सदियों की प्रतिक्षा पूरी हुई। मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराई। इस दौरान विशाल राम मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। मंदिर के उद्घाटन की तरह ही लोग अपने घरों में टीवी व अन्य माध्यमों से लाइव प्रसारण देख रहे हैं। 61 फीट ऊंचे शिखर और पांच उप शिखर से युक्त राम मंदिर परस्पर प्रतिस्पर्धी प्रतीत होते कई अन्य शिखरों की श्रृंखला से सज्जित है और इसमें सबसे करीबी वे छह पूरक मंदिर हैं, जो मुख्य मंदिर के परकोटे में ही हैं। यह पूरक मंदिर समान ऊंचाई के और समान अधिष्ठान पर निर्मित हैं।
अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है। सदियों के घाव भर रहे हैं। सदियो की वेदना आज विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सि्द्धि को प्राप्त हो रही है। आज धर्म ध्वजा की मंदिर में स्थापना हुई है। इसका भगवा रंग, सूर्य का चिन्ह, कोविदार वृक्ष राम राज्य की कीर्ति को गाता है। सत्य में ही ध्वज स्थापित है। ये धर्म ध्वज प्रेरणा बनेगा। प्राण जाए पर वचन न जाए, अर्थात जो कहा जाए, वही किया जाए। हम ऐसा समाज बनाएं, जहां कोई गरीब न हो। कोई पीड़ित ना हो। यह ध्वज युगों युगों तक श्री राम के आदेशों और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा। उन्होंने हर दानवीर, श्रमवीर, कारीगर, योजनाकार, वास्तुकार का अभिनंदन किया।

यही वह नगरी है, जहां से श्रीराम ने अपना जीवन पथ शुरू किया था। विकसित भारत बनाने के लिए समाज की सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। यहां सप्त मंदिर बने हैं। यहां निषाद राज का मंदिर बना है, जो साधन नहीं साध्य और उसकी भवानाओं को पूजती है। यहां जटायु जी और गिलहरी की भी मूर्ति है। जो बड़े संकल्प की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास को दिखाती है। उन्हें शक्ति नहीं सहयोग महान लगता है। आज हम भी उसी भवना से आगे बढ़ रहे हैं। आज युवा, वंचित, किसान और महिलाओं सभी का ध्यान रखा गया है। 2047 में जब हम आजादी के 100 वर्ष मनाएंगे, तब हमें 2047 तक विकसित भरात का निर्माण करना ही होगा।
धर्मध्वज फहराने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि आज पीढ़ियों की प्रतीक्षा आज साकार हुई। उन्होंने कहा कि देश आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर के शिखर फहरा रहा यह केसरिया ध्वज नए भारत का प्रतीक है। 500 वर्षों में समय बदला, नेतृत्व बदला, लेकिन आस्था न झुकी, न रुकी। जब आरएसएस के हाथ में कमान आई तो सिर्फ एक ही आवाज गूंजती रही। रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। यह राम मंदिर करोड़ों की आस्था का प्रतीक है।

गुलामी की मानसिकता के खात्मे का संकल्प
पीएम मोदी ने कहा, आज जब राम मंदिर पर धर्म ध्वजा के माध्यम से देश अपनी सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिंदु का साक्षी बन रहा है, तो इस अवसर पर हमें इस मानसिकता के खात्मे का संकल्प भी लेना होगा। 10 वर्ष बाद मैकाले की शिक्षा पद्धति के दो सौ साल पूरे हो जाएंगे। तब तक हमें इस मानसिकता से पूरी तरह मुक्ति पानी होगी। प्रधानमंत्री के इस आह्वान को देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव का संकेत माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें आजादी तो मिली लेकिन गुलामी की मानसिकता में ढल जाने के कारण हम हीन भावना से नहीं उबर सके। हमें विदेश की हर चीज अच्छी लगती है और अपनी हर चीज में खोट नजर आती है। मोदी ने कहाकि यह गुलामी की मानसिकता का ही असर है कि हमारे संविधान को भी विदेश से प्रेरित बताया गया,जबकि सच यह है कि भारत लोकतंत्र की जननी (मदर आफ डेमाक्रेसी) है।
पीएम ने तमिलनाडु के एक गांव में स्थित एक हजार वर्ष पुराने शिलालेख का उल्लेख करते हुए कहाकि उस पर अत्यंत सुंदर शब्दों में तत्कालीन लोकतांत्रिक व्यवस्था का विवरण मिलता है। मोदी ने देश में रामत्व को नकारे जाने को भी गुलाम मानसिकता का एक और उदाहरण बताया। उन्होंने कहाकि यदि हम ठान लें तो 10 वर्ष में इस मानसिकता से मुक्ति पाना कठिन नहीं है। इसके बाद एक ऐसी ज्वाला प्रज्वलित होगी जो हमें आत्मविश्वास और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कर 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ने का मार्ग दिखायेगी।

