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    शीतकालीन चारधाम यात्रा… आध्यात्म और दर्शनीयता का संगम

    शीतकालीन चार धाम यात्रा भी उसी तरह है, जैसी मई से अक्टूबर के बीच होती है, फर्क है तो सिर्फ इतना कि सर्दियों में आप यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के शीतकालीन निवास के दर्शन करते हैं। जब चारों धामों के कपाट बंद हो जाते हैं, तब देव डोलियां अपने शीतकालीन निवास में पूजा-अर्चना पाती हैं। चारों धामों के ये शीतकालीन निवास ना सिर्फ आपको इत्मीनान से देव डोली के दर्शन करने का मौका देते हैं बल्कि यहां पहुंचकर आप कई सुंदर नजारों वाले दर्शनीय स्थल भी देख सकते हैं।
    teerandajBy teerandajJanuary 2, 2025No Comments
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    शीतकालीन चारधाम यात्रा : राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (यूएसडीएमए) के आंकड़ों के मुताबिक, यात्रा सीजन-2024 में करीब 48 लाख श्रद्धालुओं ने चार धामों के दर्शन किए। बारिश और भूस्खलन के चलते कुछ समय के लिए यात्रा बाधित रही नहीं तो यह आंकड़ा 50 लाख के पार जाने की संभावना जताई जा रही थी। क्या वजह है कि गर्मियों में चार धाम आने वाले श्रद्धालुओं के सभी रिकॉर्ड टूट जाते हैं पर सर्दियों में ये आंकड़ा कुछ हजार के पार भी नहीं जाता?

    इसकी वजह है शीतकाल में यात्रा संबंधी चुनौतियां और कम सुविधाएं। सर्दियों में भी ज्यादा से ज्यादा यात्री चार धाम की यात्रा पर आएं इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 8 दिसंबर को शीतकालीन यात्रा की पहल को आगे बढ़ाया। ऐसा नहीं है कि पहले शीतकाल में चारों धामों के दर्शन नहीं हो पाते थे। दर्शन पहले भी होते थे लेकिन अब इसे सुचारू बनाने और यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। शीतकाल में चार धाम आने वाले यात्रियों के लिए कई तरह घोषणाएं की गई हैं, जहां सर्दियों में बर्फबारी के चलते पहाड़ी इलाकों में होटलों की बुकिंग के दाम बढ़ जाते हैं, राज्य सरकार गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउसों में 25% का डिस्काउंट दे रही है।

    यह भी पढ़ें …  Fifth Schedule: हम हिमालय के ‘खस’

    आम तौर पर ये डिस्काउंट 10% का होता है लेकिन अगर आप शीतकालीन चार धाम यात्रा पर पहुंच रहे हैं तो डिस्काउंट ज्यादा दिया जा रहा है। ये छोटी ही सही लेकिन एक अच्छी पहल है। शीतकाल यात्रा के प्रचार-प्रसार पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। 8 दिसंबर से शुरू हुई यात्रा में 31 दिसंबर तक करीब 6 हजार यात्री पहुंचे हैं। इनमें से भी सबसे ज्यादा श्रद्धालु बाबा केदार के शीतकालीन निवास ऊखीमठ पहुंचे। आंकड़े अभी भले ही कम हों लेकिन शीतकाल यात्रा को लेकर जिस तरह से सरकार ने सक्रियता बढ़ाई है, उससे इसमें तेजी आने की उम्मीद है।

