उत्तराखंड सरकार ने सीएम सौर स्वरोजगार योजना को नया आयाम देते हुए सोलर प्लांट के साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर भी सब्सिडी देगी। इस कदम से न केवल राज्य में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि लंबे समय से चला आ रहा बिजली संकट भी स्थायी रूप से दूर हो सकेगा। दिन में पैदा होने वाली सोलर बिजली को बैटरी में स्टोर कर रात या पीक समय में बेचने से यह प्रोजेक्ट मुनाफे का सौदा बन जाएगा। दरअसल, वर्तमान में सोलर पावर का उपयोग मुख्य रूप से दिन के समय ही संभव है। इस दौरान ऊर्जा एक्सचेंज में बिजली के दाम बेहद कम (करीब 2-3 रुपये प्रति यूनिट) रहते हैं, जिससे ऊर्जा निगमों को नुकसान होता है। यूपीसीएल ने सोलर प्रोजेक्ट्स की टेक्निकल फिजिबिलिटी रिपोर्ट देने में आनाकानी की थी। जो प्लांट लग चुके हैं, उनकी बिजली सप्लाई भी ठीक से नहीं हो पा रही। निगम का तर्क है कि सोलर बिजली मिलने का समय ही बाजार में सबसे सस्ता होता है।
इस समस्या के समाधान के लिए ही बैटरी स्टोरेज सिस्टम जोड़ने का फैसला लिया गया है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम मीडिया से बातचीत में कहते हैं, सोलर पावर के रेट दिन में कम रहते हैं। बैटरी स्टोरेज से अतिरिक्त बिजली रात में इस्तेमाल हो सकेगी। उन्होंने निदेशक उरेडा को निर्देश दिए हैं कि सभी हितधारकों के साथ बैठक कर एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी जाए। रिपोर्ट में बैटरी की ऊंची लागत, ऑपरेशनल चुनौतियां और रखरखाव खर्च पर विचार होगा। छोटे निवेशकों के लिए सिस्टम से तालमेल बैठाना मुश्किल हो सकता है।

बैटरी स्टोरेज को लेकर कुछ असमंजस भी है। चूंकि, बैटरी की कीमत अभी अधिक है और रखरखाव कॉस्ट बढ़ेगी। फिर भी केंद्र सरकार की मदद से यह संभव हो रहा है। केंद्र ने बैटरी स्टोरेज के लिए 200 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया है और राज्यों को प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड इसमें अग्रणी बनने को तैयार है। वर्तमान में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) बड़े स्तर पर बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट चला रहा है। निगम हाइड्रो प्रोजेक्ट से बनी बिजली को स्टोर कर पीक टाइम (जब दाम 8-10 रुपये प्रति यूनिट) में यूपीसीएल को बेचेगा। इससे ग्रिड स्थिरता बढ़ेगी। छोटे निवेशकों के लिए सीएम सौर स्वरोजगार योजना अब और आकर्षक हो गई है।
योजना एमएसएमई विभाग द्वारा संचालित है। लाभार्थी बैंक से प्रोजेक्ट लागत का 70 प्रतिशत तक ऋण ले सकते हैं। मार्जिन मनी सहायता इस प्रकार है-
- सामान्य श्रेणी: परियोजना लागत का 15 प्रतिशत (अधिकतम 1 लाख रुपये)।
- विशेष श्रेणी (बीपीएल, एससी/एसटी, ओबीसी-गैर क्रीमी लेयर, महिला, अल्पसंख्यक, विकलांग): 30 प्रतिशत (अधिकतम 2 लाख रुपये)।
लिथियम-आयन बैटरी की कीमतें घटीं

यह योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देगी। पहाड़ी राज्य में सोलर की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन बिजली संकट ग्रामीण क्षेत्रों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है। बैटरी स्टोरेज से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। लिथियम-आयन बैटरी की कीमतें 2025 तक 10 हजार रुपये प्रति किलोवाट-घंटे तक गिर चुकी हैं, जो निवेश को आसान बनाएंगी। उरेडा के अनुसार योजना से हजारों युवा लाभान्वित होंगे। स्वरोजगार के साथ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। सरकार का लक्ष्य 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी स्टोरेज से सोलर प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता दोगुनी हो जाएगी। राज्य में पहले से 500 मेगावाट से अधिक सोलर क्षमता स्थापित है। नई योजना से यह दोगुनी हो सकती है। युवा उद्यमी अब सोलर बैटरी प्लांट लगाने को प्रोत्साहित होंगे। सरकार आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन सरल बना रही है। उरेडा की रिपोर्ट के बाद सब्सिडी नियमों में बदलाव संभव है।








