Uttarakhand ने एक बार फिर जैव विविधता के क्षेत्र में अपनी अंतरराष्ट्रीय धाक जमाई है। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और कुमाऊं विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने राज्य में फलमक्खी की एक नई प्रजाति की खोज की है। स्टेगना मैनुटा (Stegana manuta) नामक यह प्रजाति नैनीताल के अयारपाटा क्षेत्र में पाई गई है। इस खोज के साथ ही उत्तराखंड देश में फलमक्खियों के सबसे समृद्ध गढ़ के रूप में उभर कर सामने आया है। वैज्ञानिकों के अनुसार नई प्रजाति की खोज मुख्यत: नैनीताल के अयारपाटा क्षेत्र से हुई है लेकिन इसके नमूने चमोली जिले के गोपेश्वर, मंडल क्षेत्र और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी देखे गए हैं। इस महत्वपूर्ण शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका जर्नल ऑफ इंसेक्ट बायोडायवर्सिटी एंड सिस्टमैटिक्स में प्रकाशित किया गया है जिसने इसे वैश्विक वैज्ञानिक मान्यता प्रदान की है।
उत्तराखंड में 200 से अधिक प्रजातियां
वैज्ञानिकों ने बताया कि पूरे भारत में अब तक फलमक्खी की लगभग 365 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें से 200 से अधिक प्रजातियां अकेले उत्तराखंड के वनों और पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कीट विज्ञानी प्रो. राजेन्द्र सिंह का कहना है कि उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक संरचना, ऊंचाई में भिन्नता और घने वन क्षेत्र इन प्रजातियों के फलने फूलने के लिए एक आदर्श आवास प्रदान करते हैं।

पर्यावरणीय स्वास्थ्य की सूचक है ड्रोसोफिला
ड्रोसोफिला प्रजातियां केवल साधारण कीट नहीं हैं बल्कि वे पर्यावरणीय स्वास्थ्य और जैव विविधता की महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती हैं। ये मक्खियां जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक असंतुलन के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। उनके व्यवहार और आबादी में होने वाले बदलाव से वैज्ञानिक किसी भी क्षेत्र की पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सटीक आकलन कर सकते हैं। आनुवंशिकी और विकासवाद के अध्ययन में भी इनका योगदान है।

पारंपरिक वर्गीकरण बड़ी चुनौती
इस उपलब्धि के बीच वैज्ञानिकों ने एक गंभीर चिंता भी जताई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि वर्तमान में पारंपरिक वर्गीकरण अध्ययन के प्रति नए शोधार्थियों का रुझान कम हो रहा है। पहले इसे बहुत महत्व दिया जाता था लेकिन अब वित्तीय सहयोग की कमी और पहचान के संकट के कारण नए छात्र कीटों और पौधों के वर्गीकरण से दूर हो रहे हैं।