इस मौके पर सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज हम सबके लिए सार्थकता का दिन है। इसके लिए जितने लोगों ने प्राण न्योछावर किए, उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। अशोक जी को वहां पर शांति मिली होगी। आज मंदिर का ध्वजारोहण हो गया। राम राज्य का ध्वज जो कभी अयोध्या में फहराता था, आज वह फहरा गया है। इस भगवा ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है। यह वह वृक्ष है जिसके लिए कहा जाता है, कि वृक्ष सबके लिए छाया देते हैं, स्वंय धूप में खड़े रहकर, फल भी दूसरों के लिए देते हैं। जाते जितनी कठिनाइयां हों, सूर्य भगवान उस संकल्प का प्रतीक है। इसमें सिर्फ एक ही पहिया है। जैसे सपना उन लोगों ने देखा था, बिल्कुल वैसा ही या यूं कहें कि उससे भी भव्य मंदिर बन गया है।

ध्वज में कोविदारा वृक्ष की छवि के साथ ‘ओम’ अंकित
राम मंदिर के शिखर पर फराया जाने वाला ध्वज 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा, समकोण त्रिभुजाकार है। इस पर एक उज्ज्वल सूर्य की छवि है, जो भगवान श्री राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक है, साथ ही कोविदारा वृक्ष की छवि के साथ इस पर ‘ओम’ अंकित है। झंडा पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर आर्किटेक्चरल स्टाइल में बने शिखर पर फहराया गया। जबकि मंदिर के चारों ओर बना 800 मीटर का परकोटा, जो दक्षिण भारतीय आर्किटेक्चरल परंपरा में डिजाइन किया गया है, मंदिर की आर्किटेक्चरल विविधता को दिखाता है।
पांच साल की तपस्या, श्रम साधना के 1400 करोड़ रुपये में तैयार हुआ मंदिर

पांच साल की निरंतर तपस्या, तकनीक और श्रम-साधना के बाद लगभग 1400 करोड़ रुपये की लागत से भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर पूर्णता को प्राप्त कर चुका है। मंदिर निर्माण की यात्रा आसान नहीं रही। भूमि पूजन पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही किया था और उस शुभ क्षण से लेकर आज तक निर्माण एक भी दिन नहीं रुका। बारिश, ठंड, कोरोना महामारी और तकनीकी चुनौतियां… सब आईं, पर न अविरल श्रम रुका, न ही विश्वास डिगा। निर्माण के दौरान कई बार धरातलीय बाधाएं सामने आईं। मंदिर की नींव के लिए जब प्रारंभिक टेस्ट पाइलिंग की गई, तो वह तकनीकी रूप से विफल सिद्ध हुई। इंजीनियरों ने पाइलिंग किए गए खंभों पर जब भूकंप जैसे झटके दिए तो खंभों में दरार आ गई। इसके चलते इंजीनियरों को पूरी नींव की डिजाइन फिर से बनानी पड़ी। इसमें छह महीने लग गए। नई नींव में आरसीसी (रोलर कंपैक्ट कंक्रीट) का उपयोग किया गया। नींव इस तरह तैयार की गई है कि यह हजारों वर्षों तक बिना क्षति के टिक सके। खोदाई के दौरान गहराई में मिली पुरातात्विक परतें, पत्थर संरचना के लिए उच्च गुणवत्ता वाले शिलाखंडों की उपलब्धता…लेकिन हर चुनौती का समाधान अदम्य संकल्प के साथ निकला। भूमि पूजन के बाद शुरु हुए कार्य में देशभर के चार हजार से अधिक शिल्पियों, इंजीनियरों, कारीगरों और श्रमिकों ने योगदान दिया।








