पिथौरागढ़ जनपद के मुनस्यारी क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध रालम ग्लेशियर तक पहुंचना अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा। राज्य सरकार ने रालम गांव में हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हेलिपैड निर्माण की योजना को स्वीकृति मिल चुकी है जिससे ट्रेकर्स, पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होने के बाद रालम तक पहुंचने के लिए 40 किलोमीटर से अधिक का कठिन पैदल सफर तय नहीं करना पड़ेगा।
अब तक रालम ग्लेशियर जाने वाले ट्रैकर्स और पर्यटकों को मुनस्यारी से बुगडियार, मार्तोली होते हुए करीब 15 किलोमीटर कच्चे मार्ग और लगभग 25 किलोमीटर पैदल ट्रेक करना पड़ता था। यह यात्रा अत्यंत दुर्गम होने के कारण समयसाध्य और जोखिम भरी मानी जाती है। हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में ट्रैकर्स प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालयी रोमांच के लिए रालम पहुंचते हैं, लेकिन सीमित संसाधनों और कठिन रास्तों के कारण कई लोग बीच में ही लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
हेलिपैड निर्माण पर 80.06 लाख रुपये की लागत
ग्रामीण निर्माण विभाग द्वारा रालम गांव में हेलिपैड निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस पर लगभग 80.06 लाख रुपये की धनराशि खर्च होगी। हेलिपैड बनने से न केवल पर्यटकों के लिए आवागमन सुगम होगा बल्कि क्षेत्र की एयर कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
बीमारों और आपात स्थितियों में मिलेगा बड़ा लाभ

रालम गांव में 500 से अधिक की आबादी निवास करती है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित होने के कारण गंभीर बीमारियों और आपात स्थितियों में मरीजों को मुनस्यारी या जिला मुख्यालय तक ले जाना बेहद कठिन होता है। कई बार मरीजों को स्ट्रेचर पर घंटों पैदल ढोना पड़ता है। हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होने से आपातकालीन चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध हो सकेगी, जिससे जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण
रालम गांव चीन सीमा के नजदीक स्थित है। ऐसे में हेलिपैड का निर्माण सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आपदा, सुरक्षा और सीमाई निगरानी के लिहाज से एयर कनेक्टिविटी से प्रशासन को त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
हेलिकॉप्टर सेवा से रालम ग्लेशियर, मार्तोली और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। इससे होम-स्टे, गाइड, पोर्टर और स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा। प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना सीमांत क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।








