Uttarakhand सरकार की ओर से संचालित जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान प्रदेश में सुशासन, त्वरित सेवा-प्रदान और जनसमस्याओं के समाधान का सशक्त मॉडल बनकर उभरा है। सरकार और आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने वाला यह कार्यक्रम शासन को वास्तविक अर्थों में जन-केंद्रित बना रहा है। 20 जनवरी 2026 तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 408 जनसेवा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं।
केवल सोमवार को ही 13 नए शिविरों का आयोजन कर सरकार ने अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। इन शिविरों में अब तक 330461 नागरिकों ने सहभागिता की है, जिनमें 7876 नागरिक केवल एक दिन में शामिल हुए। यह आंकड़ा अभियान के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। शिविरों के माध्यम से अब तक 33529 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22675 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। सोमवार को ही 783 नए प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जबकि 502 मामलों का समाधान मौके पर अथवा संबंधित विभागों के माध्यम से सुनिश्चित किया गया। यह त्वरित निस्तारण सरकार की प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का प्रमाण माना जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रमाण-पत्रों और शासकीय सेवाओं के लिए अब तक 43975 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें 659 आवेदन केवल सोमवार को दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत अब तक 179169 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया जा चुका है, जिनमें 3911 नए लाभार्थी एक ही दिन में जुड़े। जनपदवार आंकड़ों के अनुसार देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर सहित पर्वतीय जिलों में भी अभियान को समान उत्साह के साथ अपनाया गया है। शिविरों में बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति यह स्पष्ट करती है कि यह पहल जमीनी जरूरतों से सीधे जुड़ी हुई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं जनता तक पहुंचती है, तो शासन के प्रति विश्वास और सहभागिता स्वतः मजबूत होती है। यह अभियान उत्तराखंड में सुशासन की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है, जिसमें संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।








