उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों नौनिहालों की गणित विषय में कमजोरी अब इतिहास बनने वाली है। नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के अनुरूप राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (एससीएफ) लागू करते हुए एससीईआरटी ने कक्षा तीन से पांच तक गणित के लिए सालाना 185 शिक्षण घंटे अनिवार्य कर दिए हैं। यह पहल छात्रों की तार्किक क्षमता और बुनियादी गणितीय समझ को मजबूत बनाने पर केंद्रित है। प्रदेश भर के प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक साढ़े तीन लाख छात्र-छात्राएं इससे सीधे प्रभावित होंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल गणित के प्रति रुचि बढ़ेगी बल्कि समग्र शैक्षणिक गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि एनईपी-2020 की यह व्यवस्था बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। प्राथमिक स्तर (कक्षा 3-5) पर कुल छह विषय पढ़ाए जाएंगे। इनमें तीन भाषाएं (370 घंटे), गणित (185 घंटे), हमारे चारों ओर का संसार (200 घंटे), कला शिक्षा (100 घंटे) और शारीरिक शिक्षा (100 घंटे) शामिल हैं। भाषाओं को सर्वाधिक समय देकर संवाद कौशल मजबूत किया जाएगा जबकि गणित पर विशेष फोकस से समस्या समाधान क्षमता विकसित होगी। शैक्षणिक सत्र की संरचना भी तय कर दी गई है, कुल 240 कार्य दिवस। इनमें 200 दिन शुद्ध शिक्षण के लिए, 20 दिन परीक्षा व आकलन के लिए, 10 दिन बैगलेस (बस्तारहित) गतिविधियों के लिए और शेष 10 दिन विद्यालयी कार्यक्रमों व अभिभावक बैठक के लिए आरक्षित हैं।
मिडल या उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8) पर अध्ययन का दायरा बढ़ाकर नौ विषय अनिवार्य किए गए हैं। इसमें तीन भाषाएं, गणित (115 घंटे), विज्ञान (160 घंटे), सामाजिक विज्ञान (160 घंटे), कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा शामिल हैं। व्यावसायिक शिक्षा का समावेश छात्रों को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने का प्रयास है। सेकेंडरी स्तर (कक्षा 9-12) में 10 विषयों पर जोर दिया गया है, जिसमें अंतर-विषयक अध्ययन को प्राथमिकता मिलेगी। यहां भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान के साथ कला, शारीरिक एवं व्यावसायिक शिक्षा के घंटे संतुलित रखे गए हैं।

एससीईआरटी की यह रूपरेखा पाठ्यभार को बोझिल होने से बचाते हुए सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मत है कि गणित पर बढ़े घंटों से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को विशेष लाभ मिलेगा जहां बुनियादी अंकगणित में कमी आम समस्या रही है। राज्य के 15 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं। अभिभावक संगठनों ने स्वागत किया है लेकिन शिक्षक भर्ती व संसाधन उपलब्धता पर सवाल उठाए हैं। शिक्षा मंत्री का कहना है कि अगले सत्र से पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। यह कदम उत्तराखंड को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
विषयवार विस्तृत ब्योरा
प्राथमिक स्तर : कक्षा 3-5
भाषा-515 पीरियड, गणित-277 पीरियड, हमारे चारों ओर का संसार-300 पीरियड, कला शिक्षा-150 पीरियड, शारीरिक शिक्षा-150 पीरियड।
मिडल स्तर : कक्षा 6-9
भाषाएं-315 पीरियड, गणित-172 पीरियड, विज्ञान-240 पीरियड, सामाजिक विज्ञान-240 पीरियड, कला-शारीरिक-व्यावसायिक शिक्षा-150-150-150 पीरियड।
सेकेंडरी स्तर : कक्षा 10-12
भाषाएं-252 पीरियड, गणित-324 पीरियड, विज्ञान-324 पीरियड, सामाजिक व अंतर-विषयक अध्ययन-300 पीरियड, कला शिक्षा-138 पीरियड, शारीरिक शिक्षा-108 पीरियड, व्यावसायिक शिक्षा-132 पीरियड।
एससीईआरटी की निदेशक डॉ. बंदना गर्ब्याल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पाठ्यचर्या रूपरेखा का सफल अमल शिक्षकों की जिम्मेदारी है। इसे हर विद्यालय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। इससे पाठ्यभार संतुलित होगा और छात्रों की सीखने की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। उत्तराखंड में 2026 के शिक्षा एक्शन प्लान के तहत यह व्यवस्था पूर्ण रूप से लागू हो रही है जिसमें व्यावसायिक शिक्षा व डिजिटल साक्षरता पर अतिरिक्त बल दिया जा रहा है।