    श्रद्धा के साथ रोजगार का भी सवाल
    शीतकालीन चार धाम यात्रा को प्रमोट और बूस्ट करने की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि ये रोजगार से भी जुड़ता है। दरअसल चार धाम यात्रा के भरोसे जीवनयापन करने वाले ज्यादातर लोग सर्दियों में या तो बेरोजगार रहते हैं या शहरों का रुख करते हैं। 6 महीने ये लोग शहरों में वैकल्पिक नौकरी करते हैं। फिर यात्रा शुरू होने पर वापस आ जाते हैं। इस तरह इनकी जीवनचर्या में 6 महीने यात्रा और 6 महीने शहरों में छोटा-मोटा रोजगार शामिल होता है। अगर शीतकालीन यात्रा में श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या आती है तो इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के मौके बढ़ेंगे। स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और जब रोजगार-स्वरोजगार बढ़ेगा तो उसका सीधा फायदा राज्य की अर्थव्यवस्था को होगा। ऐसे में उत्तराखंड सरकार की तरफ से शीतकालीन चार धाम यात्रा को बढ़ावा देने की कोशिश सराहनीय है।

    शीतकालीन चार धाम क्यों आएं?
    वैसे तो शीतकालीन यात्रा पर आने की सबसे बड़ी वजह चारों धामों के दर्शन करना है। लेकिन सर्दियों का मौसम आपको और भी फायदे देता है। दरअसल जिन-जिन इलाकों में शीतकालीन चार धाम बसे हुए हैं, वहां अधिकतर में बर्फबारी भी होती है। यानी कि आप बर्फबारी का आनंद ले सकते हैं। जहां गर्मियों की चार धाम यात्रा में आपको 16 किलोमीटर तक का पैदल सफर करना पड़ता है, वहीं शीतकालीन चार धाम में बहुत ही कम चलना पड़ता है,क्योंकि ज्यादातर शीतकालीन धाम सड़कों से जुड़े हुए हैं। सर्दियों में जब आप चारों धामों के शीतकालीन निवास के दर्शन करने आते हैं तो आपको भीड़ बहुत ज्यादा नहीं मिलती। दूसरा, आप चारों धामों के दर्शन के साथ कई और दर्शनीय स्थल भी देख पाते हैं।

    शीतकाल में कम यात्री क्यों?
    एक सवाल उठता है कि जिस तरह की भीड़ ग्रीष्मकालीन यात्रा में नजर आती है, उसका एक फीसदी भी शीतकालीन में नहीं दिखती। शीतकालीन धामों से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस तरह की तैयारियां ग्रीष्मकालीन चार धाम यात्रा के लिए की जाती है, उसी तरह के इंतजाम शीतकाल में नहीं होते। विशेष इंतजामों की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि शीतकाल में मौसम से जुड़ी कई चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दौरान सड़कों का चौड़ीकरण और दूसरे काम भी बड़ी संख्या में किए जाते हैं, इनकी वजह से भी कई चुनौतियां खड़ी होती हैं। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल सरकार की इस पहल से खुश हैं। वह कहते हैं कि मुखबा हो चाहे दूसरे शीतकालीन निवास, हर जगह श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम और सीमित है। अगर विंटर सीजन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ानी है तो हमें इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना होगा और सड़कों में सुधार पर तेजी से काम करना होगा।

    एक और वजह जो कम श्रद्धालुओं के आने के लिए गिनाई जाती है, वो है प्रमोशन। कुछ लोगों का मानना है कि जिस तरह ग्रीष्मकालीन में चार धाम यात्रा के लिए प्रचार-प्रसार और व्यवस्था की जाती है, उस तरह शीतकालीन चार धाम यात्रा के लिए नहीं होते। यही वजह है कि अब सरकार ने इस सूरत को बदलने की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बार शीतकालीन चार धाम यात्रा के प्रमोशन और सुचारू व्यवस्था के लिए शासन-प्रशासन को विशेष निर्देश दिए हैं। अब जब सरकार का फोकस शीतकाल में ज्यादा से ज्यादा तीर्थयात्रियों को लाने पर है तो पूरी उम्मीद है कि धीरे-धीरे ही सही, चारों धामों के शीतकालीन प्रवास पर श्रद्धालुओं की आमद जरूर बढ़ेगी।

     

    चारधाम यात्रा शीतकालीन चारधाम यात्रा
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