देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के गांव में एडवांस ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। दरअसल, यहां पर एडवांस ट्रेनिंग कैंप लगाया गया था। इसमें करीब एक हजार अग्निवीरों को प्रशिक्षित किया गया। सूत्रों का कहना है कि यह जगह सेना को मुफीद लगी। गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर ने पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लॉक स्थित सैंण गांव को सेना के एडवांस ट्रेनिंग सेंटर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
सेना को यह जगह धरातलीय परिस्थितियों में अब तक के सभी ट्रेनिंग सेंटरों के सापेक्ष यह गांव सर्वथा उपयुक्त लगी। गांव की दूरी रात में पैदल मार्च के मानकों के अनुरूप भी सटीक है। युद्ध जैसी परिस्थितियों के प्रशिक्षण को भी सैंण की दुर्गम पहाड़ियां हर दृष्टि से उत्तम हैं। रेजीमेंटल सेंटर की ओर से जनरल बिपिन रावत के पैतृक गांव में लगाए गए पहले एडवांस कैंप से एक हजार अग्निवीर ट्रेनिंग लेकर लौट आए हैं। इस दौरान रेजिमेंट के अधिकारियों ने पाया कि पूर्व में सेंधीखाल, दुगड्डा़, कोटद्वार व सीला क्षेत्र में लगाए जाने वाले एडवांस ट्रेनिंग कैंपों की अपेक्षा सैंण की परिस्थितियां कई मायनों में काफी बेहतर हैं।

सरहद की तरह जहां दुर्गम पहाड़, जंगल व एकांत क्षेत्र सैंण गांव में मौजूद हैं, वहीं दुश्मन पर आक्रामण के साथ डिफेंस लेने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की ट्रेनिंग के पूर्वाभ्यास को भी सैंण का क्षेत्र काफी वृहद है। यह होता है एडवांस कैंप रेजिमेंट सेंटर में भर्ती के बाद अग्निवीरों को 31 सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाती है। 26 सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद दूरस्थ क्षेत्र में 14 दिन का एडवांस कैंप लगाया जाता है, जो अग्निवीरों को दी गई 26 सप्ताह की ट्रेनिंग का निचोड़ होता है। शेष तीन सप्ताह की ट्रेनिंग रेजिमेंट सेंटर में होती है। एडवांस कैंप में वे सभी परिस्थितियां तैयार की जाती हैं, जिनसे अग्निवीरों को युद्ध के दौरान गुजरना पड़ता है।
एडवांस कैंप के मुख्य बिंदु
- अग्निवीरों को दुश्मन से बचने के लिए बंकर बनाने की ट्रेनिंग
- जमीन में ट्रेंच बनाने के दौरान इसकी चौड़ाई, गहराई व लंबाई का प्रशिक्षण
- युद्धकाल के दौरान जंगल में जीवन व्यतीत करना
- आक्रमण से निपटने, दुश्मन की ओर से पैदा की जाने वाली अड़चनों से निपटने व इन्हें पार करने के गुर
- दुश्मन पर की जाने वाली कार्रवाई के दौरान आपस में सामंजस्य बनाना
- रात के समय युद्ध प्रशिक्षण और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना








