
विशेषज्ञों के अनुसार, AKT-1 प्रोटीन की अतिसक्रियता कोशिकाओं को तेजी से बूढ़ा बनाती हैं। यह सूजन पैदा करता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाता है और डीएनए को नुकसान पहुंचाता है। दुनिया भर में एंटी-एजिंग रिसर्च इसी को टारगेट कर रही है। SSJ का यह शोध भारत को वैश्विक पटल पर आगे लाता है।

आयुर्वेद से लैब तक का सफर
ये जड़ी-बूटियां आयुर्वेद की धरोहर हैं। आंवला विटामिन सी का खजाना है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर जो फ्री रेडिकल्स को नेस्तनाबूद करता है। आयुर्वेद में तो इसे अमृत फल कहा जाता है। गिलोय इम्यून बूस्टर है। डेंगू, मलेरिया, बुखार से लड़ने में बेहद कारगर है। गोखरू पुरुष शक्ति वर्धक, किडनी-मूत्र रोग नाशक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। सदियों से ग्रामीण भारत इन्हें चूर्ण बनाकर इस्तेमाल करता आया है। अब विज्ञान इनकी मुहर लगा रहा है।
आगे क्या?
अगला चरण होगा क्लिनिकल ट्रायल। यदि इंसानी परीक्षण में सफलता मिली तो एंटी-एजिंग क्रीम, टैबलेट और इंजेक्शन बाजार में आएंगे। यह न सिर्फ ब्यूटी इंडस्ट्री को बदल देगा बल्कि दीर्घायु और स्वस्थ जीवन का सपना साकार करेगा। शोध प्रमुख डॉ. चंद्रा कहते हैं, यह भारत की औषधीय विविधता का प्रमाण है। हिमालयी क्षेत्र की ये जड़ीं वैश्विक स्वास्थ्य क्रांति लाएंगी।
पुतिन-जिनपिंग में क्या हुई थी चर्चा
पुतिन और जिनपिंग के बीच एंटी-एजिंग पर चर्चा सितंबर 2025 में बीजिंग की विक्ट्री परेड (द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ) के दौरान हुई थी। इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था। चीन के तियानमेन गेट पर सैन्य परेड देखते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अनौपचारिक बातचीत के दौरान इसका जिक्र हुआ था। जिनपिंग ने कहा था, पहले लोग 70 साल से ज्यादा नहीं जीते थे आज 70 की उम्र में भी बच्चे जैसे लगते हैं। इसके जवाब में पुतिन ने कहा था, बायोटेक्नोलॉजी से अंग प्रत्यारोपण अनगिनत बार हो सकता है लोग जवान रह सकते हैं या अमर भी। फिर जिनपिंग ने कहा था, इस सदी में 150 साल जीना संभव है। बाद में पुतिन ने इस वायरल वीडियो की पुष्टि भी की थी। पुतिन ने माना कि चर्चा वास्तविक थी।








