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    Home»उत्तराखंड 360»नजीर बन रहा उत्तराखंड का पहला Waste To Energy Plant, रोज 2.5 मेगावाट बिजली का उत्पादन
    उत्तराखंड 360

    नजीर बन रहा उत्तराखंड का पहला Waste To Energy Plant, रोज 2.5 मेगावाट बिजली का उत्पादन

    प्लांट में रोजाना काशीपुर व रुद्रपुर क्षेत्र का 100 टन कूड़ा निस्तारित किया जा रहा है। औद्योगिक कूड़े से बड़ी राहत मिली है। प्रदेश में बिजली उत्पादन में यह नया प्रयोग है।
    teerandajBy teerandajAugust 11, 2024Updated:August 11, 2024No Comments
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    Waste To Energy Plant In Uttarakhand : देश के बड़े शहरों में कूड़ा निस्तारण में निगम हांफ रहे हैं। कूड़ों का पहाड़ वहां के लोगों का जीना हराम कर दिया है। दिल्ली में तो यह मुद्दा चुनावों में जोरशोर से उठता है। अध्यात्म की राह दिखाने वाला उत्तराखंड इस मामले में भी नजीर पेश कर रहा है। दिल्ली समेत बड़े शहर वाले यहां से बहुत कुछ सीख सकते हैं। उत्तराखंड के काशीपुर में लगे प्रदेश के पहले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में रोजाना 100 टन कूड़ा निस्तारित किया जा रहा है। इससे 2.5 मेगावाट बिजली तैयार हो रही है।
    फरवरी में इस प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया था। तब से इस प्लांट में रोजाना काशीपुर व रुद्रपुर क्षेत्र का 100 टन कूड़ा निस्तारित किया जा रहा है। इसके साथ ही बहल पेपर मिल में 2.5 मेगावाट बिजली रोज तैयार की जा रही है।

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    प्रदेश का यह पहला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू होने के बाद कंपनी बिजली के मामले में आत्मनिर्भर भी हो चुकी है। इस वजह से औद्योगिक कूड़े से बड़ी राहत मिली है। प्रदेश में बिजली उत्पादन में यह नया प्रयोग है। काशीपुर ही नहीं, पूरे तराई क्षेत्र के उद्योगों एवं नगर निकायों के कूड़े का प्रबंधन करने की क्षमता इस प्लांट में है। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि पूरे उत्तराखंड के पालीथिन कचरे का एक तिहाई कूड़ा प्रबंधन इस बायलर में किया जा सकता है। फरवरी से अब तक रुद्रपुर व काशीपुर नगर निगम का 16 हजार टन कूड़े का निस्तारण कर बिजली बनाई जा चुकी है।
    निकायों में रोज 900 टन कूड़ा निकलता है
    सरकार के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश के निकायों में हर दिन 900 टन कूड़ा निकलता है। इसमें करीब 50 प्रतिशत आर्गेनिक वेस्ट है। 11 प्रतिशत बायोमेडिकल वेस्ट है और 21 प्रतिशत इनर्ट कूड़ा (रेत, कंक्रीट आदि) है। इसके अलावा 140 फीसदी कूड़ा ऐसा होता है, जिसे उठाया ही नहीं जाता। यह सड़क, नालों व अन्य स्थानों पर पड़ा रहता है। योजना है कि इसी कूड़े का इस्तेमाल कर वेस्ट एनर्जी प्लांट के जरिए ग्रीन एनर्जी प्राप्त की जाएगी।

    ग्रीन एनर्जी प्राप्त की जाएगी
    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बहल पेपर मिल के एमडी नवीन झांजी का कहना है कि शुरुआती चरण में काशीपुर व पंतनगर क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ा जा रहा है। कंपनियों से निकलने वाली पालीथिन व अन्य वेस्ट प्रोडक्ट को यहां लाया जाएगा। इसके साथ ही काशीपुर नगर निगम को भी इससे जोड़ लिया गया है।

    काशीपुर व रुद्रपुर के कूड़े के पहाड़ से मिली मुक्ति
    दिल्ली की तरह काशीपुर व रुद्रपुर में भी पिछले साल तक कूड़े का पहाड़ दिखाई देता था। अब इस प्लांट के शुरू होने के बाद इससे मुक्ति मिली है। स्थानीय निवासी इससे काफी खुश भी हैं। मीडिया से बातचीत में काशीपुर के नगर आयुक्त विवेक राय बताते हैं कि मई और जून में हमने 50 हजार मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण किया है। इसमें से आठ हजार मीट्रिक टन आरडीएफ कूड़ा बहल पेपर मिल को दिया गया है। पहले ट्रांसपोर्ट लगाकर इसे मुज्जफरनगर भेजते थे। वहीं रुद्रपुर नगर निगम से भी बहल पेपर ने आठ हजार मीट्रिक टन कूड़ा उठाया है।

    रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल
    प्लांट के डायरेक्टर राज भंडारी ने मीडिया से कहा कि प्रोजेक्ट सीएम के सफल निर्देशन में संभव हो सका है। एमडी नवीन झांजी बताते हैं कि रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल की अवधारणा को पूरा करने का प्रयास किया गया है। राज्य सरकार का इसमें विशेष योगदान है। आने वाले समय में यह नजीर बनेगा। आने वाले समय में काशीपुर व अन्य क्षेत्रों में प्लांट अपने बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के क्षेत्रीय अधिकारी मीडिया से बातचीत में कहते हैं, पिछले एक साल में प्रोजेक्ट को लेकर बेहतर कार्य हुए हैं काशीपुर व रुद्रपुर में काफी हद तक कूड़ा निस्तारण से राहत मिली है। वहीं ग्रीन एनर्जी के रूप में कंपनी आत्मनिर्भर बनी है। इससे अन्य कंपनियों को आत्मनिर्भर बनने का प्रेरणा मिल सकेगी।

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