Uttarakhand कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में 11 प्रस्तावों पर सहमति बनी। कैशलेस इलाज को मजबूत बनाने के लिए आयुष्मान और अटल आयुष्मान योजना को 100% इंश्योरेंस मोड में ले जाया गया है। कर्मचारियों का अंशदान बढ़ाकर 450 रुपये तक किया गया, जबकि कलाकारों-लेखकों की पेंशन दोगुनी हो गई। उपनल कर्मचारियों के समान वेतन का मामला मंत्रिमंडल उपसमिति को सौंपा गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने स्वास्थ्य, कृषि, वित्त और औद्योगिक क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक फैसले लिए।
कैबिनेट ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान योजना को पूर्ण रूप से इंश्योरेंस मोड में संचालित करने का फैसला किया। गोल्डन कार्ड अब हाइब्रिड मोड में चलेगा। पांच लाख रुपये से कम के क्लेम सीधे इंश्योरेंस कंपनियों से भुगतान होंगे, जबकि इससे अधिक के क्लेम ट्रस्ट मोड से निपटाए जाएंगे। महंगाई के अनुपात में कर्मचारियों से लिया जाने वाला मासिक अंशदान 250 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये तक हो गया। इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी, तथा मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा आसानी से मिलेगी। दुर्गम और अति दुर्गम इलाकों में सेवा देने वाले लगभग 300 विशेषज्ञ डॉक्टरों को 50% अतिरिक्त भत्ता मिलेगा।
इसके अलावा, उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा संशोधन नियमावली को मंजूरी मिली। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की सेवानिवृत्ति आयु 50 से बढ़ाकर 62 वर्ष की गई। सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए अलग विभाग बनाए गए हैं। स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट हल्द्वानी के लिए 4 नए पद सृजित किए गए। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 277 उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ मिलेगा, जिसका मामला उपसमिति को भेजा गया। वहीं, संस्कृति अकादमी के कलाकारों और लेखकों की मासिक पेंशन 3000 रुपये से दोगुनी कर 6000 रुपये की गई। यह फैसला स्थानीय कला-संस्कृति को प्रोत्साहन देगा।

कृषि और संस्कृति क्षेत्र को मिली सौगात
कृषि विभाग के लिए धराली और आसपास के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सेब उत्पादकों को राहत। रॉयल डिलिशियस सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य 51 रुपये प्रति किलो और रेड डिलिशियस सेब का 45 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया। इससे पहाड़ी किसानों की आय बढ़ेगी। वित्त विभाग ने नेचुरल गैस पर वैट दर 20% से घटाकर मात्र 5% कर दी, जिससे उद्योगों और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत निम्न जोखिम वाले भवनों और छोटे व्यावसायिक भवनों के नक्शे अब एम्पैनल्ड आर्किटेक्ट द्वारा पास कराए जा सकेंगे। औद्योगिक विकास के लिए एमएसएमई और इंडस्ट्री यूनिट्स का ग्राउंड कवरेज बढ़ाया गया। बांस एवं रेशा विकास परिषद के ढांचे में बदलाव किया गया। तकनीकी स्टाफ को उपनल के बजाय आउटसोर्सिंग से रखा जाएगा, जिसमें 13 पद कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्सिंग पर भरे जाएंगे। सिंचाई एवं लोक निर्माण विभाग के वर्क चार्ज कर्मचारियों को पेंशन की सुविधा प्रदान की गई। उपनल कर्मचारियों के समान वेतन का मामला मंत्रिमंडल उपसमिति के पास भेजा गया, जिससे सैकड़ों कर्मियों को लाभ होगा।







