Uttarakhand Cabinet Decisions : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के भविष्य को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। इस बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु राज्य की नई हाइड्रोजन नीति 2026 रही, जिसे सरकार ने औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस नीति के माध्यम से प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा और इस क्षेत्र में आने वाले निवेश पर दी जाने वाली सब्सिडी का निर्धारण मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति करेगी। यह कदम उत्तराखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
बैठक में राजस्व और जल प्रबंधन को लेकर भी कड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। सरकार ने अब औद्योगिक इकाइयों और बड़ी आवासीय सोसायटियों द्वारा किए जाने वाले व्यावसायिक भूजल के इस्तेमाल पर जल मूल्य प्रभार लगाने का निर्णय लिया है, हालांकि कृषि कार्यों को इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। भूमि खरीद की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कैबिनेट ने अब भूमि अधिग्रहण की जटिलता के बजाय सीधे मालिकों से आपसी समझौते के आधार पर जमीन खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसके अतिरिक्त, सिडकुल को हस्तांतरित की गई पराग फार्म की जमीन के मामले में स्पष्ट किया गया है कि सिडकुल इस जमीन को बेच या पट्टे पर नहीं दे सकेगा, बल्कि केवल ‘सब लीज’ की अनुमति होगी।
सामाजिक और बुनियादी ढांचे के विकास को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टी के संयुक्त संचालन के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ हाथ मिलाने पर सहमति जताई है। स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करते हुए अब पांच साल की सेवा पूरी करने वाले कार्यकर्ताओं को आपसी सहमति से जनपद तबादले की सुविधा दी गई है। शिक्षा के क्षेत्र में जीआरडी उत्तराखंड विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव बजट सत्र में लाने की तैयारी है। इसके अलावा, जनजाति कल्याण के लिए देहरादून और उधमसिंह नगर सहित चार जिलों में नए जिला जनजातीय कल्याण अधिकारियों के पद सृजित किए गए हैं।
कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णय
- चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखंड के ऐसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता / स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, जिन्होंने अपने मूल संवर्ग में न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली हो, को सम्पूर्ण सेवाकाल में एक बार म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग के आधार पर जनपद परिवर्तन करने की अनुमति प्रदान की जाएगा। जिसपर कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।
- उत्तराखंड राज्य में आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से लघु/मध्यम/ वृहद् परियोजनाओं के लिए भूमि की प्राप्ति किए जाने की प्रक्रिया का निर्धारण के संबंध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।
- भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की सुसंगत धाराओं की प्रक्रियान्तर्गत भूमि अर्जन के लिए लगने वाले अत्याधिक समय एवं सीधे भूमि कय करने की व्यवस्था को प्रोत्साहित किये के उद्देश्य से राज्य परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों से लघु/मध्यम/ वृहद् परियोजनाओं हेतु भूमि की प्राप्ति किए जाने के लिए प्रक्रिया प्रस्तावित की है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से भूमि प्राप्त किये जाने की दशा में मुकदमेबाजी जैसे मामलों में कमी आएगी तथा लोक जनहित की परियोजनाओं की लागत भी कम होगी।
- जनपद उधमसिंहनगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान विकसित किए जाने के लिए सिडकुल (औद्योगिक विकास विभाग) को हस्तान्तरित किये जाने के संबंध में निर्गत शासनादेश संख्याः-670/ दिनांकः 25 मार्च, 2025 में संशोधन करने के संबंध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।
- जनपद उधमसिंहनगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान विकसित किए जाने के लिए सिडकुल (औद्योगिक विकास विभाग) को हस्तान्तरित की गई है, शासनादेश की शर्त संख्या-च में प्रश्नगत भूमि को किसी व्यक्ति एवं संस्थान या संगठन को बेचने/ पट्टे पर देने अथवा किसी अन्य प्रकार से हस्तान्तरित करने का अधिकार पट्टेदार को नहीं होगा। भूमि का उपयोग आवंटन के दिनांक से 03 वर्ष की अवधि में पूर्ण कर लेना अनिवार्य होगा अन्यथा आवंटन स्वतः निरस्त समझा जायेगा।
- परन्तु औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से राजस्व विभाग की सहमति से पट्टे पर आवंटित भूमि को समान प्रयोजन हेतु उप पट्टा करने का अधिकार पट्टेदार को होगा। पर कैबिनेट ने अपनी मंजूरी प्रदान की है।
- जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं का संचालन किये जाने के उद्देश्य से अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जनपद क्रमशः देहरादून, चमोली, ऊधमसिंहनगर एवं पिथौरागढ़ में विभागीय योजनाओं के संचालन / प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पदों की आवश्यकता के दृष्टिगत विभागीय ढांचें को पुर्नगठित करते हुए उक्त जनपदों में 4 जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद शासनादेश सख्या-120, दिनांक 28.02.2025 के माध्यम से सृजित किये गये है। ढांचे में स्वीकृत पदों का प्राविधान सेवा नियमावली में किए जाने के उद्देश्य से उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 प्रख्यापित किये जाने के संबंध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

- उत्तराखंड राज्य में गैर कृषिकारी (कृषि एवं कृषि संबंधित कार्यों तथा राजकीय पेयजल व्यवस्था को छोड़कर) उपयोग के लिए भू-जल के निकास पर जल मूल्य/प्रभार की दरें (जो तत्काल से लागू होगी) लागू किये जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।
- राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने, शू-जल विकास एवं प्रबन्धन को विनियमित किये जाने तथा भू-जल के अनियन्त्रित दोहन को सीमित करने के उद्देश्य से औद्योगिक इकाईयों एवं अन्य व्यवसायिक उपयोग यथा रेजीडेंशियल अपार्टमेंट / ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, होटल, वॉटर एमयूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई सैन्टर, स्वीमिंग पूल इत्यादि हेतु सुरक्षित क्षेत्र, अर्ध गम्भीर क्षेत्र, गम्भीर क्षेत्र एवं अतिदोहित क्षेत्र की जल मूल्य/प्रभार की दरों लागू किए जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है। वाणिज्यक, औद्यौगिक, अवसंरचनात्मक और रेजीडेंशियल अपार्टमेन्ट्स/ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के लिए पंजीकरण शुल्क 5000/- देय होगा।
- राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्रों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा यह विनिश्चय किया गया है कि जनपद देहरादून में “जी.आर.डी. उत्तराखंड विश्वविद्यालय” नाम से निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति कैबिनेट ने प्रदान की है। उक्त विश्वविद्यालय का लक्ष्य शिक्षा का अभिनवीकरण, अध्यापन और ज्ञानोपार्जन की नवीन पद्धति के लिए और व्यक्तित्व के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करना, सामाजिक व आर्थिक रूप से वंचित वर्ग को शिक्षा प्रदान करना, राज्य विषयक शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना तथा रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराना है।
- उत्तराखंड राज्य के जनपद उत्तरकाशी स्थित चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी एवं चमोली स्थित गौचर हवाई पट्टी को भारतीय वायु सेना, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार व उत्तराखंड सरकार के मध्य उच्च स्तरीय बैठकों में सहमति के आधार पर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हवाई पट्टियों को संयुक्त रूप से नागरिक व सैन्य संचालन के उद्देश्य से एडवांस लैंडिंग ग्राउण्ड (ए०एल०जी०) लीज के आधार पर रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को हस्तान्तरित किये जाने पर कैबिनेट ने प्रदान की सहमति।








