शनिवार की सुबह जब सूरज की पहली किरणें तेहरान के आसमान पर चमक रही थीं, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ घंटे ईरान के आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े पावर वैक्यूम का गवाह बनने वाले हैं। एक बेहद गुप्त और सटीक सैन्य ऑपरेशन में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके शीर्ष सैन्य सिपहसालारों को उनके सबसे सुरक्षित गढ़ में मार गिराया गया। यह सिर्फ एक हमला नहीं था। इसमें महीनों की मेहनत थी। महीनों निगरानी रखी गई। एक एक खुफिया जानकारी इकट्ठी की गई।
ईरान पर हमले के बाद अमेरिका की ओर से जो जानकारी दी जा रही है उसके मुताबिक, पूरे ऑपरेशन की नींव महीनों पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने रख दी थी। सीआईए ने खामेनेई के दैनिक पैटर्न, उनके संवाद करने के तरीकों और संकट के समय उनकी आवाजाही पर हाई फिडेलिटी (पूरी तरह सटीक) नजर रखी थी। अमेरिकी खुफिया सूत्रों के अनुसार, पिछले साल के 12 दिनों के युद्ध के दौरान ईरान के शीर्ष नेतृत्व के व्यवहार का विश्लेषण किया गया था। इसी डेटा के आधार पर सीआईए को यह पुख्ता जानकारी मिली कि तेहरान के एक खास सरकारी परिसर में शनिवार सुबह एक उच्च स्तरीय गुप्त बैठक होने वाली है। मूल योजना के मुताबिक, अमेरिका और इस्राइल रात के अंधेरे में हमला करने वाले थे। लेकिन ऐन वक्त पर मोसाद और सीआईए को खबर मिली कि बैठक का समय बदलकर शनिवार सुबह कर दिया गया है।
ईरान की रणनीतिक चूक
ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय, सर्वोच्च नेता का दफ्तर और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद तीनों एक ही परिसर में स्थित हैं। इस कारण एक तीर से कई शिकार हो गए। इस्राइली नेतृत्व ने महसूस किया कि अगर हमला सुबह किया जाए तो न केवल खामेनेई बल्कि ईरान की पूरी सैन्य और खुफिया मशीनरी का सिर एक साथ कलम किया जा सकता है।
ऑपरेशन की शुरुआत: 125 मिनट का डेथ वॉच
इस्राइली समयानुसार सुबह 6:00 बजे लंबी दूरी की सटीक मिसाइलों से लैस लड़ाकू विमानों ने अपने गुप्त ठिकानों से उड़ान भरी। ठीक दो घंटे पांच मिनट बाद यानी तेहरान के समय सुबह 9:40 बजे आसमान से मौत बरसना शुरू हुई। चश्मदीदों के मुताबिक, धमाके इतने शक्तिशाली थे कि पूरा तेहरान थर्रा उठा। धुआं छंटने तक वह परिसर मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका था जिसे ईरान का सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता था। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, जिस वक्त हमला हुआ, खामेनेई मुख्य बैठक वाली इमारत से चंद मीटर दूर एक अलग बिल्डिंग में थे। इस्राइली पायलटों ने कोई जोखिम नहीं लिया और उस पूरे ब्लॉक पर लगभग 30 गाइडेड बम गिराए।
86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई जिन्होंने 1989 से ईरान की सत्ता को अपनी मुट्ठी में रखा था इस भीषण हमले में मारे गए। खामेनेई के साथ-साथ ईरान की सुरक्षा के चार स्तंभ भी इस हमले की भेंट चढ़ गए। बताया जा रहा है कि हमले में खामेनेई के अलावा मोहम्मद पाकपुर: IRGC के कमांडर-इन-चीफ, रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह, अली शमखानी सैन्य परिषद के प्रमुख और सैयद माजिद मौसावी IRGC एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर मारे गए। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने रविवार को आधिकारिक तौर पर इन मौतों की पुष्टि की।

ईरान की वो ऐतिहासिक भूल
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने टैक्टिकल सरप्राइज की क्षमता को कम आंका। युद्ध जैसी स्थितियों के बावजूद, इतने सारे वीवीआईपी नेताओं का एक ही स्थान पर जमा होना एक आत्मघाती रणनीतिक भूल साबित हुई। खामेनेई ने शायद सोचा था कि समय बदलने से वे खुफिया एजेंसियों को चकमा दे देंगे लेकिन आधुनिक तकनीक और गहरी पैठ वाली जासूसी ने उन्हें उनके ही किले में घेर लिया।
क्या होगा आगे?
ईरान का सिस्टम वेनेजुएला मॉडल जैसा नहीं है जहां एक नेता के जाने से सब ढह जाए। वहां उत्तराधिकार के चार स्तर पहले से तय हैं। हालांकि, खामेनेई ने जिस फौलादी ढांचे को 35 सालों में खड़ा किया था उसका मस्तिष्क अब खत्म हो चुका है। अब दुनिया की नजरें इस पर हैं कि क्या ईरान इस झटके से उबरकर जवाबी कार्रवाई करेगा या फिर यह हमला एक नए सत्ता संघर्ष की शुरुआत है।
दुनिया और खाड़ी देशों पर प्रभाव
मध्य-पूर्व में शक्ति का संतुलन: ईरान ने दशकों से लेबनान के हिजबुल्लाह से लेकर यमन के हूतियों तक जो एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस खड़ा किया था उसका मार्गदर्शक अब नहीं रहा। नेतृत्व के इस अभाव में ये संगठन कमजोर पड़ सकते हैं जिससे इस्राइल और अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी रणनीतियां नए सिरे से थोपने का मौका मिलेगा।
वैश्विक ऊर्जा संकट और अर्थव्यवस्था: हमले की खबर मिलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। खाड़ी देशों में युद्ध की आहट से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बढ़ गया है, जिसका असर सीधा आम आदमी की जेब और वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।
ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष: ईरान का तंत्र उत्तराधिकार के लिए तैयार तो है, लेकिन खामेनेई जैसा करिश्माई और सख्त नेता ढूंढना मुश्किल है। ऐसे में कट्टरपंथियों और सुधारवादियों के बीच आंतरिक संघर्ष छिड़ सकता है, जो ईरान को अस्थिरता की ओर धकेल सकता है।
कूटनीतिक गतिरोध: ओमान की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ताएं अब पूरी तरह बेमानी हो चुकी हैं। यह घटना कूटनीति के अंत और सीधे सैन्य टकराव के एक नए युग की शुरुआत है।








