हर बार की तरह इस बार भी पीएम नरेंद्र मोदी जवानों के बीच दिवाली मनाने पहुंचे। इस बार वह समुंद्र के बीच आईएनएस विक्रांत पर गए। वहां जवानों के बीच दिवाली मनाई। लड़ाकू विमानों को उड़ते हुए देखा। जवानों के साथ देशभक्ति गीत गाए। साथ ही ऑपरेशन सिंदूर पर भी बात की। ब्रम्होस के बारे में कहा कि यह भारत में निर्मित ऐसा शस्त्र है, जिसका नाम सुनते ही दुश्मन की रूह कांप उठती है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने आईएनएस विक्रांत पर दिवाली मनाते हुए अपने संबोधन में कहा, मैं भाग्यशाली हूं कि इस बार मैं दिवाली का यह पावन त्योहार नौसेना के आप सभी वीर जवानों के बीच मना रहा हूं। विक्रांत पर बिताई कल की रात, इस अनुभव को शब्दों में कहना कठिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल गोवा के तट पर INS विक्रांत पर भारतीय नौसेना के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से जवानों को मिठाई खिलाई और उनके देशभक्ति गीतों को सुना।
From the Air Power Demo at INS Vikrant! pic.twitter.com/XvrFL9peOK
— Narendra Modi (@narendramodi) October 20, 2025


आईएनएस विक्रांत पर सवार होकर, प्रधानमंत्री मोदी मिग-29K लड़ाकू विमानों से घिरे फ्लाइटडेक पर गए और दिन और रात दोनों समय, छोटे रनवे पर MiG 29 लड़ाकू विमानों को उड़ान भरते और रनवे पर उतरने का एयर पावर डेमो देखा। प्रधानमंत्री मोदी ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देखा, जहां INS विक्रांत के अधिकारियों और नाविकों ने देशभक्ति गीत गाए। इन देशभक्ति गीतों में ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सशस्त्र बलों की सफलता के उपलक्ष्य में नौसेना के जवानों द्वारा लिखा गया एक विशेष गीत भी शामिल था।

ब्रम्होस का नाम सुनते ही हैरान होते हैं कई देश

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जब कुछ लोग ब्रह्मोस का नाम सुनते हैं, तो उनके मन में डर पैदा हो जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान बताया कि वर्तमान की एनडीए सरकार का लक्ष्य भारत को दुनिया के टॉप डिफेंस एक्सपोर्टर्स में से एक बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 से हमारे शिपयार्ड ने 40 से अधिक वॉरशिप और सबमरीन बनाए हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कल INS विक्रांत पर बिताई रात को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मैंने देखा कि आप सब कितनी एनर्जी और जोश से भरे हुए थे। जब मैंने कल आपको देशभक्ति के गाने गाते हुए देखा, और जिस तरह से आपने अपने गानों में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताया, कोई भी शब्द उस अनुभव को पूरी तरह से बयां नहीं कर सकता जो एक जवान युद्ध के मैदान में खड़ा होकर महसूस करता है।








