Uttarakhand पुलिस ने तकनीकी नवाचार और आधुनिक न्याय प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। Uttarakhand पुलिस ने इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 की राष्ट्रीय मासिक रैंकिंग में देश के सभी राज्यों को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी इस रैंकिंग में उत्तराखंड को 93.46 अंक मिले हैं। बृहस्पतिवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान पुलिस प्रवक्ता और आईजी (कानून व्यवस्था) सुनील कुमार मीणा ने इस गौरवशाली उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने इस पायदान पर पहुंचने के लिए हरियाणा जैसी तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस को भी पीछे छोड़ दिया है।

कड़े मुकाबले में हरियाणा और असम को पछाड़ा
NCRB द्वारा जारी नवीनतम सीसीटीएनएस-आईसीजेएस प्रगति डैशबोर्ड रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड ने अपनी तकनीकी दक्षता और डेटा एकीकरण में जबरदस्त सुधार किया है। रैंकिंग में शीर्ष तीन राज्यों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा रहा। आईजी मीणा ने कहा कि यह सफलता राज्य पुलिस की डिजिटल पुलिसिंग के प्रति प्रतिबद्धता और सभी जिलों के जिला कप्तानों व तकनीकी टीमों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
- उत्तराखंड: 93.46 अंक
- हरियाणा: 93.41 अंक
- असम: 93.16 अंक
क्या है ICJS 2.0 और क्यों है यह महत्वपूर्ण
इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न स्तंभों—पुलिस, जेल, न्यायालय, अभियोजन (Prosecution), फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और फिंगरप्रिंट डेटा—को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रणाली को वर्ष 2026 तक पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा है। इसके माध्यम से एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य के अपराधी का रिकॉर्ड एक क्लिक पर देख सकेगी, जिससे अंतरराज्यीय अपराधों पर लगाम लगेगी। उत्तराखंड ने इस प्रक्रिया को न केवल अपनाया है, बल्कि केस डायरी, चार्जशीट और साक्ष्यों को डिजिटल स्वरूप में अपलोड करने में शत-प्रतिशत दक्षता हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
महाकुंभ में SDRF का जलवा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आईजी मीणा ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रयागराज महाकुंभ में सुरक्षा और रेस्क्यू ड्यूटी के लिए गई उत्तराखंड एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए मेडल देकर सम्मानित किया है। उत्तर प्रदेश शासन के विशेष आग्रह पर उत्तराखंड से 112 सदस्यीय दल को कमांडेंट अर्पण यदुवंशी के नेतृत्व में प्रयागराज भेजा गया था। इस दल ने 24 जनवरी से 27 फरवरी तक संगम के तट पर विषम परिस्थितियों में कार्य किया। इस दौरान टीम ने न केवल डूबते हुए श्रद्धालुओं को बचाया, बल्कि प्राथमिक उपचार और लापता व्यक्तियों को उनके परिजनों से मिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तराखंड की इस विशेषज्ञ टीम की कार्यकुशलता की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हुई है।
आधुनिक पुलिसिंग की ओर बढ़ते कदम
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीआईजी (कानून व्यवस्था) धीरेंद्र गुंज्याल, एसपी विशाखा अशोक भदाणे और कमांडेंट अर्पण यदुवंशी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड पुलिस अब तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। साक्ष्यों का डिजिटलीकरण होने से अदालती कार्यवाही में भी तेजी आएगी और अपराधियों को सजा दिलाने की दर में सुधार होगा।








