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    Home»जरा हटके»जायका पहाड़ का… भांग की चटनी
    जरा हटके

    जायका पहाड़ का… भांग की चटनी

    हिंदुस्तानी भोजन में अचार, चटनी और पापड़ की अलग अहमियत है, अमूमन कुछ भारतीय स्नैक्स ऐसे होते हैं, जिनके साथ चटनी का होना जरूरी है, उसके बिना इन स्नैक्स को खाने का स्वाद नहीं आएगा। मसलन पकौड़ा या पकौड़ी, समोसे और चाट। अमूमन चटनी कच्चे आम, हरी धनिया, पुदीना और हरी मिर्च से बनती है, लेकिन भांग की चटनी के बारे में क्या कहेंगे, क्या आपने उसे चखा है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भांग की चटनी चर्चित स्थानीय जायका है। लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं।
    teerandajBy teerandajApril 1, 2025No Comments
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    जायका पहाड़ का …  कैनबिस यानी भांग का नाम सुनकर आपको लग रहा होगा कि इसमें तो नशा होता होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। भांग के बीज में किसी तरह का कोई नशा नहीं होता है। इसीलिए पहाड़ के हर घर में भांग की चटनी बनाई जाती हैष यह खाने में भी बेहद स्वादिष्ट होती है। भांग की चटनी उत्तराखंड की खानपान की संस्कृति का प्रतीक है। इसका इतिहास स्थानीय संसाधनों के कुशल उपयोग और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ा हुआ है। यह न केवल स्वादिष्ट और पौष्टिक है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाती है। आज यह उत्तराखंड के जायकों में अपनी अलग पहचान बना चुकी है, बल्कि इसकी लोकप्रियता देश-विदेश तक पहुंच चुकी है। भांग के बीज की चटनी न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि सर्दियों में गर्माहट प्रदान करती है और शरीर को ऊर्जा देती है। सदियों से इसे यहां के लोग चाव से खाते हैं। भांग का उल्लेख अथर्ववेद में देवताओं के प्रिय पौधों में से एक के रूप में किया गया है। इसे पवित्र माना गया और इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों में भी होता रहा है। भांग की चटनी में उपयोग किए जाने वाले बीज नशे से मुक्त होते हैं।

     

    ओमेगा-3 और फेटी एसिड
    भांग के बीजों में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड होते हैं, जो दिल की सेहत को ठीक रखने में मदद करते हैं। ये फैटी एसिड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करते हैं और ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखते हैं। इसमें मौजूद अर्जिनाइन नामक एमीनो एसिड रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है और खून के प्रवाह में सुधार करता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। भांग के बीजों में घुलनशील और अघुलनशील दोनों फाइबर होते हैं, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यह कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने और आंतों की सफाई में सहायक है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। भांग के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन-ई होते हैं, जो त्वचा को चमकदार बनाते हैं और बालों को मजबूत करते हैं। यह त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे सोरायसिस और एक्जिमा में भी मददगार हो सकते हैं। इसके नियमित सेवन से बालों का गिरना रुकता है और स्कैल्प का स्वास्थ्य बेहतर होता है।

    भांग की चटनी में मौजूद फैटी एसिड जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। यह गठिया जैसी समस्याओं में राहत प्रदान कर सकती है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे खनिज होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। भांग के बीजों में ग्लोब्युलिन प्रोटीन होता है, जो शरीर में एंटीबॉडी बनाने में मदद करता है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर संक्रमण से बचा रहता है। भांग की चटनी में तनाव कम करने वाले गुण होते हैं। यह मानसिक शांति प्रदान करती है और मूड को बेहतर बनाती है। भांग के बीज प्रोटीन और आवश्यक अमीनो एसिड से भरपूर होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह विशेष रूप से शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। सर्दियों में यह चटनी शरीर को गर्माहट देती है और ठंड से बचाने में मदद करती है। यह मौसम परिवर्तन के दौरान प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में सहायक होती है।

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    18 देशों में कानूनी मान्यता
    विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के अनुसार कुछ अध्ययन बताते हैं कि भांग कैंसर, एड्स, अस्थमा और ग्लूकोमा जैसी बीमारियों के इलाज में मददगार है। विश्व के 18 से अधिक देश चिकित्सीय प्रयोग के लिए गांजे को कानूनी वैधता प्रदान कर चुके हैं। हालांकि गांजे के चिकित्सीय इस्तेमाल को लेकर अभी और अध्ययन हो रहे हैं। सुश्रुत संहिता में भी गांजे के चिकित्सीय प्रयोग की जानकारी है। सुस्ती, नजला और डायरिया में इसके इस्तेमाल का जिक्र मिलता है। भारत में भांग की मुख्य तौर पर दो प्रजातियां पायी जाती हैं, कैनबिस इंडिका और कैनबिस सटाइवा।

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