Uttarakhand : क्लेमेंट टाउन, देहरादून में आयोजित ‘फोर्टिफाइंग द हिमालयाज : ए प्रोएक्टिव मिलिट्री–सिविल–सोसाइटी फ्यूजन स्ट्रेटजी इन द मिडिल सेक्टर’ विषयक संगोष्ठी में राज्यपाल ने कहा कि भले ही मध्य सेक्टर को पारंपरिक रूप से अपेक्षाकृत शांत माना जाता रहा हो, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां निरंतर सतर्कता और पूर्व तैयारी की मांग करती हैं। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से. नि.) ने कहाकि हिमालय भौगोलिक सीमा नहीं जीवंत रणनीतिक प्रणाली है। मध्य सेक्टर शांत लगता है लेकिन ग्रे-जोन गतिविधियां सतर्कता मांग रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीमावर्ती निवासियों को देश की आंख-कान बताते हुए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को बूस्टर शॉट कहा।
राज्यपाल ने कहा कि मध्य सेक्टर (उत्तराखंड-हिमाचल सीमा) को ऐतिहासिक रूप से स्थिर माना जाता रहा है। 1962 युद्ध के बाद यहां कोई बड़ा संघर्ष नहीं लेकिन 2020 गलवान जैसी घटनाओं ने पूरे हिमालय को हाई अलर्ट पर डाल दिया। राज्यपाल ने कहा, समकालीन खतरे प्रत्यक्ष युद्ध से आगे हैं। उन्होंने कहा कि आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत-चीन एलएसी पर मध्य क्षेत्र में 350 किमी से अधिक लंबाई है। जहां ऊंचाई 15000 फुट से ज्यादा। पिछले 5 वर्षों में चीनी सेना ने 20 से अधिक ग्रे जोन अतिक्रमण किए जिसमें सड़क निर्माण प्रमुख रहे। राज्यपाल ने जोर दिया कि सुरक्षा केवल बंदूक से नही, समन्वय से भी की जाती है। सैन्य तैयारियां नागरिक सहयोग के बिना अधर में लटकेंगी।

ज्यपाल ने सीमावर्ती गांवों को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम घटक बताते हुए कहा कि स्थानीय समुदाय केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं बल्कि सीमाई सुरक्षा के सक्रिय सहभागी हैं। उन्होंने ‘वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सामाजिक आर्थिक विकास के साथ जनसंख्या स्थिरता, लॉजिस्टिक मजबूती और सीमांत क्षेत्रों में स्थायी राष्ट्रीय उपस्थिति को सुदृढ़ करता है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अवसंरचनात्मक विकास की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सड़कें, सुरंगें, पुल, हवाई संपर्क और दूरसंचार सुविधाएं परिचालन तत्परता के लिए अनिवार्य हैं। चारधाम परियोजना का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह न केवल तीर्थाटन और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाती है बल्कि रणनीतिक गतिशीलता और सुरक्षा तैयारियों को भी मजबूती देती है।
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सामुदायिक एवं अवसंरचनात्मक विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सेना, नागरिकों, सिविल प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय समय की आवश्यकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक देश की आंख और कान हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमांत गांवों के सशक्तीकरण की दिशा में ठोस कार्य हो रहा है। उन्होंने माणा गांव का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे ‘अंतिम गांव’ से ‘प्रथम गांव’ के रूप में पहचान दिलाई गई है।








