खाली हो रहे उत्तराखंड की सबसे बड़ी जरूरत Reverse Migration है। पहाड़ छोड़कर जाने वाले अक्सर ये दलील देते हैं कि काफी समय हो गया है। अब वापस लौटना मुश्किल है। क्योंकि, रहन-सहन का तरीका बदल चुका है। पहाड़ों पर वो सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी जो हमें शहरों में मिलती हैं। लेकिन, खुशखबरी यह है कि लोगों की सोच बदल रही है। खासकर युवाओं की। इस वजह से उत्तराखंड के वीरान गांवों में फिर बहार लौट रही है। पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार गांव से पलायन करने वाले कुल 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इसमें सबसे अधिक 43% 25 से 35 आयु वर्ग के प्रवासी है। 25 साल से कम आयु वर्ग में 28.66% और 35 साल से अधिक आयु वर्ग में 29.09% प्रवासियों ने गांव वापसी की है। रिवर्स पलायन में पौड़ी जिला पहले स्थान पर है। जबकि दूसरे पर अल्मोड़ा व तीसरे स्थान पर टिहरी जिला है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रिवर्स पलायन करने वालों में 25 से 35 आयु वर्ग के 43 प्रतिशत युवा प्रवासी वापस अपने गांव लौटे हैं। अब कृषि, पशुपालन, पर्यटन, स्वरोजगार अपनाकर गांव की मिट्टी में जड़ें जमा रहे हैं। पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार गांव से पलायन करने वाले कुल 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इसमें सबसे अधिक 43% 25 से 35 आयु वर्ग के प्रवासी है।
अब भी खेती-किसानी बड़ा सहारा
परदेस से लौटने वाले प्रवासी खेती-किसानी का तरजीह दे रहे हैं। पलायन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, रिवर्स पलायन कर प्रवासियों ने गांव में कृषि, पर्यटन, पशुपालन को मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाया। 39 प्रतिशत ने कृषि क्षेत्र में खेती, बागवानी, सब्जी उत्पादन, मसाले की खेती, औषधीय व सगंध फसलों की खेती, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन, जैविक खेती, मशरूम उत्पादन शुरू किया। जबकि 21.5 प्रतिशत ने पर्यटन क्षेत्र में होमस्टे, होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग व यात्रा सेवा में व्यवसाय शुरू किया। लगभग 18 प्रतिशत ने पशुपालन क्षेत्र में डेयरी, बकरी पालन, भेड़ पालन, पोल्ट्री पालन, मत्स्य पालन का का काम शुरू किया।

जिला लौटे जिला लौटे
पौड़ी 1213
रुद्रप्रयाग 342
अल्मोड़ा 976
चंपावत 324
टिहरी 827
नैनीताल 300
चमोली 760
देहरादून 201
उत्तरकाशी 448
हरिद्वार 141
बागेश्वर 368
यूएसनगर 38
पिथौरागढ़ 344
कुल 6282
पलायन पर कर चुका है सर्वे
ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग इससे पहले पलायन पर सर्वे कर चुका है। इसमें चौंकाने वाले तथ्य आए हैं। कई गांवों में आबादी न होने से विरान मिले। इसके बाद आयोग ने पिथौरागढ़, टिहरी, चंपावत, ऊधमसिंह नगर, चमोली, हरिद्वार, बागेश्वर, उत्तरकाशी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, अल्मोड़ा जिले में पलायन पर सर्वे किया था। कोरोना महामारी में लॉकडाउन से देश दुनिया में बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी अपने गांव लौटे। प्रदेश सरकार ने प्रवासी उत्तराखंडी अपने गांव में ही रुकें इसके लिए स्वरोजगार की योजना शुरू कर सब्सिडी का लाभ दिया। इसमें कई प्रवासी उत्तराखंडियों ने अपने गांव में अनुभव के आधार पर स्वरोजगार को अपनाया। अब पलायन आयोग की ओर से रिवर्स पलायन पर विस्तृत सर्वे किया जा रहा है। जिसमें गांव में ठहरने वाले प्रवासियों की संख्या, उनके माध्यम से शुरू किए गए उद्यमिता व स्वरोजगार, सरकारी योजनाओं का लाभव कारोबार से फायदा समेत अन्य मुद्दों पर रिपोर्ट तैयार होगी।










