Uttarakhand : काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में लापरवाही व उदासीनता बरतने के आरोप में आईटीआई थानाध्यक्ष और एक दारोगा को निलंबित कर दिया गया है। बतादें कि सुखवंत सिंह के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले का संज्ञान लिया है। इसी के तहत सोमवार को निलंबन की कार्रवाई की गई। एसएसपी मणिकांत मिश्रा की ओर से जारी आदेश के अनुसार थाना अध्यक्ष आईटीआई में तैनात उपनिरीक्षक कृतन सिंह रौतेला और कोतवाली आईटीआई में कार्यरत उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को निलंबित किया गया है। दोनों पर मामले में आवश्यक कार्रवाई न करने, सतर्कता में कमी और कर्तव्यों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने के आरोप हैं। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि मामले की विवेचना और निगरानी में गंभीर लापरवाही हुई, जो पुलिस नियमों के विपरीत है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर दोनों उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। साथ ही मामले की जांच एसपी क्राइम एवं ट्रैफिक को प्रारंभिक जांच सौंपी गई है। उधमसिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि एक बार पीड़ित मेरे पास आया था। उसकी समस्या को पब्लिक के सामने ही सुना गया था। इसके बाद थाना प्रभारी को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। थाना स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जांच की जाएगी।

यह है मामला
उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर क्षेत्र में सुखवंत सिंह (40) निवासी ग्राम पैगा काशीपुर ने गोलियाबार क्षेत्र स्थित एक होटल में खुद को अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मार ली थी। जांच में सामने आया कि सुखवंत सिंह जमीन के एक पुराने विवाद से मानसिक रूप से परेशान था। मृतक के परिजनों के अनुसार सुखवंत सिंह ने करीब 3.80 करोड़ रुपये में 50 बीघा जमीन खरीदी थी जिसकी रजिस्ट्री को लेकर बाद में विवाद खड़ा हो गया। घटना के बाद किसान के परिजनों ने काशीपुर के एसएसपी, कुंडा थाना प्रभारी और पैगा चौकी प्रभारी पर मामले में अनदेखी और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। सुखवंत ने दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कुंडा थाना के एसओ, पैंगा के चौकी प्रभारी और ऊधमसिंह नगर के एसएसपी पर प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
सुखवंत सिंह के पिता ने क्या कहा?
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे सुखवंत सिंह के पिता तेजा सिंह सिंह ने बताया कि एक साल पहले पेपर मिल के लिए सात एकड़ जमीन अधिग्रहीत हुई थी। मुआवजे के पैसे को सुखवंत दूसरी जगह इन्वेस्ट करना चाह रहा था। प्रापर्टी डीलरों ने उसे कुंडा के बक्सौरा में सात एकड़ जमीन दिखाई। इसका बाजार मूल्य चार करोड़ रुपये था। नकद व चेक के माध्यम से सुखवंत ने 3.80 करोड़ दे दिए। 15 अप्रैल 2025 को काशीपुर में कुछ अन्य लोगों की मौजूदगी में जिस जमीन की रजिस्ट्री की गई, वह दूसरी थी। उसका बाजार मूल्य तकरीबन 50 लाख रुपये था। इसकी जानकारी होने के बाद सुखवंत सिंह ने आरोपियों से रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने पुलिस के साथ मिलकर उनका और पूरे परिवार का उत्पीड़न किया। सुखवंत सिंह के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसमें थाना से लेकर जिला स्तर के पुलिस अधिकारी शामिल थे। देहरादून भी जाकर पुलिस अफसरों से मिला लेकिन कुछ नहीं हुआ।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुमाऊं आयुक्त को पूरे प्रकरण की जांच सौंप दी है। साथ ही एसएसपी उधमसिंह नगर से भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष सामने आया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।








