उत्तराखंड सरकार की अहम देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना जल्द लागू होने जा रही है। नियोजन विभाग द्वारा इस योजना के लिए तैयार किया जा रहा कानून अब अंतिम चरण में है। संभावना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार के चार वर्ष पूरे होने के मौके पर योजना को औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा। इस योजना का मकसद हरियाणा मॉडल की तरह केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे और सुचारु रूप से वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना है। इसके तहत राज्य में रहने वाले प्रत्येक परिवार का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और हर परिवार को आठ अंकों की यूनिक परिवार पहचान संख्या आवंटित की जाएगी।
प्रमुख सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि योजना को विधिक स्वरूप देने के लिए एक्ट का मसौदा तैयार किया जा रहा है। इसे फरवरी में प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। इसके बाद मार्च में गैरसैंण में होने वाले बजट सत्र के दौरान विधेयक को विधानसभा के पटल पर लाया जाएगा। विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभाव में आ जाएगा और योजना लागू हो सकेगी।

योजना लागू होते ही राज्य की सभी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को परिवार पहचान पत्र से जोड़ा जाएगा। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी, फर्जी और दोहरे लाभार्थियों पर रोक लगेगी तथा पात्र परिवारों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि वे किन योजनाओं के हकदार हैं और किनका लाभ वे पहले प्राप्त कर चुके हैं। परिवार के मुखिया को एक लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा, जिसके माध्यम से वे घर बैठे ऑनलाइन अपने परिवार से संबंधित विवरण-जैसे सदस्यों की संख्या, नाम या पते में आवश्यक संशोधन कर सकेंगे। इस पहल से आम नागरिकों को प्रमाण पत्र बनवाने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।








