शीतकालीन यात्रा : बदरीनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा और आध्यात्मिक वातावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में प्रशासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब बदरीनाथ मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार यानी सिंहद्वार से आगे श्रद्धालु मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे। यह फैसला मंदिरों में रील बनाने और ब्लॉगिंग के कारण उत्पन्न होने वाले विवादों और मंदिर की पवित्रता पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए लिया गया है।
रील और विवादों पर लगाम की तैयारी
शनिवार को ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में चारधाम यात्रा की तैयारियों और शीतकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे और आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप के साथ-साथ पौड़ी, टिहरी, चमोली, हरिद्वार, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान मौजूद रहे। बैठक के दौरान आयुक्त ने इस बात पर चिंता जताई कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर परिसर के भीतर रील बनाने और ब्लॉगिंग करने से न केवल व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं बल्कि कई बार धार्मिक मान्यताओं को लेकर विवाद भी खड़े हो रहे हैं। उन्होंने चमोली जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं के मोबाइल सुरक्षित जमा करने के लिए सिंहद्वार के पास क्लॉक रूम और काउंटरों की समुचित व्यवस्था तत्काल बनाई जाए।
शीतकालीन यात्रा में उमड़ रही भीड़
बैठक में शीतकालीन यात्रा के आंकड़ों पर भी चर्चा की गई। कपाट बंद होने के बाद चारों धामों के शीतकालीन प्रवास स्थलों पर अब तक 27 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन औसतन 500 से अधिक यात्री इन स्थलों पर पहुंच रहे हैं।
- केदारनाथ के शीतकालीन प्रवास स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में सबसे अधिक 17 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका।
- बदरीनाथ धाम के शीतकालीन पूजा स्थलों—पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर, जोशीमठ में अब तक 6400 श्रद्धालु पहुंचे हैं।
- गंगोत्री के प्रवास स्थल मुखवा में 3300 और यमुनोत्री के प्रवास स्थल खरसाली में 1017 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
बारहमासी पर्यटन पर सरकार का जोर
गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रदेश में बारहमासी पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जो श्रद्धालु भीड़ या अन्य कारणों से मुख्य यात्रा सीजन में नहीं पहुंच पाते, उनके लिए शीतकालीन प्रवास स्थलों पर दर्शन की सुगम व्यवस्था की जा रही है। पर्यटन विभाग को इन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को गति मिल सके।सुरक्षा और सुविधा प्राथमिकता
आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग पर यातायात प्रबंधन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहें। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि मंदिर परिसर की मर्यादा भंग करने वालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाए साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सामान्य श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।








