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    EPFO : 1000 में कैसे चले गुजारा? पेंशन बढ़ाने की सिफारिश तेज

    महंगाई के बीच 1000 रुपये की पेंशन पर सवाल। संसदीय समिति ने जीवन-यापन और स्वास्थ्य खर्च का दिया हवाला 7500 रुपये न्यूनतम पेंशन की मांग फिर तेज।
    teerandajBy teerandajMarch 18, 2026Updated:March 18, 2026No Comments
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    EPFO : देश में बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत के बीच 1000 रुपये मासिक पेंशन में गुजारा करना पेंशनभोगियों के लिए दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए संसद की स्थायी समिति ने सरकार से कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (ईपीएस-95) के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की सिफारिश की है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा समय में यह राशि पूरी तरह अपर्याप्त है और इसे तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए। समिति ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि बढ़ते स्वास्थ्य खर्च, दवाइयों की कीमतों में इजाफा और रोजमर्रा की जरूरतों के बढ़ते दामों के चलते बुजुर्गों के लिए 1000 रुपये में जीवनयापन संभव नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सामाजिक सुरक्षा के तहत आने वाली योजनाओं का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन देना है, लेकिन वर्तमान पेंशन राशि इस उद्देश्य को पूरा करने में नाकाम साबित हो रही है।

    पेंशनभोगियों की लंबे समय से यह मांग रही है कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7500 रुपये प्रति माह किया जाए। इस मांग को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में कई बार प्रदर्शन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। समिति ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए सरकार से इस पर सकारात्मक और शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। समिति का मानना है कि पेंशन में बढ़ोतरी से न केवल बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कर्मचारी पेंशन योजना के तहत आने वाले लाभार्थियों की संख्या काफी बड़ी है और उनमें से अधिकांश लोग पूरी तरह इसी पेंशन पर निर्भर हैं। ऐसे में न्यूनतम पेंशन का कम होना उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बनता है। समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार को इस दिशा में अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने पर भी विचार करना चाहिए। इसके अलावा, समिति ने ठेका मजदूरों और खान श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन श्रमिकों के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें समय पर लाभ मिल सके और किसी तरह की अनियमितता को रोका जा सके। ठेका श्रमिकों के लिए ई-श्रम पोर्टल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को और अधिक सुदृढ़ बनाने की भी सिफारिश की गई है।

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    बजट की कमी पर चिंता
    समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी है कि बजट की कमी के चलते कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। मंत्रालय को आवंटित धनराशि का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बजट की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा, श्रम सर्वेक्षण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य कल्याणकारी योजनाएं फंड की कमी के कारण धीमी पड़ सकती हैं।

    डिजिटल सुधार पर जोर
    समिति ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने और डेटा प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत भी बताई है। साथ ही सांसद निधि पोर्टल में सुधार कर योजनाओं की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने की बात कही गई है। समिति का मानना है कि डिजिटल सुधार से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और लाभार्थियों तक सुविधाएं समय पर पहुंच सकेंगी।

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