सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की एक बेंच ने शुक्रवार को अपने एक आदेश में सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वो आवारा कुत्तों और मवेशियों को हाईवे, सड़कों और एक्सप्रेस-वे से हटा दें। हालांकि कोर्ट का लिखित आदेश अभी जारी नहीं हुआ है। कोर्ट ने अपने मौखिक आदेश में कहा, इसका सख्ती से पालन करना जरूरी है वरना अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों- जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कुत्तों के काटने के मामलों में चौंकाने वाली बढ़ोतरी की बात कही और आदेश दिया कि अधिकारी आवारा कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें शेल्टर में टीके दिए जाएं। इसके बाद उन्हें पुरानी जगहों पर न छोड़ा जाए। इसके अलावा सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के दोबारा न घुसने देने के इंतजाम भी तय हों। कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को करेगी।
कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया कि वे सरकारी और निजी संस्थानों की पहचान करें, जिनमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक खेल परिसर, रेलवे स्टेशन शामिल हैं। उन्हें इस तरह घेर दें कि आवारा कुत्ते अंदर न आ सकें। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को ऐसे परिसरों से मौजूदा आवारा कुत्तों को हटाकर उनकी नसबंदी करानी होगी। इसके बाद उन्हें डॉग शेल्टर में भेजना होगा। कुछ वकीलों ने आदेश पर चिंता जताई और कोर्ट से इसे संशोधित करने के लिए सुनवाई की मांग की। हालांकि बेंच से इसे खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर शैक्षिक संस्थान, अस्पताल, स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, बस स्टैंड, डिपो, रेलवे स्टेशनों इत्यादि की अच्छी तरह से बाड़बंदी जरूरी है, ताकि आवारा कुत्तों को घुसने से रोका जा सके। बेंच ने कहा कि ये स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे आवारा कुत्तों को इस तरह की जगहों से हटाए और टीकाकरण, नसबंदी के बाद उन्हें एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स के अनुरूप ही कुत्तों के लिए बने शेल्टर में रखें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन इलाकों से हटाए गए कुत्तों को उसी जगह वापस न छोड़ा जाए। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ऐसा करने से इन जगहों से आवारा कुत्तों से मुक्त करवा पाने का मकसद पूरा नहीं हो पाएगा। साथ ही शीर्ष अदालत ने स्थानीय निकायों को इन जगहों का समय-समय पर निरीक्षण करने को भी कहा, ताकि यहां कुत्ते अपना घर न बना सकें। कोर्ट ने सड़कों और हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए निर्देश भी दिए।
पहले क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?
इसी साल जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने एक न्यूज रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए आवारा कुत्तों का मामला उठाया था। दो जजों की इस बेंच ने 11 अगस्त को सुनवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम्स में बंद करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट और रेबीज की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई थी और अधिकारियों को इस काम को आठ हफ्ते में पूरा करने की समयसीमा दी थी। हालांकि, पशु प्रेमियों ने इस आदेश का विरोध किया और कुछ डॉग लवर्स ने सुप्रीम कोर्ट में ही इसके खिलाफ अर्जी दी थी।
संगठनों का कहना था कि अगर दिल्ली सरकार ने पहले ही प्रभावी नसबंदी कार्यक्रम लागू किया होता तो आज सड़कों पर शायद ही कोई कुत्ता होता।
आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में बंद करने वाले आदेश के खिलाफ दी गई अर्जी पर तीन जजों की बेंच ने निर्देश दिया कि जिन कुत्तों को पकड़ा गया है, उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाए। हालांकि, इस फैसले में शीर्ष न्यायालय ने यह भी कहा था कि जिन कुत्तों को रेबीज है या रेबीज होने का संदेह है, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। इसी मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई डॉग लवर्स और पशु अधिकार कार्यकर्ता जुटे थे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई थी।
राज्यों में क्या है हाल?

मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालय के अनुसार देश में सबसे ज्यादा आवारा कुत्ते उत्तर प्रदेश में हैं। देश के अधिकतर राज्यों में आवारा कुत्तों और रेबीज से निपटने के लिए एबीसी नियम 2023 के अनुसार ही कदम उठाए जाते हैं। साल 2022 में मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालय ने संसद में जानकारी दी थी कि देश में सबसे अधिक आवारा कुत्तों की संख्या उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में है जबकि दादर और नगर हवेली, लक्षद्वीप और मणिपुर में सड़कों पर कोई भी आवारा कुत्ता नहीं है।








