Uttarakhand : शासन केवल सचिवालयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी मूलमंत्र के साथ जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार अभियान का संचालन किया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक प्रदेशभर में 604 जनसेवा शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। जिनमें 474285 से अधिक नागरिकों की सहभागिता दर्ज की गई है। अभियान के अंतर्गत मंगलवार को आयोजित सात जनसेवा शिविरों में 5507 नागरिकों ने भाग लिया और विभिन्न विभागीय सेवाओं का लाभ उठाया। प्रशासन के अनुसार शिविरों में बड़ी संख्या में मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया जबकि शेष प्रकरणों को संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के लिए अग्रेषित किया गया है।
शिविरों के माध्यम से राजस्व, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम, पेंशन, प्रमाण-पत्र निर्गमन और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अधिकारियों की मौजूदगी में आवेदन स्वीकार करने और समस्याओं के समाधान से नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में आयोजित शिविरों से प्रशासनिक पहुंच का विस्तार हुआ है। इन इलाकों में पहले सेवाओं के लिए जिला मुख्यालयों पर निर्भरता रहती थी लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे समय और संसाधनों की बचत के साथ-साथ शिकायत निवारण प्रक्रिया में तेजी आई है।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिविरों के माध्यम से प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अभियान से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा करते हुए इसे और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। प्रशासनिक स्तर पर जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान को फील्ड-आधारित गवर्नेंस मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि अभियान को आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को सरकारी सेवाएं उनके घर के नजदीक उपलब्ध कराई जा सकें।








