आम भारतीय परिवारों में जो महिलाएं सोने का आभूषण नहीं पहन पाती हैं वह भी चांदी के छोटे-मोटे आभूषण जरूर पहनती हैं। मगर पिछले कुछ महीने में चांदी में आई तेजी ने इसे आम आदमी की पहुंच से दूर कर दिया है। एक दिन में 15 हजार की उछाल से लोग दंग हैं। जिनके घरों में शादी है वह तो परेशान घूम रहे हैं। कहा जा रहा है कि दुनिया के निवेशकों की पहली पसंद चांदी बनी हुई है। इसलिए दाम इतनी तेजी से भाग रहे हैं। अन्य कारण भी हैं। लेकिन, प्रमुख इसे ही बताया जा रहा है। सोमवार को चांदी में एक ही दिन में 15000 प्रति किलोग्राम का बड़ी तेजी दर्ज हुई और यह भाव 265000 के करीब पहुंच गया। उसी दिन सोना 2900 प्रति 10 ग्राम की बढ़त के साथ 144,600 तक पहुंचा जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। इस उछाल ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर फिर से आकर्षित कर दिया है।

देशी बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी का रुझान मजबूती की ओर रहा है। वैश्विक स्तर पर सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया और चांदी भी 80 डॉलर से ऊपर ट्रेड कर रही है। इस तरह के रिकॉर्ड स्तर वैश्विक वित्तीय अस्थिरता और निवेशकों के जोखिम से बचने के रुख को दर्शाते हैं। सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है कि यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के संकेत और आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बीच निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर भाग रहे हैं। कम ब्याज दरें सोने और चांदी जैसे गैर-उत्पादक संपत्तियों को अधिक आकर्षक बनाती हैं, जिससे उनकी कीमतों में तेजी आती है।
चांदी क्यों भाग रही?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतें सिर्फ निवेश मांग से नहीं बल्कि उद्योगिक मांग में भी वृद्धि से प्रभावित हो रही हैं। चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनलों और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे सेक्टरों में तेजी से बढ़ रहा है। इससे मांग सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी रहती है जो सप्लाई की तुलना में अधिक है। इसके अलावा, 2025 में चांदी की कीमतें पहले से ही साल भर में लगभग 120% तक उछल चुकी हैं। यह दर्शाता है कि सख्त मांग-सप्लाई संतुलन इस रैली को सपोर्ट कर रहा है।
वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक कारण
फेड के फैसलों के अलावा, वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताएं भी इन धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। बड़े देशों के बीच व्यापार तनाव, संघर्ष और मुद्रास्फीति की चिंता ने निवेशकों को सुरक्षित आश्रयों की ओर धकेला है। उदाहरण के लिए अमेरिका-चीन ट्रेड तनाव और मध्य-पूर्व की राजनीतिक स्थिति ने जोखिम से बचने वाले निवेश को प्रेरित किया है। सरकारों और केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद भी एक महत्वपूर्ण कारक रही है। कई केंद्रीय बैंक निवेश-युक्त रिज़र्व को विविधता प्रदान करने के लिए सोने की खरीद में तेजी ला रहे हैं जिससे कीमतों में और मजबूती आई है।

तेजी के प्रमुख कारण
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका समेत कई देशों में ब्याज दरों में संभावित कटौती, डॉलर में कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ा है। शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ने के साथ ही सोना-चांदी की मांग में इजाफा हुआ है। इसके अलावा सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में बढ़ती खपत के कारण चांदी की औद्योगिक मांग भी लगातार मजबूत बनी हुई है।
क्या यह तेजी टिकाऊ है?
बाजार विशेषज्ञों की राय में मौजूदा तेजी के पीछे मजबूत फंडामेंटल फैक्टर हैं, इसलिए इसमें पूरी तरह से गिरावट की संभावना फिलहाल कम है। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली से थोड़ी बहुत नरमी जरूर आ सकती है। लंबी अवधि में सोना मुद्रास्फीति से बचाव का जरिया बना रहेगा जबकि चांदी में अधिक उतार-चढ़ाव के बावजूद बेहतर रिटर्न की संभावना जताई जा रही है।








