नव वर्ष के अवसर पर आयोजित पूर्व सैनिक मिलन कार्यक्रम में सीएम धामी ने कहा कि Uttarakhand सैनिकों और पूर्व सैनिकों की वीर भूमि है। राज्य सरकार उनके सम्मान, पुनर्वास एवं कल्याण के लिए निरंतर संवेदनशील एवं सक्रिय बनी हुई है। सैनिक पुत्र होने के नाते उन्होंने सेना के अनुशासन, त्याग और देशभक्ति को करीब से महसूस किया है। कार्यक्रम में पहुंचे सीएम धामी ने पूर्व सैनिकों के बीच नव वर्ष की बधाई दी और कहा कि वे सैनिकों से जुड़े हर आयोजन में शामिल होने का प्रयास करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि पीएम हर महत्वपूर्ण मौके पर सैनिकों के बीच जाते हैं। सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए पीएम ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। उनके नेतृत्व में सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण, सीमावर्ती क्षेत्रों का तीव्र विकास, आधुनिक उपकरण, आवास एवं कल्याण सुविधाओं में निरंतर वृद्धि हुई है। इससे न केवल सक्रिय सैनिकों का मनोबल बढ़ा बल्कि पूर्व सैनिक समुदाय का गौरव भी दोगुना हो गया है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि शहीद आश्रितों, पूर्व सैनिकों और सेवा निवृत्त सैन्य कर्मियों के लिए विविध कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें पेंशन सुविधाएं, चिकित्सा सहायता, रोजगार आरक्षण और शिक्षा सहायता प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे सैनिक बहुल राज्य में पूर्व सैनिकों का सम्मान सर्वोपरि है। हाल ही में राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए विशेष पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की योजना को मूर्त रूप दिया है जो देहरादून सहित विभिन्न जिलों में कार्यरत हैं।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सीएम धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए ठोस कदम उठा रही है। सीमा पर वीरगति को प्राप्त जवानों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का ऐतिहासिक निर्णय इसी सरकार ने लिया है। मंत्री जोशी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 200 से अधिक शहीद आश्रितों को नौकरी प्रदान की गई है, जो उत्तराखंड की सैनिक परंपरा को मजबूत करने का प्रमाण है। उन्होंने पूर्व सैनिकों से अपील की कि वे अपनी विशेषज्ञता से राज्य के युवाओं को प्रशिक्षित करें, ताकि नई पीढ़ी सेना में भर्ती के लिए तैयार हो। कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह (रिटा.), ब्रिगेडियर केजी बहल (रिटा.), मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (रिटा.), लेफ्टिनेंट जनरल अश्वनी कुमार (रिटा.), मेजर जनरल ओपी राणा (रिटा.), ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट (रिटा.), मेजर जनरल देवेश अग्निहोत्री (रिटा.), मेजर जनरल ओपी सोनी (रिटा.) और मेजर जनरल आनंद रावत (रिटा.) सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।








