इस बार की कांवड़ यात्रा के दौरान भी दुकानदारों-ढाबों और होटलों में मालिक का नाम लिखने का दिशा-निर्देश जारी किया गया है। हालांकि, आदेश में मालिक के नाम की जगह लाइसेंस कहा गया है। लाइसेंस में मालिक का नाम होगा ही। बतादें कि पिछली बार कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानदारों का नाम लिखने की अनिवार्यता के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी थी। इस बार भी मामला कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। उत्तराखंड के सचिव स्वास्थ्य और खाद्य संरक्षा आयुक्त डॉ आर राजेश कुमार की ओर से इस संदर्भ में दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। डॉ. आर राजेश कुमार ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि फूड लाइसेंस दुकान के बाहर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। आदेश में कहा गया है कि खाद्य संरक्षा विभाग को होटल, ढाबों के साथ ही भंडारे और पंडाल में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित जांच करने को कहा गया है। कांवड़ यात्रा को लेकर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को व्यापक तैयारी के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सेहत को लेकर विभाग को अलर्ट मोड़ पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यात्रा मार्ग से जुड़े जिलों में मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान खाद्य कारोबारियों को अपने प्रतिष्ठानों में लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाण पत्र रखना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई कारोबारी बिना पंजीकरण या लाइसेंस के व्यापार करता पाया गया, तो खाद्य सुरक्षा ऐक्ट के तहत ₹2 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य की सभी सीमाओं पर मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब तैनात की जाएगी और प्रत्येक दिन सैंपल जांच कर रिपोर्ट ली जाएगी
टोल फ्री नंबर किया जारी
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है। कोई भी व्यक्ति टोल फ्री नंबर 18001804245 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके साथ ही मिलावट रोकने के लिए संयुक्त छापेमारी दलों का गठन किया गया है। जिसमें पुलिस को भी शामिल किया गया है।

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यूपी और उत्तराखंड सरकार की ओर से एक निर्देश में कहा गया था कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले सभी ढाबों-होटलों और दुकानों के बाहर मालिक का नाम लिखा जाए। इनका तर्क था कि ऐसा कांवड़ यात्रा की शुद्धता बचाने के लिए किया जा रहा है। इसके बाद कई संगठन समर्थन तो कई विरोध में उतर गए। सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों याचिकाएं दाखिल हुईं। कई लोगों का कहना था इससे मुस्लिमों का आर्थिक बहिष्कार की कोशिश की जा रही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दुकानदारों को मालिक का नाम चिपकाने की जरूरत नहीं है। बल्कि, वे सिर्फ यह बताएं कि उनके पास कौन-से और किस प्रकार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने बताया कि यह चिंताजनक स्थिति है। यहां पुलिस अधिकारी समाज को बांटने का बीड़ा उठा रहे हैं। अल्पसंख्यकों की पहचान करके उनका आर्थिक बहिष्कार किया जाएगा। यूपी और उत्तराखंड के अलावा दो और राज्य इसमें शामिल हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या यह प्रेस स्टेटमेंट था या औपचारिक आदेश कि इन्हें प्रदर्शित किया जाना चाहिए? याचिकाकर्ताओं के वकील ने जवाब दिया कि पहले प्रेस स्टेटमेंट था और फिर लोगों में आक्रोश दिखने लगा और इस पर कहा कि यह स्वैच्छिक है, लेकिन वे इसका सख्ती से पालन करा रहे हैं। वकील ने कहा कि यह कोई औपचारिक आदेश नहीं है। फिर भी पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह एक छद्म आदेश है।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया था राज्य सरकार ने खाद्य विक्रेताओं के व्यापार या व्यवसाय पर कोई प्रतिबंध या निषेध नहीं लगाया है (मांसाहारी भोजन बेचने पर प्रतिबंध को छोड़कर), और वे अपना व्यवसाय सामान्य रूप से करने के लिए स्वतंत्र हैं। हलफनामे में कहा गया है, ‘मालिकों के नाम और पहचान प्रदर्शित करने की आवश्यकता पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कांवड़ियों के बीच किसी भी संभावित भ्रम से बचने के लिए एक अतिरिक्त उपाय मात्र है।
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